पूर्णिया एयरपोर्ट का कायाकल्प: 294 करोड़ की लागत से बनेगा हाईटेक टर्मिनल, बढ़ेंगी सुविधाएं बिहार 2 घंटे पहले 2
पूर्णिया एयरपोर्ट पर एक अत्याधुनिक टर्मिनल बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिससे सीमांचल और आसपास के लाखों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। 294 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली इस परियोजना में 16 चेक-इन काउंटर और 3 एयरोब्रिज समेत कई नई सुविधाएं शामिल होंगी।

पूर्णिया एयरपोर्ट की बदलती तस्वीर

बिहार के पूर्णिया में स्थित एयरपोर्ट अब एक नए और महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रहा है। 15 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस पोर्टा केबिन आधारित एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था, वह अब बहुत जल्द एक पूर्ण विकसित हाईटेक टर्मिनल में तब्दील होने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने टेंडर प्रक्रिया का औपचारिक शुभारंभ कर दिया है। 294 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से तैयार होने वाला यह नया टर्मिनल न केवल पूर्णिया बल्कि पूरे सीमांचल, कोशी और आसपास के पड़ोसी क्षेत्रों के लिए एक गेम चेंजर साबित होगा।

टर्मिनल का विस्तार और आधुनिक सुविधाएं

एयरपोर्ट के डायरेक्टर दीप प्रकाश गुप्ता के अनुसार, नया प्रस्तावित टर्मिनल भवन कुल 20,250 वर्गमीटर के विशाल क्षेत्र में फैला होगा। यह आधुनिक इमारत दो मंजिला होगी, जिसे यात्रियों की सुविधा के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार डिजाइन किया जा रहा है। इस टर्मिनल की मुख्य विशेषताओं में 3 अत्याधुनिक एयरोब्रिज और 16 नए चेक-इन काउंटर शामिल होंगे। निर्माण कार्य की योजना के अनुसार, टर्मिनल के ऊपरी हिस्से से डिपार्चर की सुविधा उपलब्ध होगी। इसके अलावा, यात्रियों की सुविधा के लिए एक उन्नत पार्किंग जोन भी विकसित किया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में यात्रियों की बढ़ती संख्या को बेहतर तरीके से संभाला जा सके। पूरी उम्मीद है कि यह टर्मिनल डेढ़ साल के भीतर बनकर तैयार हो जाएगा, जिससे क्षेत्र में हवाई यात्रा का अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा।

रनवे और परिचालन क्षमता में वृद्धि

पूर्णिया एयरपोर्ट की सबसे बड़ी ताकत इसका 9,000 फुट लंबा रनवे है, जो उत्तर-पूर्वी भारत के सबसे लंबे रनवे में से एक माना जाता है। एयरपोर्ट पर एक नया एप्रन भी तैयार किया जा रहा है, जो परिचालन दक्षता को काफी बढ़ा देगा। वर्तमान में, एक विमान को उड़ान भरने के लिए लगभग 60 मिनट का समय लग जाता है, लेकिन नया एप्रन बनने के बाद यह समय घटकर मात्र 20 से 25 मिनट रह जाएगा। इस बदलाव से एक साथ पांच विमान उड़ान भरने के लिए तैयार हो सकेंगे, जिससे हवाई यातायात का दबाव कम होगा और विमानों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकेगी।

कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास की नई राह

वर्तमान में पूर्णिया एयरपोर्ट से दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद और अहमदाबाद के लिए पांच नियमित उड़ानें संचालित हो रही हैं, और खुशी की बात यह है कि इन सभी उड़ानों में सीटों की मांग लगातार बनी रहती है। नए टर्मिनल के निर्माण के साथ ही मुंबई, बेंगलुरु और गुवाहाटी जैसे बड़े शहरों के लिए भी हवाई सेवा शुरू करने की तैयारी है। इसके अतिरिक्त, यात्रियों की सुरक्षा और सुगम संचालन के लिए एयरपोर्ट पर अपना पुलिस थाना भी स्थापित किया जाएगा। जानकारों का मानना है कि इस एयरपोर्ट का विस्तार भविष्य में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए भी द्वार खोल सकता है।

स्थानीय व्यापार और कार्गो सेवाओं को बल

पूर्णिया एयरपोर्ट सिर्फ यात्रियों के आने-जाने का माध्यम नहीं बनेगा, बल्कि यह इस पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था के लिए भी संजीवनी का काम करेगा। यहां रहने वाले लोगों और उद्योग जगत से जुड़े व्यक्तियों का मानना है कि इस टर्मिनल के बनने से कार्गो सेवाओं का रास्ता साफ होगा। पूर्णिया का मक्का और मखाना उत्पादन पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से स्थानीय उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। छात्रों, मरीजों और व्यापारियों के लिए यह एयरपोर्ट पहले से ही वरदान साबित हो रहा है, क्योंकि अब उन्हें पटना या बागडोगरा जैसे दूरस्थ हवाई अड्डों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास की दृष्टि से भी पूर्णिया के लिए यह एक स्वर्णिम युग की शुरुआत है। आने वाले दिनों में यह एयरपोर्ट सीमांचल के साथ-साथ नेपाल और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों के करोड़ों लोगों की हवाई यात्रा की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगा।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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