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एक घंटा पहले
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सऊदी रिफाइनरी पर हमले से बिगड़ा ग्लोबल मार्केट का समीकरण
दुनिया भर के बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी का दौर शुरू हो गया है। हाल ही में हुई एक सैन्य घटना ने तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने 28 अक्टूबर की रात सऊदी अरब की एक बड़ी तेल रिफाइनरी को निशाना बनाकर हवाई हमला किया है। सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश माना जाता है, इसलिए इस हमले की खबर फैलते ही वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर मंडराने वाले खतरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई की कीमतों में उछाल
इस हमले का असर तुरंत अंतरराष्ट्रीय बाजार में देखने को मिला है। 28 अक्टूबर की सुबह के कारोबार में कच्चे तेल की कीमतों में काफी तेजी दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार स्थिति इस प्रकार है:
- ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव 1.48 डॉलर की बढ़त के साथ 115.36 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है।
- अमेरिकी बास्केट का तेल, जिसे WTI के नाम से जाना जाता है, उसमें भी 1.22 डॉलर का इजाफा हुआ और यह 101.12 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया है।
यह उछाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ठीक एक दिन पहले यानी 27 अक्टूबर को तेल के भाव में करीब 2 डॉलर की गिरावट देखी गई थी, लेकिन हमले की सूचना ने उस राहत को तुरंत खत्म कर दिया है।
आपूर्ति पर मंडराया संकट
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, हूती विद्रोहियों द्वारा निशाना बनाई गई रिफाइनरी की उत्पादन क्षमता करीब 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन है। हालांकि सऊदी अरब के अधिकारियों की ओर से अभी तक इस हमले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन रिफाइनरी पर हुए इस हमले के कारण तेल की वैश्विक उपलब्धता पर सवाल खड़े हो गए हैं। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से न केवल सऊदी अरब की सप्लाई बाधित होने का डर है, बल्कि अन्य देशों को भी तेल की आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस अनिश्चितता की वजह से कच्चे तेल की मांग में अचानक तेजी आई है, जिसने कीमतों को फिर से ऊपर की ओर धकेल दिया है। आने वाले समय में बाजार की नजर इस बात पर होगी कि सऊदी अरब की ओर से इस मामले में क्या आधिकारिक बयान आता है और उत्पादन पर इसका कितना बड़ा प्रभाव पड़ता है।
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