पुणे में प्रतिशोध की खौफनाक वारदात: 23 साल पहले पिता की हत्या का बदला लेने के लिए युवक ने रची खूनी साजिश, पुलिस भी हैरान महाराष्ट्र एक महीने पहले 51
पुणे ग्रामीण पुलिस ने एक ऐसे सनसनीखेज हत्याकांड का पर्दाफाश किया है, जिसमें एक युवक ने महज छह महीने की उम्र में अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए 23 साल बाद वारदात को अंजाम दिया।

महाराष्ट्र के पुणे जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली और हैरान करने वाली आपराधिक घटना सामने आई है, जिसने पुलिस प्रशासन को भी हैरत में डाल दिया है। कानून और व्यवस्था के इतिहास में ऐसे मामले बहुत कम ही देखने को मिलते हैं, जहां बदले की आग दो दशकों से भी अधिक समय तक सुलगती रही हो। पुणे ग्रामीण पुलिस ने एक 24 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है, जिसने अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए बेहद सुनियोजित तरीके से एक व्यक्ति की हत्या कर दी। चौंकाने वाली बात यह है कि जब आरोपी के पिता की हत्या की गई थी, तब वह महज 6 महीने का नवजात शिशु था। अपने पिता को न देख पाने का दर्द और उनकी मौत का बदला लेने की जिद इस कदर हावी थी कि 23 साल बाद उसने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया।

कात्रज सुरंग के पास मिला था क्षत-विक्षत शव

इस सनसनीखेज वारदात की शुरुआत 11 जुलाई को हुई, जब पुणे जिले की भोर तहसील के अंतर्गत आने वाले पुराने कात्रज सुरंग के समीप एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद हुआ। मृतक की पहचान 40 वर्षीय संजय बाबूराव काडू-देशमुख के रूप में हुई। पुलिस को जब शव मिला, तो उस पर धारदार हथियारों से बेरहमी से किए गए कई वार के निशान थे। शव की हालत देखकर ही साफ हो गया था कि यह आपसी रंजिश या बेहद क्रूरता से की गई हत्या का मामला है। इस घटना के तुरंत बाद स्थानीय राजगढ़ पुलिस थाने में हत्या का मामला दर्ज कर जांच की कमान संभाली गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुणे ग्रामीण पुलिस की स्थानीय अपराध शाखा (एलसीबी) को भी जांच में लगाया गया।

तकनीकी सुरागों से खुला हत्या का राज

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मार्गदर्शन में पुलिस टीम ने मामले की कड़ियां जोड़ना शुरू किया। स्थानीय अपराध शाखा ने घटनास्थल के आसपास के तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल फोन रिकॉर्ड और गुप्त सूचनाओं के आधार पर तफ्तीश आगे बढ़ाई। इस वैज्ञानिक और जमीनी जांच के दौरान पुलिस के हाथ कुछ अहम सुराग लगे, जिसके बाद 24 साल के मंथन वैद्य और उसके दोस्त सौरभ परदेशी को मुख्य संदिग्ध के रूप में चिह्नित किया गया। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए 14 जुलाई को इन दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया।

पूछताछ में कबूला अपना गुनाह

हिरासत में लिए जाने के बाद पुलिस ने जब दोनों आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक प्रमोद क्षीरसागर ने बताया कि मंथन वैद्य और सौरभ परदेशी ने स्वीकार किया कि उन्होंने अकेले इस वारदात को अंजाम नहीं दिया, बल्कि इसमें उनके दो अन्य साथी भी शामिल थे। इन सहयोगियों की पहचान मिजान शेख और संदीप कोरी के रूप में हुई है। इन चारों ने मिलकर संजय बाबूराव काडू-देशमुख को ठिकाने लगाने की पूरी साजिश रची थी और मौका पाकर उन पर जानलेवा हमला कर दिया।

साल 2003 की रंजिश और बदले की कहानी

पुलिस की गहन जांच में इस हत्याकांड के पीछे की जो कहानी निकलकर सामने आई, वह किसी फिल्मी पटकथा जैसी लगती है। पुलिस ने बताया कि इस खूनी संघर्ष के तार आज से करीब 23 साल पहले यानी साल 2003 में हुई एक घटना से जुड़े हैं। उस समय संजय बाबूराव काडू-देशमुख और मंथन वैद्य के पिता दिनेश वैद्य के बीच किसी मामूली बात को लेकर विवाद हो गया था। यह विवाद इस हद तक बढ़ गया कि संजय काडू-देशमुख ने दिनेश वैद्य की हत्या कर दी।

सहायक उप-निरीक्षक चेतन माचले के अनुसार, जब दिनेश वैद्य की हत्या हुई, तब उनका बेटा मंथन वैद्य केवल 6 महीने का था। जैसे-जैसे मंथन बड़ा हुआ, उसे अपने पिता की हत्या के बारे में पता चला। बचपन से ही उसके मन में अपने पिता के हत्यारे के प्रति नफरत और बदले की भावना पनपने लगी। वह सालों से अपने पिता की मौत का बदला लेने का मौका तलाश रहा था। आखिरकार, जब वह 24 साल का हुआ, तो उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर संजय काडू-देशमुख को खत्म करने का पूरा खाका तैयार किया।

जमानत पर बाहर था मृतक, पुलिस की कार्रवाई जारी

पुलिस जांच के दौरान यह भी पता चला कि मृतक संजय काडू-देशमुख खुद एक अन्य आपराधिक मामले में संलिप्त था और हाल ही में जमानत पर जेल से बाहर आया था। मंथन और उसके साथियों को जैसे ही इसकी भनक लगी, उन्होंने इस मौके का फायदा उठाया और उसकी हत्या कर दी। फिलहाल, राजगढ़ पुलिस ने मंथन वैद्य और उसके साथियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जगह-जगह छापेमारी कर रही है और पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच कर रही है ताकि अदालत में आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश किए जा सकें।

सान्वी राणा पाबना के क्राइम एवं राज्य रिपोर्टर हैं, जो अपराध और विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें कवर करते हैं। कानून-व्यवस्था, जांच और बड़ी आपराधिक घटनाओं की वे जिम्मेदार रिपोर्टिंग करते हैं। तथ्यों की पुष्टि और संवेदनशीलता उनके काम की पहचान हैं।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप