रायपुर में आमरण अनशन पर क्यों बैठे हैं अभ्यर्थी? कई कैंडिडेट्स की बिगड़ी सेहत, अस्पताल में कराना पड़ा भर्ती छत्तीसगढ़ एक महीने पहले 21
छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के तहत नियुक्ति की मांग को लेकर डी.एड. अभ्यर्थी रायपुर के तूता धरना स्थल पर आमरण अनशन पर हैं। आंदोलन के 169वें दिन कई अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ गई और एक अभ्यर्थी को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के तहत नियुक्ति की मांग को लेकर डी.एड. (डिप्लोमा इन एजुकेशन) योग्यता वाले अभ्यर्थियों का आंदोलन दिन-ब-दिन तीखा होता जा रहा है। राजधानी रायपुर के तूता धरना स्थल पर ये अभ्यर्थी पिछले कई महीनों से डटे हुए हैं और अब उनका विरोध आमरण अनशन के चरण तक पहुंच चुका है। अभ्यर्थियों का कहना है कि पात्र होने के बावजूद उन्हें अब तक नियुक्ति नहीं मिली, जिसके कारण उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है।

169वें दिन बिगड़ी कई अभ्यर्थियों की तबीयत

आंदोलन के 169वें दिन कई अभ्यर्थियों का स्वास्थ्य बिगड़ गया। अभ्यर्थी मृगेंद्र रजवाड़े को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि लंबे आंदोलन, मानसिक तनाव और शारीरिक कमजोरी के चलते उनकी हालत नाजुक हो गई।

तीन साल से अधूरी भर्ती प्रक्रिया

अभ्यर्थियों का कहना है कि यह आंदोलन किसी लाभ के लिए नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के लिए किया जा रहा है। उनका दावा है कि अगर समय रहते सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। अभ्यर्थी पिछले 3 साल से नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। कई अभ्यर्थियों ने आंदोलन को और उग्र करने की चेतावनी भी दी है। उनका आरोप है कि लंबे समय से भर्ती की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है।

नियुक्ति का इंतजार बरकरार

बताया जा रहा है कि सभी अभ्यर्थियों की नियुक्ति नहीं हो पा रही है, और इसी को लेकर वे लगातार आमरण अनशन पर बैठे हैं। अभ्यर्थी अलग-अलग तरीकों से अपनी मांग सामने रख रहे हैं। उनका कहना है कि अब तक शिक्षा विभाग की ओर से किसी ने भी उनसे इस मामले पर कोई बातचीत नहीं की है।

सरकार को ठहराया जिम्मेदार

अभ्यर्थियों ने यह भी कहा है कि अगर आंदोलन के दौरान किसी भी प्रकार की अनहोनी घटना घटती है, तो उसके लिए पूरी तरह सरकार जिम्मेदार होगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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