कुलगाम आतंकी हमला: कौन थे छत्तीसगढ़ के दीपक रात्रे? जिनकी मौत से बुझ गया पूरे परिवार की उम्मीदों का दीया छत्तीसगढ़ एक घंटा पहले 2
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हुए आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की मौत हो गई। इनमें से एक दीपक रात्रे थे, जो अपने घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और अपने पीछे बूढ़ी मां, दिव्यांग भाई, पत्नी और मासूम बच्चे को छोड़ गए हैं।

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हाल ही में हुए एक दर्दनाक आतंकी हमले ने छत्तीसगढ़ के दो गरीब परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन ली हैं। इस कायरतापूर्ण हमले में छत्तीसगढ़ से रोजी-रोटी कमाने गए दो मजदूरों की गोली लगने से मौत हो गई। दोनों मजदूर कुलगाम के केलम इलाके में स्थित एक ईंट-भट्टे पर काम करते थे और वहां रहकर अपने परिवार का पेट पाल रहे थे। इस दुखद खबर के बाद से पूरे इलाके और पीड़ित परिवारों के गांव में मातम पसरा हुआ है।

दर्दनाक हमले में दो मजदूरों ने गंवाई जान

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आतंकियों की इस अंधाधुंध गोलीबारी में दीपक रात्रे की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, उनके साथी भूपेंद्र इस हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। भूपेंद्र को आनन-फानन में इलाज के लिए अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। प्रशासन द्वारा दोनों मृतकों का अंतिम संस्कार कश्मीर में ही कर दिया गया है, जिसकी सूचना उनके परिजनों को दे दी गई है।

कौन थे दीपक रात्रे? घर के इकलौते सहारा

इस आतंकी हमले का शिकार बने दीपक रात्रे छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के रहने वाले थे। उनका गांव बुंदेली अब गहरे शोक में डूबा हुआ है। दीपक करीब आठ से नौ महीने पहले ही अपने दो साल के मासूम बेटे और पत्नी को साथ लेकर कश्मीर गए थे ताकि वहां ईंट-भट्टे पर काम करके कुछ पैसे कमा सकें और अपने परिवार का बेहतर लालन-पालन कर सकें। लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिस आजीविका की तलाश में वह अपना घर छोड़कर इतनी दूर जा रहे हैं, वहीं उनकी जिंदगी का सफर खत्म हो जाएगा।

परिवार के सामने खड़ा हुआ आजीविका का संकट

दीपक रात्रे के सिर से पिता का साया पहले ही उठ चुका था। उनके घर में निम्नलिखित सदस्य हैं जिनकी पूरी जिम्मेदारी अकेले दीपक के कंधों पर थी:

  • उनकी बुजुर्ग और बूढ़ी मां
  • एक छोटा भाई, जो दिव्यांग होने के कारण कोई काम करने में असमर्थ है
  • उनकी पत्नी और एक दो साल का छोटा बेटा

घर में दीपक ही एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जो कमाकर लाते थे और पूरा परिवार उन्हीं की आय पर निर्भर था। उनके छोटे भाई के दिव्यांग होने की वजह से घर में आय का दूसरा कोई साधन नहीं है। दीपक की असमय मौत के बाद अब इस गरीब परिवार के सामने जीवन-यापन का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। घर चलाने वाली एकमात्र उम्मीद भी अब हमेशा के लिए खत्म हो चुकी है और पूरा परिवार इस सदमे से उबर नहीं पा रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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