रांची में साइबर ठगों का बड़ा नेटवर्क: युवाओं को देते थे 20 हजार सैलरी और मोटा कमीशन झारखंड 6 घंटे पहले 2
रांची पुलिस ने एक ऐसे साइबर गिरोह का खुलासा किया है जो बेरोजगार युवाओं को नौकरी पर रखकर उनसे ठगी कराता था। आरोपी न केवल वेतन देते थे, बल्कि ठगी की रकम पर कमीशन भी बांटते थे।

रांची में साइबर अपराध का अनोखा नेटवर्क

झारखंड की राजधानी रांची में साइबर अपराध का एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है जिसने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है। यहाँ एक साइबर अपराधी गिरोह बेरोजगार युवाओं को नौकरी का लालच देकर अपराध की दुनिया में धकेल रहा था। इस पूरे गिरोह का संचालन रांची के पंडरा ओपी थाना क्षेत्र में चल रहे दो रिहायशी अपार्टमेंट से किया जा रहा था। गिरोह के सदस्य युवाओं को 20,000 रुपये की मासिक पगार पर काम पर रखते थे और उनसे आम लोगों को फोन के जरिए ठगने का काम करवाते थे।

पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी

सूचना मिलने पर रांची पुलिस ने पंडरा ओपी इलाके के पराशर और मालती अपार्टमेंट में छापेमारी की। इस कार्रवाई में पुलिस ने कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने मौके से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है। बरामद सामानों में 8 लाख रुपये नकद, 36 मोबाइल फोन, 32 बैंक पासबुक, बड़ी संख्या में सिम कार्ड और लैपटॉप शामिल हैं। पकड़े गए आरोपियों में से 9 लोग पलामू जिले के रहने वाले हैं और 1 आरोपी गढ़वा जिले का निवासी है।

सैलरी के साथ कमीशन का लालच

पुलिस की पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह गिरोह युवाओं को अपराध के लिए प्रोत्साहित करने हेतु एक व्यवस्थित मॉडल का पालन कर रहा था। युवाओं को न केवल 20,000 रुपये का निश्चित वेतन मिलता था, बल्कि साइबर ठगी से होने वाली अवैध कमाई में से उन्हें अतिरिक्त कमीशन भी दिया जाता था। गिरोह में 3 मुख्य ऑपरेटर सक्रिय थे, जो युवाओं को निर्देश देते थे कि किस तरह लोगों को फोन कॉल करके झांसे में लेना है। इस प्रणाली के जरिए युवाओं को अधिक ठगी करने के लिए प्रेरित किया जाता था, जिससे वे लालच में आकर अपराध को अंजाम देते रहे।

डेटा चोरी का बड़ा खेल

पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि यह गैंग आम लोगों की निजी जानकारी जुटाकर उन्हें ठगी का निशाना बनाता था। प्रारंभिक जांच के अनुसार, ये लोग ऑनलाइन मार्केटिंग वेबसाइटों, कुरियर कंपनियों और अन्य संदिग्ध स्रोतों से लोगों का डेटा खरीदते थे। रांची के सिटी एसपी पारस राणा ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि डेटा जुटाने के इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस अब इस बात का पता लगा रही है कि इस गिरोह को लोगों की निजी जानकारी कौन मुहैया करा रहा था और इसमें और कौन-कौन से चेहरे शामिल हो सकते हैं। इस मामले में पुलिस आगे की पूछताछ कर रही है ताकि साइबर अपराध के इस पूरे जाल को जड़ से खत्म किया जा सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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