राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव ने उस वक्त नाटकीय रूप ले लिया, जब शपथपत्र में जानकारी छिपाने के आरोप के आधार पर कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया गया। पार्टी ने इस कदम को लोकतंत्र की हत्या बताते हुए कहा कि यह अब महज 'वोट चोरी' का मामला नहीं, बल्कि सीधे-सीधे 'सीट चोरी' का मामला बन चुका है।
नामांकन रद्द होते ही निर्वाचन आयोग पहुंचे कांग्रेस नेता
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद कांग्रेस के कई बड़े नेता आक्रामक हो गए और सीधे भारत निर्वाचन आयोग के दफ्तर जा पहुंचे। जयराम रमेश, केसी वेणुगोपाल, भूपेश बघेल, सचिन पायलट समेत कई नेता वहां मौजूद रहे।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने इस फैसले को पूरी तरह अलोकतांत्रिक करार देते हुए कहा कि लोकतंत्र की हत्या कर दी गई है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, "यह लोकतंत्र से जुड़ा बुनियादी सवाल है। जब तक हमें भीतर जाने की इजाजत नहीं मिलती, हम यहीं डटे रहेंगे। हम बेहद जिम्मेदार लोग हैं। यहां पूर्व मुख्यमंत्री, उप-मुख्यमंत्री और सांसद मौजूद हैं।"
हाईकोर्ट या सीधे सुप्रीम कोर्ट?
पार्टी इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती देगी या सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी, इस पर नेताओं ने कोई स्पष्ट रुख नहीं रखा। हालांकि वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने राय दी कि यह ऐसा मामला है जिसे सीधे सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जानी चाहिए।
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि उनकी उम्मीदवार के खिलाफ न तो कोई एफआईआर है और न ही कोई चार्जशीट, इसके बावजूद बिना किसी ठोस वजह के नामांकन रद्द कर दिया गया। उन्होंने कहा, "हम यहां आए हैं, लेकिन हमें अंदर नहीं जाने दिया जा रहा। हमने दो घंटे पहले लिखित में जानकारी दी थी। जिस सीट पर हम जीत की स्थिति में थे, वहीं हमारी उम्मीदवार का नामांकन निरस्त कर दिया गया।" पायलट ने यह भी कहा कि यह पहली बार है जब सिर्फ एक नोटिस के आधार पर किसी राज्यसभा उम्मीदवार का नामांकन रद्द किया गया है।
मीनाक्षी नटराजन का पलटवार
अपना नामांकन रद्द होने पर मीनाक्षी नटराजन ने कहा कि पूरा प्रकरण तभी शुरू हो गया था जब पर्याप्त संख्या बल न होने के बावजूद भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतार दिया। उनके मुताबिक इससे साफ हो गया कि सत्तारूढ़ दल संविधान और लोकतंत्र को कुचलने वाली राजनीति कर रहा है।
भोपाल में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए नटराजन ने कहा, "अब तक मामला वोट चोरी तक सीमित था, अब यह सीट चोरी तक पहुंच गया है। जब उन्हें लगा कि कांग्रेस के विधायक एकजुट हैं, तो उन्होंने उस कानूनी नोटिस का सहारा लिया जिसे संज्ञान में ही नहीं लिया गया था।"
नटराजन ने इसे केवल एक उम्मीदवारी का सवाल मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह 'भारत की सोच' और लोकतंत्र के लिए चल रहे व्यापक संघर्ष से जुड़ा मुद्दा है, जिसके लिए राहुल गांधी देश के लिए अहम लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या लोकतंत्र बचेगा, क्या भारत का संघीय ढांचा कायम रहेगा और क्या एक-पार्टी सिस्टम तथा तानाशाही थोपने की कोशिश नाकाम होगी।
'राजनीतिक द्वेष का काम'
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि पार्टी पूरी ताकत के साथ इसका मुकाबला करेगी। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से जुड़े कानूनी और चुनावी आरोपों तथा जिस तरह पार्टी के कानूनी विशेषज्ञों ने स्थिति को संभाला, उसे देखते हुए अधिकारी कानूनी आधार को यूं ही खारिज नहीं कर सकते थे। उनके अनुसार, इसके बावजूद जो हुआ वह पूरी तरह राजनीतिक द्वेष का परिणाम था।
भाजपा ने बताया सच और संविधान की जीत
दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने इस फैसले का स्वागत किया। विधायक भगवान दास सबनानी ने कहा कि इसे संविधान की जीत के रूप में देखा जाना चाहिए, क्योंकि गलत जानकारी इसी मंच पर उजागर हुई और कांग्रेस की असलियत सामने आ गई। उन्होंने कहा कि अगर फॉर्म ही ठीक से नहीं भरा गया, तो संविधान के प्रति सम्मान कहां रह जाता है।
भाजपा नेता राकेश सिंह ने कहा कि सच की जीत हुई है। उनके मुताबिक नटराजन ने जानबूझकर जानकारी छिपाई, फॉर्म अधूरा था और गलत सूचना दी गई थी, जिसी आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन रद्द किया। उन्होंने इसे सच और ईमानदारी की जीत बताया।
मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि उनकी पार्टी न्यायपालिका का सम्मान करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि आपराधिक मामले को जानबूझकर छिपाया गया और गलत जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि न्याय हुआ है और पार्टी कार्यकर्ता महेश केवट को लोगों का आशीर्वाद मिला है।
तेलंगाना में चल रहे मामले का जिक्र
वकील संकेत गुप्ता ने कहा कि भाजपा ने यह कानूनी लड़ाई कानूनी तरीके से, चुनाव आयोग की गाइडलाइंस और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर लड़ी। उन्होंने बताया कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ तेलंगाना में एक मामला चल रहा है, जिसकी जानकारी उन्हें थी और इसी संबंध में उन्होंने अपने वकील के जरिए जवाब भी दाखिल किया था। गुप्ता के अनुसार रिटर्निंग ऑफिसर ने यह फैसला सुनाया कि नटराजन ने अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले की जानकारी जानबूझकर छिपाई।
केवट ने जताया आभार
भाजपा के राज्यसभा उम्मीदवार महेश केवट ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री मोहन यादव और पार्टी की राज्य व राष्ट्रीय स्तर की पूरी लीडरशिप ने एक साधारण कार्यकर्ता को यह जिम्मेदारी सौंपी है, जिसके लिए वे आभारी हैं। उन्होंने भगवान श्रीराम के वनवास के दौरान केवट और निषाद राज को गले लगाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इसी भावना के साथ पार्टी ने उनके साथ व्यवहार किया है।
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