रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच एस जयशंकर का कीव दौरा, भारत की कूटनीति में आया नया मोड़ भारत 2 घंटे पहले 6
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा युद्ध खत्म करने की अपील के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर यूक्रेन पहुंचे हैं। यह किसी भारतीय विदेश मंत्री का यूक्रेन का पहला आधिकारिक द्विपक्षीय दौरा है, जिससे वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

वैश्विक राजनीति में भारत की सक्रिय भूमिका

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने SCO समिट के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मौजूदा समय युद्ध का नहीं है और शांति के लिए कूटनीतिक रास्ते खोजने की सख्त जरूरत है। वहीं दूसरी ओर, भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर अचानक यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंच गए हैं, जिसने पूरे विश्व का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

युद्ध का समाधान बातचीत में है

कीव में मीडिया को संबोधित करते हुए डॉ एस जयशंकर ने युद्ध पर भारत का रुख फिर से साफ किया। उन्होंने कहा कि यह युद्ध दुर्भाग्यवश अब अपने पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की यह पुरानी मान्यता है कि युद्ध का समाधान कभी भी युद्ध के मैदान से नहीं निकल सकता है।

भारत हर संभव सहायता के लिए तत्पर

अपनी यात्रा के दौरान विदेश मंत्री ने बताया कि मात्र दो दिन पहले बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी ने फिर दोहराया था कि अब अंतहीन संघर्ष को विराम देने का समय आ गया है। संघर्ष का हर एक दिन केवल विनाश और मौतों की संख्या को बढ़ा रहा है। एस जयशंकर ने स्पष्ट किया कि हालांकि समाधान तक पहुंचने की जिम्मेदारी संबंधित पक्षों की है, लेकिन भारत शांति वार्ता में अपना हर संभव योगदान देने के लिए पूरी तरह तैयार है। कीव में हुई उच्च-स्तरीय बातचीत का मुख्य आधार भी यही रहा है।

ऐतिहासिक दौरा और यूक्रेन का स्वागत

यूक्रेन के विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विशेष पोस्ट के जरिए इस दौरे की जानकारी दी। उन्होंने डॉ एस जयशंकर का कीव में स्वागत करते हुए इसे बेहद गौरवपूर्ण क्षण बताया। यह ऐतिहासिक इसलिए है क्योंकि यूक्रेन की आजादी के बाद यह किसी भी भारतीय विदेश मंत्री का पहला आधिकारिक द्विपक्षीय दौरा है।

द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी मजबूती

विदेश मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जयशंकर इस यात्रा के दौरान अपने यूक्रेनी समकक्ष आंद्री सिबिहा और पोलैंड के उप-प्रधानमंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की के साथ व्यापक चर्चा कर रहे हैं। इस यात्रा का प्राथमिक उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा और मजबूती देना है। साथ ही, यह दौरा दोनों देशों को क्षेत्रीय परिस्थितियों और साझा हितों के मुद्दों पर खुलकर राय रखने का एक बेहतरीन मंच प्रदान कर रहा है।

नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा

यह महत्वपूर्ण यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब ब्लैक सी में रूस और यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव के कारण भारतीय नाविकों की जान गई है और कुछ अन्य घायल हुए हैं। नई दिल्ली ने इस घटना पर चिंता जताते हुए नाविकों की सुरक्षा की मांग की है। भारत लगातार संवाद और कूटनीति के माध्यम से इस युद्ध को समाप्त करने की अपनी अपील दोहरा रहा है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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