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2 घंटे पहले
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छत्तीसगढ़ में जैसे ही मानसून की बारिश शुरू होती है, वैसे ही वहां के जंगलों, खेतों और पेड़ों के आसपास एक अनोखी प्राकृतिक सौगात देखने को मिलती है। इसे स्थानीय लोग छाता पुटू या छाता मशरूम कहते हैं। बरसात के दिनों में छत्तीसगढ़ी रसोई में इस जंगली मशरूम की खुशबू बिखरने लगती है। स्वाद और पोषण से भरपूर यह जंगली सब्जी ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों तक में बेहद लोकप्रिय है। जांजगीर-चांपा जिले की रहने वाली अन्नू बंदे ने इसकी बेहद खास और पारंपरिक रेसिपी साझा की है, जो स्वाद में बेहद लाजवाब है।
जर्वे गांव की अन्नू बंदे से जानिए इसका पारंपरिक अंदाज
जांजगीर-चांपा जिले के जर्वे गांव में रहने वाली गृहिणी अन्नू बंदे बताती हैं कि बरसात का मौसम शुरू होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में छाता पुटू की तलाश तेज हो जाती है। यह पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से उगता है, इसलिए इसका स्वाद बाजार में मिलने वाले सामान्य मशरूम से कहीं अधिक बेहतर और देसी होता है। अन्नू का कहना है कि जब छत्तीसगढ़ी घरों में गरमा-गरम छाता मशरूम की सब्जी बनती है, तो पूरा घर इसकी खुशबू से महक उठता है। स्थानीय बोली में वह बताती हैं, “गरमा-गरम छाता मशरूम की सब्जी चावल के संग खायबर मजा आथे।” इसका मतलब है कि इसे गरमा-गरम चावल के साथ खाने का मजा ही कुछ और होता है।
बनाने से पहले सफाई करना है बेहद जरूरी
चूंकि छाता पुटू जंगलों, खेतों और मिट्टी के बीच प्राकृतिक रूप से उगता है, इसलिए इसकी सफाई करना सबसे महत्वपूर्ण काम है। अन्नू बंदे के अनुसार, जब इसे जंगलों से तोड़कर लाया जाता है, तो इसमें काफी मात्रा में मिट्टी, सूखी पत्तियां और जंगली कचरा चिपका रहता है। इसे पकाने से पहले इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
- सबसे पहले छाता पुटू को साफ पानी से कम से कम तीन से चार बार अच्छी तरह धोना चाहिए ताकि पूरी मिट्टी साफ हो जाए।
- धोने के बाद इसके बड़े टुकड़ों को चाकू की मदद से मध्यम आकार के टुकड़ों में काट लिया जाता है।
- समान आकार में काटने से यह सब्जी कड़ाही में बहुत जल्दी और समान रूप से पक जाती है।
देशी मसालों और छत्तीसगढ़ी तड़के का जादू
छत्तीसगढ़ी रसोई में बनने वाली इस सब्जी का असली राज इसके पारंपरिक तड़के में छिपा है। अन्नू ने इसकी विधि साझा करते हुए बताया कि कड़ाही में तेल गर्म करके सबसे पहले सरसों के दानों का तड़का लगाया जाता है। इसके बाद बारीक कटा प्याज और लहसुन डालकर उसे सुनहरा होने तक भुना जाता है। फिर इसमें टमाटर, हरी मिर्च, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और धनिया पाउडर जैसे बुनियादी घरेलू मसाले मिलाए जाते हैं। इन मसालों को धीमी आंच पर तब तक पकाया जाता है जब तक कि वे अच्छी तरह भुन न जाएं और तेल न छोड़ दें।
सिर्फ 5 से 7 मिनट में तैयार हो जाती है भुजिया
जब मसालों का मिश्रण अच्छी तरह तैयार हो जाता है, तो उसमें कटे हुए छाता पुटू को डाला जाता है। इसे मसालों के साथ अच्छी तरह मिलाया जाता है ताकि मसालों का स्वाद पुटू के अंदर तक समा जाए। इसके बाद कड़ाही को ढक दिया जाता है और मध्यम आंच पर करीब 5 से 7 मिनट तक पकाया जाता है। पुटू बहुत जल्दी नरम हो जाता है। जब सब्जी अच्छी तरह पककर नरम हो जाए, तो इसमें स्वादानुसार नमक मिलाकर गैस बंद कर दी जाती है। इस प्रकार बेहद कम समय में स्वादिष्ट छाता पुटू की भुजिया तैयार हो जाती है।
गरमा-गरम भात के साथ मिलता है असली स्वाद
छत्तीसगढ़ में भोजन की थाली बिना चावल यानी भात के अधूरी मानी जाती है। वैसे तो कई लोग इस मसालेदार सब्जी को रोटी या पराठे के साथ खाना भी पसंद करते हैं, लेकिन ग्रामीणों का मानना है कि इसका असली और पारंपरिक स्वाद केवल गरमा-गरम दाल-भात के साथ ही आता है। दोपहर या रात के भोजन में जब गरम चावल के ऊपर इस सब्जी को परोसा जाता है, तो खाने का स्वाद दोगुना हो जाता है।
स्वाद के साथ-साथ सेहत का खजाना
प्राकृतिक रूप से जंगलों में उगने वाला यह छाता पुटू न केवल जीभ का स्वाद बदलता है, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करते हैं। यही कारण है कि बरसात के मौसम में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी मांग आसमान छूने लगती है। लोग इसे बड़ी उत्सुकता से खरीदते हैं और अपने घरों में चाव से बनाकर खाते हैं।
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