श्री अकाल तख्त ने भगवंत मान को बताया 'गुरु दोषी' और 'पंथ विरोधी', मुख्यमंत्री ने दी ये सफाई पंजाब एक महीने पहले 22
विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को गुरु दोषी और पंथ विरोधी करार दिया है, जबकि मुख्यमंत्री ने इसे सियासी साजिश और नाइंसाफी बताया है।

पंजाब में विधानसभा चुनाव से कुछ ही महीने पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। सिख समुदाय की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था श्री अकाल तख्त ने उन्हें गुरु दोषी और पंथ विरोधी घोषित कर दिया है। संस्था ने मान को गुरु ग्रंथ साहिब और श्री गुरु साहिबान की बेअदबी का दोषी मानते हुए यह सजा सुनाई और सिख संगत से अपील की कि वह उनसे किसी तरह का संबंध न रखे। आइए समझते हैं कि यह पूरा विवाद आखिर है क्या और इस पर मुख्यमंत्री की क्या प्रतिक्रिया रही।

पूरा विवाद किस बात का है

दरअसल कुछ महीने पहले एक वीडियो सामने आया था, जिसमें भगवंत मान जैसा दिखने वाला एक व्यक्ति श्री गुरु साहिबान की बेअदबी करता नजर आया था। इसके बाद अकाल तख्त ने मान को तलब किया। मुख्यमंत्री इसी साल 15 जनवरी को अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए, जहां जत्थेदारों ने उनसे इस वीडियो को लेकर सवाल किए। मान ने जवाब में कहा कि यह वीडियो AI-जेनरेटेड है। इस पर उनसे पूछा गया कि इसकी जांच किस लैब से कराई जाए, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया। आखिरकार अकाल तख्त ने खुद ही दो अलग-अलग सेंट्रल फोरेंसिक लैब्स से इस वीडियो की जांच कराई। जांच में वीडियो को असली पाया गया, जिसके बाद भगवंत मान को गुरु दोषी और सिख पंथ का विरोधी घोषित कर दिया गया।

भगवंत मान का जवाब

आम आदमी पार्टी श्री अकाल तख्त के इस फैसले को मुख्यमंत्री के खिलाफ रची गई साजिश बता रही है। अरविंद केजरीवाल का कहना है कि भगवंत मान मुख्यमंत्री के रूप में बेहतरीन काम कर रहे हैं और इसी वजह से उन्हें फंसाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने भी इस फैसले को नाइंसाफी बताते हुए खुद को बेकसूर बताया। उन्होंने दोहराया कि जिस वीडियो को उनका बताया जा रहा है, वह डॉक्टर्ड है और उससे छेड़छाड़ की गई है। मान ने कहा कि वह गुरु ग्रंथ साहिब और गुरु साहिबान की बेअदबी के बारे में सोच भी नहीं सकते। उनका कहना है कि बतौर मुख्यमंत्री वह पंजाब की जनता की भलाई के लिए अच्छे फैसले ले रहे हैं और इसी कारण उन्हें साजिश के तहत बदनाम किया जा रहा है। मान ने श्री अकाल तख्त के इस हुक्म को सियासी फैसला करार देते हुए कहा कि यह संस्था पहले भी राजनीतिक फैसले लेती रही है, क्योंकि इसमें अकाली दल जैसे संगठनों की दखलंदाजी रहती है।

SGPC की मुख्यमंत्री को चेतावनी

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने भगवंत मान को श्री अकाल तख्त से न उलझने की सलाह दी है। SGPC के सदस्य गुरुचरण सिंह ग्रेवाल ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल हों, सुरजीत सिंह बरनाला हों, पूर्व गृह मंत्री बूटा सिंह हों या फिर पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर बादल, सभी ने श्री अकाल तख्त के सामने सिर झुकाया और उसके फैसले को माथे से लगाया। उनका कहना है कि भगवंत मान भी यदि ऐसा ही करें तो यह उनके लिए बेहतर रहेगा।

धर्म और सियासत का सवाल

आज के दौर में यह साबित करना बेहद कठिन है कि कोई वीडियो असली है या नकली। साथ ही यह बात भी सहज नहीं लगती कि कोई मुख्यमंत्री गुरु ग्रंथ साहिब और साहिबान की बेअदबी करेगा। भगवंत मान में चाहे जितनी भी कमियां हों, इतना तो वह भी समझते हैं कि पंजाब के मुख्यमंत्री रहते हुए गुरु ग्रंथ साहिब का अपमान करना कितना बड़ा पाप होगा और यह मामला कितना बड़ा मुद्दा बन सकता है। इस तरह के मामलों का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। यह मामला धर्म से जुड़ा है और धर्म का इस्तेमाल राजनीति के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप