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2 घंटे पहले
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प्रॉपर्टी ट्रांसफर के नियमों में नई राहत
प्रॉपर्टी ट्रांसफर के जटिल नियमों से परेशान लोगों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। नोएडा अथॉरिटी ने संपत्ति हस्तांतरण से जुड़े अपने नियमों में एक बड़ा संशोधन किया है। अथॉरिटी ने अपनी यूनिफाइड स्कीम का दायरा बढ़ाते हुए इसमें ससुर और बहू के रिश्ते को भी ब्लड रिलेशन यानी रक्त संबंध के दायरे में शामिल कर लिया है। इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद अब ससुर अपनी बहू को या फिर बहू अपने ससुर को संपत्ति ट्रांसफर करती है, तो उन्हें भारी-भरकम शुल्क का भुगतान नहीं करना पड़ेगा।
योगी सरकार की पहल और नोएडा अथॉरिटी का निर्णय
संपत्ति का हस्तांतरण लंबे समय से चर्चा और विवादों का विषय बना रहा है। इस साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा नीतिगत फैसला लेते हुए स्पष्ट किया था कि परिवार में रक्त संबंधों के बीच संपत्ति ट्रांसफर पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूला जाएगा। योगी सरकार की इस योजना के तहत ऐसे मामलों में नाममात्र का 5 हजार रुपये का प्रोसेसिंग शुल्क तय किया गया था। इसी दिशा में आगे कदम बढ़ाते हुए नोएडा विकास प्राधिकरण ने अपनी यूनिफाइड पॉलिसी में बदलाव किया है। अब इन विशेष पारिवारिक रिश्तों के बीच प्रॉपर्टी ट्रांसफर पूरी तरह से सरल हो गया है। पहले की व्यवस्था में ट्रांसफर चार्ज, भारी रजिस्ट्रेशन फीस और स्टांप ड्यूटी के कारण लोगों पर वित्तीय बोझ बढ़ जाता था, जिसे अब काफी हद तक कम कर दिया गया है।
क्या है नया प्रावधान और कैसे होगा फायदा
नोएडा अथॉरिटी के नए नियमों के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति अपनी बहू के नाम करना चाहता है या कोई बहू अपनी संपत्ति अपने ससुर को देना चाहती है, तो अथॉरिटी अब इसके लिए कोई ट्रांसफर शुल्क नहीं लेगी। इस तरह के मामलों में केवल 5 हजार रुपये की प्रोसेसिंग फीस ली जाएगी। यह बदलाव उन परिवारों के लिए बड़ी राहत है जो पहले रजिस्ट्रेशन चार्ज और स्टांप ड्यूटी के भारी भरकम बोझ तले दबे थे। अब केवल प्रोसेसिंग फीस के माध्यम से ही कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।
ब्लड रिलेशन में कौन-कौन से रिश्ते शामिल
नोएडा अथॉरिटी की यूनिफाइड पॉलिसी में परिवार के कई सदस्यों को ब्लड रिलेशन माना गया है। इस सूची में पति-पत्नी, पिता-पुत्र, पिता-पुत्री, माता-पुत्र, माता-पुत्री, भाई-भाई, बहन-बहन और भाई-बहन के रिश्ते शामिल हैं। समय के साथ अथॉरिटी ने अपनी नीति का विस्तार करते हुए इसमें दादा-दादी और नाना-नानी को भी जोड़ा था। अब ससुर और बहू को शामिल किए जाने के बाद इस दायरे में एक और महत्वपूर्ण रिश्ता जुड़ गया है। अब ये सभी सदस्य आपस में संपत्ति का लेन-देन बिना किसी भारी शुल्क के कर सकते हैं।
उदाहरण से समझें बचत का गणित
इस नई नीति का लाभ कितना बड़ा है, इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए कि नोएडा में किसी व्यक्ति के पास 1 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी है और वह उसे अपने बेटे या किसी नजदीकी ब्लड रिलेशन सदस्य को ट्रांसफर करता है। पुरानी व्यवस्था के तहत उस पर 10 फीसदी तक का ट्रांसफर शुल्क लग जाता था, जिससे केवल शुल्क के रूप में ही 10 लाख रुपये का खर्च आता था। यूनिफाइड स्कीम ने इस भारी शुल्क को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है। अब इस ट्रांसफर के लिए केवल 5 हजार रुपये का प्रोसेसिंग शुल्क देना होगा। हालांकि, सरकार द्वारा निर्धारित स्टांप ड्यूटी की प्रक्रिया लागू रहेगी, लेकिन यह राशि पहले की तुलना में बहुत कम होगी, जिससे संपत्ति मालिकों को बड़ी आर्थिक बचत होगी।
एक समान नीति का क्रियान्वयन
पूर्व में नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना विकास प्राधिकरणों में प्रॉपर्टी ट्रांसफर को लेकर अलग-अलग नियम और शुल्क लागू थे। लेकिन अब यूनिफाइड स्कीम के अंतर्गत इन तीनों ही अथॉरिटीज में एक समान शुल्क नीति का पालन किया जा रहा है, जिससे आम लोगों को बहुत सहूलियत हुई है।
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