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एक घंटा पहले
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विदेश जाकर उच्च शिक्षा हासिल करने और वहां एक बेहतरीन करियर बनाने का सपना हर साल भारत के हजारों होनहार युवा देखते हैं। लेकिन कई बार इन सुनहरे सपनों के पीछे छिपी कड़वी सच्चाई बेहद दर्दनाक साबित होती है। ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला अमेरिका से सामने आया है, जहां हैदराबाद के रहने वाले 24 वर्षीय भारतीय छात्र साई प्रदीप उर्फ दीपू ने कथित तौर पर बेरोजगारी और बढ़ते मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या कर ली। इस दुखद खबर ने हैदराबाद में उनके परिजनों को पूरी तरह से तोड़कर रख दिया है। जिस बेटे को उन्होंने बड़े अरमानों के साथ सात समंदर पार भेजा था, अब उसका शव वापस लाने के लिए परिवार संघर्ष कर रहा है।
सैन एंटोनियो का सफर और आंखों में तैरते सुनहरे सपने
हैदराबाद के दम्मईगुडा इलाके के रहने वाले साई प्रदीप एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते थे। साल 2024 में जब प्रदीप ने अपनी आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका जाने की तैयारी की, तो पूरे परिवार में खुशी और गर्व का माहौल था। वह ‘यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास एट सैन एंटोनियो’ (UTSA) में मास्टर्स की पढ़ाई के लिए दाखिल हुए थे। उनके माता-पिता और करीबियों की आंखों में उनके उज्जवल भविष्य को लेकर बड़े-बड़े सपने तैर रहे थे। प्रदीप ने वहां अपनी मास्टर्स की डिग्री सफलतापूर्वक पूरी भी कर ली, लेकिन डिग्री मिलने के बाद जीवन का जो सफर शुरू हुआ, उसने उनके हौसले को हिलाकर रख दिया।
नौकरी की तलाश और मानसिक तनाव का भयानक दौर
डिग्री पूरी होने के बाद प्रदीप ने अमेरिकी जॉब मार्केट में प्रवेश किया, जो वर्तमान में बेहद कठिन दौर से गुजर रहा है। प्रदीप पिछले चार महीनों से एक अदद नौकरी पाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे थे। वह दिन-रात एक करके इंटरव्यू दे रहे थे, लेकिन कड़े मुकाबले और हर बार मिलने वाली निराशा ने उन्हें भीतर से तोड़ना शुरू कर दिया था। उनके दोस्तों और परिजनों के अनुसार, हर इंटरव्यू के साथ उनकी उम्मीदें कम होती जा रही थीं और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ती जा रही थी। सिर पर घर की उम्मीदों का भारी बोझ और अमेरिका में खुद को साबित करने का दबाव उन्हें धीरे-धीरे गहरे अवसाद की ओर ले गया। आखिरकार 21 अगस्त को इस मानसिक दबाव के आगे उन्होंने घुटने टेक दिए और यह आत्मघाती कदम उठा लिया।
चुनौतियों से हार न मानने वाला जुझारू स्वभाव
साई प्रदीप को जानने वाले लोग उन्हें एक जीवंत, हंसमुख और सकारात्मक ऊर्जा से भरे इंसान के रूप में याद करते हैं। उनकी कजिन दीप्ति ने उनके बारे में बात करते हुए कहा कि वह एक बेहद प्यारे, दयालु और पक्के इरादे वाले व्यक्ति थे। बचपन से ही प्रदीप को कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने कभी भी अपनी बीमारियों को अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया। अपने अनुशासन और फिटनेस के प्रति समर्पण के बल पर उन्होंने जिम में घंटों पसीना बहाया और खुद को एक बेहद मजबूत इंसान के रूप में ढाला। वह अपने आसपास के लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत थे। अपनी सीखने की ललक के कारण ही उन्होंने अमेरिका में रहने के दौरान स्पेनिश भाषा भी सीखी थी। उनके इस तरह अचानक चले जाने से माता-पिता और पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, जिसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन है।
पार्थिव शरीर को भारत लाने के लिए फंड जुटाने की मुहिम
इस बेहद कठिन घड़ी में प्रदीप के पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक भारत वापस लाने और उनके अंतिम संस्कार के लिए परिजनों ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। उनकी कजिन दीप्ति ने सोशल मीडिया और क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म ‘गोफंडमी’ पर एक विशेष मुहिम शुरू की है। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कैंपेन का उद्देश्य प्रदीप के शव को भारत भेजने और अंतिम संस्कार के खर्चों को पूरा करने के लिए $35,000 की राशि जुटाना है। दीप्ति ने बताया है कि यदि इस मुहिम के माध्यम से निर्धारित राशि से अधिक फंड इकट्ठा होता है, तो बची हुई पूरी रकम का इस्तेमाल प्रदीप के माता-पिता की आर्थिक सहायता के लिए किया जाएगा, जो इस समय अपने इकलौते सहारे को खोने के गहरे सदमे में हैं।
मानसिक स्वास्थ्य और सहायता के लिए हेल्पलाइन
इस दुखद घटना ने एक बार फिर विदेशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और उन पर होने वाले करियर के दबाव को लेकर एक गंभीर चिंता पैदा कर दी है। यदि आपके आसपास कोई व्यक्ति मानसिक तनाव, अवसाद या निराशा से जूझ रहा है, या आपको लगता है कि किसी के मन में खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आ रहे हैं, तो कृपया तुरंत मदद लें। आप किसी भी समय हेल्पलाइन नंबर 9152987821 पर संपर्क करके आवश्यक सहायता और परामर्श प्राप्त कर सकते हैं। समय पर ली गई सही सलाह और अपनों का साथ किसी की कीमती जिंदगी को बचा सकता है।
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