बालोद में सिर्फ 35 रुपये की टिकिया चाट की मची धूम, रोजाना बिकती हैं 150 प्लेटें; जानें बनारस के प्रेमचंद का सफर जीवनशैली 3 घंटे पहले 4
छत्तीसगढ़ के बालोद में बनारसी स्वाद का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। घड़ी चौक पर मिलने वाली टिकिया चाट का स्वाद चखने के लिए दोपहर से रात तक भारी भीड़ उमड़ती है।

बालोद के घड़ी चौक पर उमड़ रही चाट प्रेमियों की भीड़

छत्तीसगढ़ के बालोद शहर में इन दिनों एक खास तरह का स्ट्रीट फूड लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। बनारसी स्वाद का जादू अब स्थानीय लोगों की जुबान पर इस कदर चढ़ गया है कि हर कोई इसका दीवाना नजर आ रहा है। दरअसल, बालोद के प्रसिद्ध घड़ी चौक के पास स्थित बीकानेर स्वीट्स पर मिलने वाली बनारसी टिकिया चाट आजकल चर्चा का मुख्य केंद्र बनी हुई है। इस चाट की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दोपहर से ही यहां ग्राहकों का तांता लगना शुरू हो जाता है, जो देर रात तक लगातार जारी रहता है।

इस दुकान पर मिलने वाली टिकिया चाट न केवल स्वाद में बेहतरीन है, बल्कि इसकी गुणवत्ता और मात्रा भी लोगों को बेहद आकर्षित करती है। सबसे बड़ी बात यह है कि बेहद किफायती दाम में मिलने के कारण हर वर्ग के लोग यहां चाट का लुत्फ उठाने पहुंचते हैं। रोज दोपहर से लेकर रात तक यहां चहल-पहल का माहौल बना रहता है और लोग बड़े चाव से इस पारंपरिक बनारसी स्वाद का आनंद लेते हैं।

बनारस की गलियों से बालोद तक का सफर

इस लाजवाब और स्वादिष्ट टिकिया चाट को तैयार करने वाले कारीगर का नाम प्रेमचंद है। प्रेमचंद मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध शहर बनारस के रहने वाले हैं। बनारस को वैसे भी अपने बेहतरीन खान-पान और चाट-पकौड़ी के लिए देश भर में जाना जाता है। प्रेमचंद ने अपने इसी पारंपरिक बनारसी हुनर को अब बालोद के लोगों के बीच परोसना शुरू कर दिया है।

प्रेमचंद को चाट बनाने का बहुत लंबा अनुभव है। वे पिछले 18 साल से लगातार इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं। अपनी इस यात्रा के बारे में बात करते हुए प्रेमचंद बताते हैं कि उन्होंने चाट बनाने की कला अचानक नहीं सीखी। शुरुआती दिनों में उन्होंने बनारस की ही एक स्थानीय चाट दुकान पर हेल्पर के रूप में काम करना शुरू किया था। वहां काम करते हुए उन्होंने चाट बनाने की हर छोटी-बड़ी बारीकी को बहुत ध्यान से सीखा। धीरे-धीरे वे इस काम में पूरी तरह निपुण हो गए और बाद में उन्होंने इसी हुनर को अपनी आजीविका का मुख्य साधन बना लिया। आज उनकी यही लगन और मेहनत बालोद के लोगों के स्वाद का हिस्सा बन चुकी है।

जानिए क्या है इस खास टिकिया चाट की रेसिपी

आखिर इस बनारसी टिकिया चाट में ऐसा क्या खास है जो लोग इसे खाते ही इसके मुरीद हो जाते हैं? इस सवाल का जवाब देते हुए प्रेमचंद बताते हैं कि इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्रियां और उनके अनुपात का विशेष ध्यान रखा जाता है। मुख्य रूप से निम्नलिखित सामग्रियों की मदद से यह लाजवाब टिकिया तैयार की जाती है:

  • आलू: टिकिया का मुख्य आधार उबले हुए आलू होते हैं, जिन्हें अच्छे से मैश किया जाता है।
  • बेसन और चना दाल: टिकिया को सही कुरकुरापन देने और अंदरूनी बनावट को स्वादिष्ट बनाने के लिए बेसन और चना दाल का बेहतरीन मिश्रण मिलाया जाता है।
  • मसाले: स्वाद को दोगुना करने के लिए इसमें जीरा, नमक और अन्य विशेष घरेलू मसालों का उपयोग किया जाता है।

इन सभी चीजों को मिलाकर सबसे पहले एक गोल आकार की टिकिया तैयार की जाती है। इसके बाद इसे गर्म तवे पर दोनों तरफ से अच्छी तरह से सेंका जाता है ताकि यह पूरी तरह से कुरकुरी हो जाए। जब टिकिया बनकर तैयार हो जाती है, तो इसे विभिन्न प्रकार की चटनी, दही और मसालों के साथ सजाकर ग्राहकों को परोसा जाता है। टिकिया का यही लाजवाब स्वाद लोगों को बार-बार यहां आने के लिए मजबूर करता है।

कम कीमत और भारी बिक्री

इस दुकान की सबसे बड़ी खासियत इसकी कीमत और मिलने वाली क्वांटिटी है। आज के समय में जहां महंगाई लगातार बढ़ रही है, वहीं यहां मात्र 35 रुपये में भरपूर मात्रा में एक प्लेट टिकिया चाट परोसी जाती है। इतनी कम कीमत में मिलने वाला बेहतरीन स्वाद ही ग्राहकों को सबसे ज्यादा लुभाता है। यही कारण है कि यहां रोजाना लगभग 150 प्लेट टिकिया चाट की बिक्री बहुत आसानी से हो जाती है।

यदि आप भी इस स्वाद का आनंद लेना चाहते हैं, तो आपको दोपहर के समय यहां पहुंचना होगा। दुकान पर चाट की बिक्री रोजाना दोपहर करीब 1 बजे शुरू हो जाती है और यह सिलसिला लगातार रात के 8 बजे तक चलता रहता है। इस दौरान दुकान के बाहर लगातार लोगों की भीड़ देखी जा सकती है। बालोद में यह स्थान अब केवल एक साधारण चाट की दुकान नहीं रह गया है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए शाम के समय इकट्ठा होने और स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड का मजा लेने का एक प्रमुख अड्डा बन चुका है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप