झारखंड राज्यसभा चुनाव: क्रॉस वोटिंग की आशंका में NDA सतर्क, विधायक फाइव-स्टार होटल पहुंचे झारखंड एक महीने पहले 48
राज्यसभा की दो सीटों पर मतदान से दो दिन पहले झारखंड में सियासी हलचल तेज है। क्रॉस वोटिंग के डर के बीच एनडीए ने अपने विधायकों को रांची के एक आलीशान फाइव-स्टार होटल में ठहराया है।

झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मतदान गुरुवार को निर्धारित है, लेकिन उससे दो दिन पहले मंगलवार को एनडीए ने अपने विधायकों को रांची के एक भव्य फाइव-स्टार होटल में ठहरा दिया। इस घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, क्रॉस वोटिंग की आशंका के चलते संख्या बल को संगठित रखने और किसी भी तरह की टूट से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है।

मैदान में तीन उम्मीदवार

राज्य की इन दोनों सीटों के लिए तीन प्रत्याशी आमने-सामने हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की ओर से बैद्यनाथ राम, कांग्रेस से प्रणव झा और भारतीय जनता पार्टी (BJP) समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नथवाणी चुनावी मुकाबले में हैं।

संख्या बल का गणित

जीत दर्ज करने के लिए हर उम्मीदवार को कम से कम 28 प्रथम वरीयता वोटों की दरकार है। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल को देखते हुए एनडीए के पास परिमल नथवाणी की जीत पक्की करने लायक आंकड़े तब तक नहीं हैं, जब तक विपक्षी खेमे से क्रॉस वोटिंग न हो। यही कारण है कि पार्टी अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है।

होटल पहुंचने का सिलसिला

मंगलवार सुबह करीब 11:30 बजे से ही भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की निगरानी में एनडीए विधायकों का होटल पहुंचना शुरू हो गया था। शाम 6 बजे तक एनडीए के कुल 24 विधायकों में से भाजपा के कम से कम 14 विधायक होटल पहुंच चुके थे। इनके अलावा सहयोगी दल एलजेपी (आर) और आजसू (AJSU) के इकलौते विधायक भी वहां पहुंच गए थे। बताया जा रहा है कि बाकी विधायक भी जल्द ही पहुंचने वाले हैं।

भाजपा नेताओं की सफाई

इस पूरे घटनाक्रम पर वरिष्ठ भाजपा नेता और विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने सफाई देते हुए कहा कि अगर वे यहां मौजूद हैं तो इसमें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

आखिर इतने अच्छे और बड़े होटल किसलिए बने हैं? हमें एक साथ बैठने और चर्चा करने का समय बहुत कम मिल पाता है।
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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