छत्तीसगढ़
एक दिन पहले
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मानसून सत्र से पहले सक्रिय हुई सरकार
छत्तीसगढ़ में राजनीतिक हलचल उस समय तेज हो गई जब राज्य सरकार ने आगामी मानसून सत्र के मद्देनजर भाजपा विधायक दल की एक विशेष बैठक बुलाई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में मंत्रिमंडल के सभी सदस्य और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने शिरकत की। सत्र के शुरू होने से पहले बुलाई गई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी सदन की कार्यवाही के लिए एक स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करना था। बैठक में पार्टी संगठन के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी भी रही, जिसमें क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय विशेष रूप से शामिल हुए।
बैठक का एजेंडा और संगठनात्मक चर्चा
बैठक संपन्न होने के बाद मिली जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सरकार के विभिन्न संगठनात्मक और राजनीतिक विषयों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक का मुख्य फोकस मानसून सत्र को लेकर सरकार की तैयारी सुनिश्चित करना था। इसके साथ ही, सभी विधायकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में और अधिक सक्रिय भूमिका निभाएं। विधायकों से कहा गया है कि सरकार द्वारा चलाई जा रही जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए, जिसके लिए उन्हें लगातार जनसंपर्क करने पर जोर देना होगा।
विपक्ष के तीखे तेवरों का सामना
मानसून सत्र को लेकर कांग्रेस के रुख पर भी भाजपा खेमे में मंथन हुआ। मंत्री गजेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि भाजपा विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। वहीं, मंत्री केदार कश्यप ने जानकारी दी कि मानसून सत्र में कुल पांच बैठकें आयोजित की जाएंगी। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि कांग्रेस इस सत्र के दौरान सरकार को घेरने के लिए अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है। रेत खनन के विवादित मामलों और नकटी गांव में हुई अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई जैसे मुद्दों को लेकर कांग्रेस आक्रामक रुख अपना सकती है। इन सभी संभावित आरोपों का जवाब देने के लिए भाजपा ने अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है।
विधानसभा सत्र का कार्यक्रम
छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू होकर 17 जुलाई तक चलेगा। विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, यह सत्र कुल 5 दिनों की अवधि का होगा, जिसमें सदन की 5 बैठकें होंगी। इन पांच दिनों के दौरान प्रश्नकाल के साथ-साथ विभिन्न वित्तीय कार्यों और महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। सरकार का प्रयास है कि इन बैठकों का उपयोग जनता से जुड़े अहम मुद्दों को सुलझाने और विधायी कार्यों को तेजी से निपटाने में किया जाए। बैठक में सरकार के मंत्रियों और विधायकों के बीच बेहतर समन्वय बनाने पर भी जोर दिया गया ताकि विधानसभा के पटल पर पार्टी एकजुट होकर विपक्ष के सवालों का सटीक और तथ्यपरक उत्तर दे सके।
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