भारत
एक घंटा पहले
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विचारों
हवाई खतरों से निपटने के लिए भारत का बड़ा कदम
चीन और पाकिस्तान की सीमाओं से घिरे भारत के लिए अपना डिफेंस सिस्टम लगातार दुरुस्त रखना अत्यंत महत्वपूर्ण हो चुका है। अतीत में इन दोनों पड़ोसी देशों के साथ भारत पूर्ण स्तर का युद्ध लड़ चुका है, जबकि वर्तमान समय में भी सीमा पर तनाव और झड़पों की स्थिति बनी रहती है। ऐसे में भारतीय सेना को आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए 30,000 करोड़ रुपये की एक बड़ी रक्षा परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है।
बदलते दौर का युद्ध और मिशन सुदर्शन चक्र
हाल के वर्षों में वैश्विक सामरिक हालात में तेजी से बदलाव आया है। रूस, यूक्रेन और अमेरिका, ईरान से जुड़े संघर्षों ने दुनिया भर में युद्ध की रणनीतियों को पूरी तरह बदल दिया है। अब केवल महंगे लड़ाकू विमान और भारी-भरकम मिसाइलें ही नहीं, बल्कि ड्रोन और सटीक निशाना साधने वाले निर्देशित हथियारों का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
इन बदलती चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारत ने मिशन सुदर्शन चक्र की शुरुआत की है। इस विशेष मिशन का मुख्य उद्देश्य देश के हवाई क्षेत्र को हर प्रकार के एरियल अटैक से पूरी तरह सुरक्षित रखना है। इसके तहत स्वदेशी तकनीक के आधार पर विभिन्न प्रणालियां तैयार की जा रही हैं, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- एंटी एयरक्राफ्ट सिस्टम: दुश्मन के लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों को हवा में ही ध्वस्त करने की क्षमता।
- एंटी ड्रोन तकनीक: छोटे और घातक ड्रोन हमलों से निपटने के लिए कारगर सुरक्षा चक्र।
- एंटी मिसाइल तंत्र: दुश्मन की मिसाइलों को उनके लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट करना।
इसके अतिरिक्त, भारत अपनी बहुस्तरीय रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए रूस से अत्याधुनिक S-400 एयर डिफेंस सिस्टम भी हासिल कर रहा है।
QRSAM रक्षा प्रणाली और BEL को बड़ा ठेका
भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिल रही है। भारत में क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल यानी QRSAM एयर डिफेंस सिस्टम विकसित करने के लिए 30,000 करोड़ रुपये की योजना अब महज एक कदम की दूरी पर है। सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख रक्षा कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) को इस विशाल परियोजना का ठेका मिलने की पूरी संभावना है।
कंपनी के अनुसार, इस पूरी परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति यानी CCS की अंतिम स्वीकृति का इंतजार है। जैसे ही सरकार की तरफ से इसे हरी झंडी मिलती है, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) को इस महत्वपूर्ण रक्षा सौदे के लिए औपचारिक ऑर्डर जारी करने का रास्ता साफ हो जाएगा।
बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र से मजबूत होगी भारतीय सेना
प्रस्तावित 30,000 करोड़ रुपये का यह रक्षा अनुबंध केवल मिसाइलों की आपूर्ति तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें पूरी QRSAM वायु रक्षा प्रणाली का विकास और आपूर्ति शामिल होगी। इस अत्याधुनिक प्रणाली के तैयार होने के बाद भारतीय सेना को निम्नलिखित सुरक्षा लाभ प्राप्त होंगे:
- बहुस्तरीय रक्षा क्षमता: आकाश में एक मजबूत और बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार होगा, जिससे किसी भी प्रकार के हवाई आक्रमण को तुरंत निष्प्रभावी किया जा सकेगा।
- तेजी से जवाबी कार्रवाई: भारतीय सेना को किसी भी त्वरित हवाई खतरे का मुकाबला बेहद कम समय में करने में मदद मिलेगी।
- व्यापक सुरक्षा कवच: यह सिस्टम दुश्मन के लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, मानव रहित ड्रोन और सटीक निशाना लगाने वाले गाइडेड हथियारों से देश को सुरक्षा प्रदान करेगा।
इस प्रकार, QRSAM परियोजना की अंतिम मंजूरी मिलने के साथ ही भारत अपनी सरहदों पर एक अभेद्य सुरक्षा दीवार खड़ी करने में सफल होगा, जिससे देश का एयर डिफेंस सिस्टम पहले से कहीं अधिक मजबूत और अचूक बन जाएगा।
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