भारत
2 घंटे पहले
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विचारों
डिजिटल युग में तकनीक और मानवीय समानता पर जोर
उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित 12वें इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन (IPU) ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ यंग पार्लियामेंटेरियन्स में भारतीय संसद का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने डिजिटल युग की चुनौतियों और संभावनाओं पर अपनी बात रखी। सम्मेलन का मुख्य विषय डिजिटल युग में डिजिटल पहुंच और अधिकार था। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत ने यह साबित कर दिया है कि बड़े स्तर पर डिजिटल विस्तार और सामाजिक समावेशन को एक साथ कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि आज देश में एक अरब से अधिक लोग डिजिटल माध्यमों से जुड़ चुके हैं और यूपीआई के जरिए होने वाले तत्काल भुगतान ने आम आदमी के जीवन को पूरी तरह से बदल दिया है।
तकनीक का असली पैमाना क्या है
सांसद राघव चड्ढा ने तकनीक की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक का स्वरूप ऐसा होना चाहिए जो लोगों को आपस में जोड़े और इसमें किसी को भी पीछे न छोड़ा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नवाचार का उद्देश्य शोषण मुक्त होना चाहिए और सुरक्षा का दायरा नियंत्रण से मुक्त होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के युग की असली परीक्षा मशीनों की बुद्धिमत्ता नहीं है, बल्कि यह देखना है कि क्या समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को, जिसके पास सबसे सस्ता फोन है, वही डिजिटल अवसर और सुरक्षा मिल रही है जो एक साधन संपन्न व्यक्ति को मिलती है।
IPU सम्मेलन में भारत की भागीदारी
आपको बता दें कि यह महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 4 से 6 सितंबर तक उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित हुआ। राघव चड्ढा को इस वैश्विक मंच पर भारतीय संसद का प्रतिनिधित्व करने के लिए नामित किया गया था। इस अवसर पर उन्होंने अपना आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने इसके लिए भारत के माननीय उपराष्ट्रपति के प्रति भी धन्यवाद ज्ञापित किया। राघव चड्ढा ने बताया कि IPU की स्थापना वर्ष 1889 में हुई थी और इसका मुख्यालय जिनेवा में स्थित है। यह दुनिया भर की राष्ट्रीय संसदों का सबसे पुराना और बड़ा संगठन है, जिसमें वर्तमान में 180 सदस्य संसद और 15 एसोसिएट सदस्य शामिल हैं।
सम्मेलन के प्रमुख मुद्दे
इस वर्ष के आईपीयू सम्मेलन की थीम अशांत समय में सभी के लिए मानवाधिकार, न्याय और गरिमा को फिर से स्थापित करना रखी गई थी। तीन दिनों तक चले इस मंथन में दुनियाभर के युवा सांसदों ने कई अहम बिंदुओं पर चर्चा की, जिनमें निम्नलिखित प्रमुख थे:
- संघर्षपूर्ण स्थितियों में युवाओं के अधिकार।
- डिजिटल अधिकार और ऑनलाइन सुरक्षा के मानक।
- जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए लचीलापन और न्याय।
- युवा पीढ़ी के लिए नए आर्थिक अवसरों का सृजन।
अपनी बात को समाप्त करते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि भारत न केवल दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है बल्कि सबसे युवा आबादी वाला राष्ट्र भी है, इसलिए इन वैश्विक मंचों पर भारत के पास साझा करने के लिए बहुत अनुभव है और सीखने के लिए भी काफी अवसर मौजूद हैं।
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