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एक घंटा पहले
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मुजफ्फराबाद/रावलकोट: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सरकार के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन रुकने के बजाय और भड़कता जा रहा है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि कई लोगों की जान जाने और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने के बाद भी प्रदर्शन कमजोर नहीं पड़ा है। उल्टे हजारों लोग सड़कों पर निकल आए हैं और रावलकोट की दिशा में मार्च कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि क्षेत्र के कई शहरों और कस्बों में जोरदार प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां लोग आजादी के समर्थन में नारेबाजी कर रहे हैं।
'ये जो दहशतगर्दी है, इसके पीछे वर्दी है' की गूंज
प्रदर्शनों के बीच एक नारा बार-बार सुनाई दे रहा है, 'ये जो दहशतगर्दी है, इसके पीछे वर्दी है।' यह नारा पहले बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में लगता था, पर अब PoK की सड़कों पर भी गूंज रहा है। हजारों प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए आंदोलनकारी नेता सरदार अमन खान ने आरोप लगाया कि अस्पताल, रोजगार, रोटी और बुनियादी हक मांगने वाली निहत्थी जनता को पाकिस्तानी सेना और इस्लामाबाद की सरकार 'आतंकवादी' करार दे रही है।
सरदार अमन खान ने कहा, 'बलूचिस्तान के लोगों से पूछिए कि आतंकवादी कौन हैं, तो वे सेना की ओर इशारा करेंगे। खैबर पख्तूनख्वा के लोग भी यही जवाब देंगे। सिंध और पंजाब में भी ऐसी ही आवाजें उठ रही हैं और आज PoK के लोग भी खुलकर कह रहे हैं कि असली डर और दहशत उन्हीं से है जो वर्दी में हैं।'
कई शहरों तक फैला आंदोलन
रिपोर्टों के अनुसार रावलकोट, बाग, हट्टियां बाला, कोटली, मीरपुर, सुधनोती, धीरकोट, डडयाल और मुजफ्फराबाद समेत अनेक इलाकों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। आंदोलन से जुड़े लोगों का दावा है कि अलग-अलग मार्च और धरना-प्रदर्शनों में 1.5 लाख से अधिक लोग शामिल हैं। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारी लकड़ी की लाठियां और बैनर थामे कश्मीर की आजादी के समर्थन में नारे लगाते दिखे। उनका कहना है कि यह बीते वर्षों का सबसे बड़ा सरकार विरोधी आंदोलन बनता जा रहा है।
रावलकोट में जुटान, आगे की रणनीति पर मंथन
आयोजकों के मुताबिक PoK के अलग-अलग हिस्सों से निकले बड़े काफिले मंगलवार रात तक रावलकोट पहुंच सकते हैं और यह क्षेत्र में हाल के वर्षों का सबसे बड़ा सरकार विरोधी जमावड़ा साबित होगा। उनका कहना है कि रावलकोट में एकत्र होने के बाद प्रदर्शनकारी मुजफ्फराबाद की ओर संयुक्त मार्च निकालेंगे। वहां भारी संख्या में लोगों के जुटने के बाद प्रशासन के सामने 38 मांगें रखी जाएंगी और उन्हें मनवाने का दबाव बनाया जाएगा।
गोलीबारी में घायल कई लोगों की हालत गंभीर
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि एक दिन पहले पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स की गोलीबारी में कई नागरिकों की मौत हुई थी, जिसके बाद इलाके में गुस्सा और भड़क गया है। रिपोर्टों के अनुसार कई दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल होकर अस्पतालों में भर्ती हैं और इनमें से कई की हालत नाजुक बनी हुई है। आंदोलनकारी इसे मानवीय संकट में बदलता मामला बता रहे हैं।
चार नेताओं पर 1 करोड़ का इनाम और देशद्रोह के मुकदमे
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर बातचीत करने के बजाय प्रशासन ने सख्ती और बढ़ा दी है। अधिकारियों ने चार प्रमुख आंदोलनकारी नेताओं पर 1 करोड़ पाकिस्तानी रुपये का इनाम घोषित किया है और उनके खिलाफ देशद्रोह के मामले दर्ज किए हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने आंदोलन से जुड़े कुछ नेताओं को 'भारतीय एजेंट' तक बताया है। हालांकि प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि पाकिस्तान में राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और सेना की आलोचना करने वालों पर पहले भी इसी तरह के आरोप लगते रहे हैं।
रास्ते बंद, पेड़ काटकर रोकी गई आवाजाही
प्रदर्शनकारियों को मुजफ्फराबाद तक पहुंचने से रोकने के लिए प्रशासन ने कई अहम सड़कों को बंद कर दिया है। आरोप है कि कई जगहों पर पेड़ काटकर राजमार्गों और मुख्य मार्गों पर गिरा दिए गए हैं ताकि प्रदर्शनकारी काफिलों की आवाजाही थमाई जा सके। विश्लेषकों का मानना है कि मौतों, घायलों, गिरफ्तारियों और धमकियों के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में लोगों का सड़कों पर उतरना क्षेत्र में बढ़ते जन असंतोष की तस्वीर पेश करता है।
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