कतर में 8 करोड़ की डकैती का मास्टरमाइंड एक साल बाद पुलिस के सामने आया, वेल्डिंग के बहाने रची थी साजिश राष्ट्रीय राजनीति एक दिन पहले 11
कतर की राजधानी दोहा में केएमसीसी ऑफिस से 8 करोड़ रुपये की डकैती के मुख्य आरोपी ने केरल में आत्मसमर्पण किया है। आरोपी का दावा है कि उसे काम का झांसा देकर फंसाया गया था, जबकि पुलिस अब इस मामले में गहरी साजिश और अंदरूनी मिलीभगत की जांच कर रही है।

फिल्मी अंदाज में अंजाम दी गई डकैती

किसी थ्रिलर फिल्म की पटकथा की तरह लगने वाली एक घटना ने अब असल जिंदगी में पुलिस की नींद उड़ा दी है। कतर के दोहा स्थित केरल मुस्लिम सांस्कृतिक केंद्र यानी KMCC के कार्यालय में करीब 8 करोड़ भारतीय रुपये के बराबर 31 लाख कतरी रियाल की बड़ी डकैती हुई थी। इस हाई प्रोफाइल मामले में एक साल बाद बड़ा मोड़ आया है, जब मुख्य आरोपी परापिल बालकृष्णन ने केरल की कोयिलैंडी पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। यह मामला न केवल चोरी की रकम के चलते, बल्कि इसमें शामिल लोगों और उनकी मंशा को लेकर भी चर्चा में बना हुआ है।

घटना का घटनाक्रम और गैस कटर का इस्तेमाल

यह सनसनीखेज वारदात 18 सितंबर 2025 को अंजाम दी गई थी। साजिश इतनी गहरी थी कि इसके लिए विशेष रूप से केरल से चार लोगों को हवाई जहाज के जरिए कतर बुलाया गया था। कतर पहुंचते ही इन लोगों ने पहले कार्यालय में मौजूद रूम बॉय को बंधक बनाया और उसके बाद गैस कटर की मदद से वहां रखी मजबूत तिजोरी को काट डाला। चोरों ने बड़ी सफाई से वहां मौजूद 31 लाख कतरी रियाल उड़ा लिए। हैरानी की बात यह है कि लूटी गई यह पूरी रकम खाड़ी देशों में रह रहे केरल के प्रवासियों के कल्याण के लिए जमा की गई थी, जो अब चोरों के हाथ लग चुकी थी।

आरोपी का दावा और राजनीतिक विवाद

आत्मसमर्पण के बाद सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में परापिल बालकृष्णन ने अपनी सफाई में चौंकाने वाला दावा किया है। उसने कहा कि उसे कतर में वेल्डिंग का काम दिलाने का झांसा देकर बुलाया गया था। आरोपी के मुताबिक, उसे इस बात की कोई भनक नहीं थी कि उसका इस्तेमाल तिजोरी तोड़ने के लिए एक मोहरे के तौर पर किया जाएगा। हालांकि, इस मामले में राजनीतिक रंग भी जुड़ गया है। बालकृष्णन का जुड़ाव स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार के तौर पर रहा है। इस राजनीतिक पहचान के सामने आने के बाद स्थानीय भाजपा नेतृत्व ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच किसी केंद्रीय एजेंसी जैसे CBI या NIA से कराई जानी चाहिए।

पुलिस की जांच और संदिग्ध चुप्पी

इस पूरे मामले में एक और पहेली यह है कि डकैती के बाद भी KMCC संगठन ने तुरंत पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। घटना के एक साल बीत जाने और सार्वजनिक रूप से दबाव बढ़ने के बाद, इस साल 15 सितंबर को संगठन के कतर उपाध्यक्ष पी. के. अब्दुल रहीम ने आखिरकार पुलिस का दरवाजा खटखटाया। पुलिस अब इस बात की तह तक जाने की कोशिश कर रही है कि क्या इतने बड़े पैमाने पर हुई इस चोरी के पीछे संस्था के ही कुछ लोगों की मिलीभगत थी। वर्तमान में पुलिस मुख्य आरोपी बालकृष्णन से पूछताछ कर रही है, साथ ही उन अन्य साथियों की तलाश जारी है जो अभी भी फरार हैं। इस सूची में शाजी, असैनार और राशी पय्योली जैसे नाम शामिल हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या यह महज एक काम के बहाने बुना गया जाल था या फिर सोची-समझी डकैती का हिस्सा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप