राष्ट्रीय राजनीति
3 घंटे पहले
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बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी भरा स्वागत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए पहुंच गए हैं। मानस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरते ही उनका भव्य स्वागत किया गया। किर्गिस्तान सरकार की ओर से कैबिनेट ऑफ मिनिस्टर्स के चेयरमैन आदिलबेक कासिमालिएव ने प्रधानमंत्री की अगवानी की। बिश्केक आगमन के दौरान स्थानीय भारतीय समुदाय के लोगों ने भी गर्मजोशी के साथ प्रधानमंत्री का अभिवादन किया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो चर्चा का विषय बने हुए हैं।
SCO मंच और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भारत का रुख
वर्ष 2017 से भारत SCO का एक सक्रिय और महत्वपूर्ण सदस्य देश है। अपनी इस यात्रा से पहले प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया था कि भारत इस मंच का उपयोग सुरक्षा, कनेक्टिविटी और विकास के अवसरों पर आधारित क्षेत्रीय सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने के लिए करेगा। आतंकवाद, चरमपंथ और अलगाववाद को क्षेत्र की शांति के लिए सबसे बड़ी बाधा बताते हुए, भारत इन मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह शिखर सम्मेलन इस बात का प्रमाण है कि भारत मध्य एशियाई देशों के साथ अपने सभ्यतागत संबंधों और रणनीतिक साझेदारी को किस प्राथमिकता के साथ देख रहा है।
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अहम बैठक
इस दौरे का सबसे चर्चित पहलू प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच होने वाली प्रस्तावित बैठक है। दोनों नेताओं की यह मुलाकात 31 अगस्त को SCO समिट के इतर होगी। विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने जानकारी दी है कि इस बैठक का मुख्य केंद्र भारत-रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी का व्यापक विस्तार होगा। दोनों नेता व्यापार, ऊर्जा, उर्वरक, रक्षा और क्षेत्रीय चुनौतियों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा करेंगे। ज्ञात हो कि दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन को कम करने और आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पिछली बार दिसंबर 2025 में नई दिल्ली में मिले दोनों नेताओं के बीच, हाल ही में 24 अगस्त को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मॉस्को में राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात कर प्रधानमंत्री का निजी संदेश भी साझा किया था, जिससे इस बैठक की अहमियत और बढ़ गई है।
किर्गिस्तान के साथ आर्थिक संबंधों का विस्तार
प्रधानमंत्री की इस यात्रा के माध्यम से भारत और किर्गिस्तान के बीच द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्तों को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। किर्गिस्तान के निवेश मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया है कि प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति से दोनों देशों के बीच व्यापारिक निवेश के नए रास्ते खुलेंगे। किर्गिस्तान की योजना भारत की कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी, एग्रो-इंडस्ट्री, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन के क्षेत्रों में आमंत्रित करने की है। पिछले आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार का आंकड़ा लगभग 91 मिलियन डॉलर तक दर्ज किया गया था, जिसे अब और आगे बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।
मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी की बिश्केक यात्रा केवल SCO समिट तक सीमित नहीं है। यह मध्य एशिया के पूरे क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका और रणनीतिक मौजूदगी को दर्शाती है। किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सादिर जापारोव के साथ होने वाली मुलाकात और छठे वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लेना यह स्पष्ट करता है कि भारत क्षेत्रीय विकास में अपनी भागीदारी को गहरा कर रहा है। सुरक्षा और कनेक्टिविटी के साथ-साथ यह दौरा साझा भविष्य के निर्माण का एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।
BRICS की ओर बढ़ते कदम
बिश्केक में होने वाली बैठकों का सिलसिला थमेगा नहीं। SCO समिट के बाद प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच अगली संभावित मुलाकात 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती है। इस प्रकार, बिश्केक की यह यात्रा क्षेत्रीय सुरक्षा से लेकर वैश्विक आर्थिक सहयोग तक, कई मोर्चों पर भारत के लिए निर्णायक साबित होने वाली है। आने वाले महीनों में भारत की विदेश नीति की दिशा तय करने में बिश्केक में होने वाले इन मंथन का बड़ा असर दिखाई देगा।
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