Chhapra: 40 साल पुरानी मिठाई की दुकान, रोजाना 1 क्विंटल दूध से बनते हैं मशहूर गुलाब जामुन जीवनशैली एक महीने पहले 51
बिहार के Chhapra में स्थित एक पुरानी दुकान अपने खास गुलाब जामुन के लिए मशहूर है, जहां शुद्धता के चलते रोजाना 1 क्विंटल दूध की खपत होती है और शाम तक सारा स्टॉक बिक जाता है।

40 साल का भरोसा और बेमिसाल स्वाद

Chhapra के रिविलगंज प्रखंड में स्थित 'इनई पुल' बाजार की एक मिठाई की दुकान ने अपने स्वाद और शुद्धता के दम पर अलग पहचान बनाई है। यह दुकान पिछले 40 वर्षों से लोगों की पसंदीदा बनी हुई है। इस दुकान की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां का स्वाद चखने के लिए शहर के अलावा पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से भी लोग बड़ी संख्या में आते हैं।

पिता की विरासत को संभाल रही अगली पीढ़ी

इस दुकान की नींव Rameshwar Singh ने रखी थी। वर्तमान में उनके बेटे Pankaj Singh, Pawan Singh और Jeevan Singh मिलकर इस पुश्तैनी काम को आगे बढ़ा रहे हैं। दुकानदारों का दावा है कि जो स्वाद और शुद्धता 40 साल पहले थी, उसे आज भी पूरी तरह बरकरार रखा गया है। यही कारण है कि बच्चे हों या बुजुर्ग, हर आयु वर्ग के लोग यहां की मिठाइयों के शौकीन हैं।

कैसे तैयार होते हैं खास गुलाब जामुन?

दुकान की सबसे बड़ी खासियत यहां की साफ-सफाई और शुद्धता है। मिठाइयां तैयार करने की प्रक्रिया काफी पारंपरिक है:

  • शुद्ध खोआ बनाने के लिए उत्तर प्रदेश और स्थानीय गांवों से रोजाना दूध मंगाया जाता है।
  • दूध को कोयले की आंच पर घंटों तक जलाकर बिना मिलावट वाला मावा तैयार किया जाता है।
  • Jeevan Singh के अनुसार, रोजाना 1 क्विंटल (100 लीटर) दूध का इस्तेमाल गुलाब जामुन बनाने में होता है।
  • इतनी भारी मात्रा में बनने के बावजूद, शाम होते-होते सारी मिठाइयां बिक जाती हैं।

इनई पुल के रास्ते सफर करने वाले लोग भी अक्सर अपनी गाड़ियां रोककर यहां के गुलाब जामुन पैक करवाना नहीं भूलते। कम कीमत में बेहतरीन क्वालिटी ही इस दुकान की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) है।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप