आईपीओ
एक घंटा पहले
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आईपीओ के लिए सेबी से मिली मंजूरी
भारत की प्रमुख फिनटेक कंपनी रेजरपे ने अपने प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ के लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड सेबी से आवश्यक मंजूरी प्राप्त कर ली है। इस मामले से जुड़े करीबी सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी साझा की। रेजरपे अपनी इस योजना के जरिए बाजार से 5000 से 6000 करोड़ रुपये तक की राशि जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। कंपनी की मंशा इस पब्लिक इश्यू के माध्यम से कुल 5 अरब डॉलर का वैल्यूएशन हासिल करने की है। गौरतलब है कि रेजरपे ने इस साल जून के महीने में सेबी के समक्ष कॉन्फिडेंशियल रूट यानी गोपनीय प्रक्रिया के जरिए अपने ड्राफ्ट पेपर्स जमा किए थे।
कॉन्फिडेंशियल फाइलिंग की सुविधा
कंपनियों के लिए कॉन्फिडेंशियल फाइलिंग एक बेहद उपयोगी विकल्प है। इसके तहत कंपनियां सेबी के पास समीक्षा के लिए अपने ड्राफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट्स गोपनीय रूप से जमा कर सकती हैं। इसका मुख्य लाभ यह है कि उन्हें अपनी संवेदनशील व्यावसायिक जानकारी और वित्तीय आंकड़ों को तुरंत आम जनता के बीच उजागर नहीं करना पड़ता है। रेजरपे की शुरुआत वर्ष 2014 में हर्षिल माथुर और शशांक कुमार ने की थी, जिन्होंने इसे आज एक बड़े फिनटेक संस्थान के रूप में स्थापित किया है।
2020 में बनी यूनिकॉर्न कंपनी
रेजरपे के लिए वर्ष 2020 एक मील का पत्थर साबित हुआ था, जब कंपनी ने यूनिकॉर्न का दर्जा प्राप्त किया। बाजार की शब्दावली में यूनिकॉर्न ऐसी निजी स्टार्टअप कंपनियों को कहा जाता है, जिनकी कुल वैल्यूएशन कम से कम 1 अरब अमेरिकी डॉलर यानी करीब 8000 करोड़ रुपये से अधिक होती है और उनके शेयर स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध नहीं होते हैं। समय के साथ रेजरपे ने अपनी सेवाओं का दायरा बढ़ाते हुए केवल भुगतान सुविधा तक सीमित न रहकर एक संपूर्ण वित्तीय इकोसिस्टम तैयार कर लिया है। आज इसके एकीकृत मंच के जरिए व्यापारी भुगतान संग्रह, पेआउट, पेरोल प्रबंधन और नकदी प्रवाह जैसी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित कर सकते हैं, साथ ही उन्हें पूंजी तक आसान पहुंच भी मिलती है।
दिग्गज निवेशकों का समर्थन
रेजरपे की विकास यात्रा में कई बड़े वैश्विक और घरेलू निवेशकों का हाथ रहा है। कंपनी को पीक XV पार्टनर्स, GIC, टाइगर ग्लोबल, रिबिट कैपिटल, लोन पाइन कैपिटल, एल्केऑन कैपिटल और TCV जैसी प्रमुख निवेश फर्मों का मजबूत समर्थन हासिल है। दूसरी तरफ, बाजार में रेजरपे की प्रतिस्पर्धी कंपनी PhonePe का आईपीओ अभी फिलहाल अधर में लटका हुआ है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की अस्थिरता को देखते हुए कंपनी ने मार्च 2026 तक अपनी इस प्रक्रिया को रोक दिया था। PhonePe की योजना 9 से 10.5 अरब अमेरिकी डॉलर के वैल्यूएशन पर 1 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की पूंजी जुटाने की थी।
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