छत्तीसगढ़
एक घंटा पहले
3
विचारों
रायपुर के शदाणी दरबार की एक और बड़ी पहल
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित शदाणी दरबार एक बार फिर उन पाकिस्तानी हिंदुओं के लिए मसीहा बनकर सामने आया है जो दोनों देशों के बीच उपजे कूटनीतिक तनाव के कारण अपने परिवारों से दूर हैं। ऑपरेशन सिंदूर के तहत मिली कामयाबी के बाद, अब शदाणी दरबार ने करीब 600 और पाकिस्तानी हिंदुओं को भारत लाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक विस्तृत सूची सौंपी जाएगी, ताकि उन्हें विशेष वीजा की सुविधा मिल सके।
कौन-कौन शामिल है नई सूची में
शदाणी दरबार द्वारा तैयार की गई इस नई सूची में केवल दुल्हनें ही शामिल नहीं हैं, बल्कि वे परिवार भी हैं जो भारत और पाकिस्तान के बीच बंट गए थे। इस सूची में निम्नलिखित वर्गों के लोग प्रमुखता से शामिल हैं:
- पाकिस्तान से भारत आकर शादी करने की तैयारी कर रही दुल्हनें।
- वे परिवार जो लंबे समय से भारत और पाकिस्तान में अलग-अलग रह रहे हैं।
- सिंधी हिंदू समुदाय के साथ-साथ मारवाड़ी, गुजराती और सरायकी समुदाय के लोग।
- परिवार के वे सदस्य जो अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए लंबे समय से वीजा का इंतजार कर रहे हैं।
शदाणी दरबार के सचिव उदयलाल शदाणी ने बताया कि इस बार की सूची को बहुत सावधानी से तैयार किया गया है और सभी नामों को अंतिम रूप देने के बाद इसे जल्द ही दिल्ली भेजा जाएगा।
परिवारों को फिर से मिलाने का संकल्प
रायपुर स्थित शदाणी दरबार के नौवें पीठाधीश संत युधिष्ठिरलाल का कहना है कि भारत-पाकिस्तान का विभाजन हुए कई दशक बीत चुके हैं, लेकिन आज भी कई हिंदू परिवार दो देशों के बीच बंटे हुए हैं। कई मामलों में परिवार के कुछ सदस्य भारत में बस गए हैं, जबकि उनके माता-पिता या भाई-बहन अभी भी पाकिस्तान में रह रहे हैं। दोनों देशों के बीच यात्रा के साधन सीमित होने और सीमाएं बंद होने से इन परिवारों के लिए एक-दूसरे से मिलना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। संत युधिष्ठिरलाल ने बताया कि 1968 से ही रायपुर में रहकर वे इन परिवारों की मदद का प्रयास कर रहे हैं और पिछली बार 150 दुल्हनों को भारत लाने में मिली सफलता इसी का परिणाम थी।
तीसरे देशों के जरिए सफर की मजबूरी
वर्तमान में भारत और पाकिस्तान के बीच अटारी-वाघा सीमा बंद होने की स्थिति में सीधे सफर करना मुमकिन नहीं है। पिछली बार जब 150 दुल्हनें अप्रैल से जून के बीच भारत पहुंची थीं, तो उन्हें मस्कट, दुबई, कोलंबो, ढाका और कतर जैसे तीसरे देशों के रास्ते हवाई यात्रा करके यहां तक पहुंचना पड़ा था। नई सूची में शामिल होने वाले लोगों को भी जब तक सीमाएं पूरी तरह नहीं खुलतीं, तब तक इसी प्रकार के वैकल्पिक और कठिन हवाई मार्गों का सहारा लेना पड़ सकता है। शदाणी दरबार का लक्ष्य इन लोगों के लिए वीजा प्रक्रिया को सुगम बनाना है ताकि वे सुरक्षित रूप से अपने स्वजन तक पहुंच सकें।
Comments
0 comment