राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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विचारों
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। 10 जून को उन्होंने लगातार सबसे लंबे समय तक चुने हुए प्रधानमंत्री बने रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए 4,399 दिन पूरे किए। इस अवसर पर केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में उनके सम्मान में एक विशेष प्रस्ताव पारित किया गया और मंत्रियों ने खड़े होकर तालियां बजाते हुए उन्हें स्टैंडिंग ओवेशन दिया।
बीजेपी और एनडीए के नेताओं ने इसे नए भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि करार दिया। दिनभर राजनीतिक हलकों में इस रिकॉर्ड को लेकर चर्चा होती रही और सोशल मीडिया पर भी प्रधानमंत्री मोदी से जुड़े विषय लगातार ट्रेंड करते रहे।
सादगी भरी प्रतिक्रिया और संस्कृत श्लोक
इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री ने बेहद सरल अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक संस्कृत श्लोक साझा करते हुए लिखा कि जनसेवा ही सुशासन की सबसे बड़ी परीक्षा है। उन्होंने जोड़ा कि विनम्रता, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा ही जनता का विश्वास जीतने का असली मार्ग है।
उन्होंने जो श्लोक साझा किया, उसका भाव यह था कि जो शासक सदैव जनता के हित में काम करता है और विनम्र बना रहता है, वही सबसे बड़ी सफलता प्राप्त करता है। बीजेपी नेताओं ने उनके इस संदेश को 'सेवा और समर्पण की राजनीति' का प्रतीक बताया।
कैबिनेट बैठक में उत्साह का माहौल
सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट बैठक का माहौल खासा उत्साहपूर्ण रहा। जैसे ही प्रधानमंत्री बैठक में पहुंचे, मंत्रियों ने मेज थपथपाकर उनका स्वागत किया। इसके बाद एक प्रस्ताव लाया गया, जिसमें उनके नेतृत्व, 12 वर्षों की सरकार और देश के विकास में उनके योगदान की सराहना की गई।
प्रस्ताव पारित होते ही सभी मंत्री खड़े होकर तालियां बजाने लगे। कई मंत्रियों ने इसे भारतीय लोकतंत्र का ऐतिहासिक क्षण बताया। बीजेपी नेताओं का कहना है कि यह उपलब्धि महज एक राजनीतिक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि देश की जनता के भरोसे का प्रतीक है।
तीन बार पूर्ण बहुमत की सरकार
प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद 2019 और फिर 2024 में उन्होंने लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल की। इस तरह वे लगातार तीन बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने वाले देश के चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी लोकप्रियता, मजबूत संगठन और कल्याणकारी योजनाएं इस लगातार सफलता की बड़ी वजह रही हैं। बीते 12 सालों में बीजेपी ने कई राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत की और राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन गई।
नेताओं की प्रतिक्रियाएं
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस रिकॉर्ड को स्वतंत्र भारत के बाद का 'वाटरशेड मोमेंट' बताया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने देश में आत्मविश्वास बढ़ाया और औपनिवेशिक मानसिकता से बाहर निकलने का रास्ता दिखाया।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि 4,399 दिनों की यह यात्रा 'आत्मनिर्भर और विकसित भारत' की दिशा में एक स्वर्णिम अध्याय है। कई केंद्रीय मंत्रियों ने मंदिरों में पूजा-अर्चना कर प्रधानमंत्री की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना भी की।
विदेशों से भी मिलीं शुभकामनाएं
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रधानमंत्री को बधाइयां मिल रही हैं। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने कहा कि मोदी ने भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है। वहीं भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भी बधाई देते हुए इसे उनके दशकों लंबे जनसेवा और नेतृत्व का प्रमाण बताया।
दुनियाभर के कई नेताओं और राजनयिकों ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें शुभकामनाएं भेजीं। इससे स्पष्ट है कि उनकी राजनीतिक पहचान अब केवल भारत तक सीमित नहीं रह गई है।
'12 साल बेमिसाल' अभियान की तैयारी
बीजेपी अब इस उपलब्धि को एक बड़े जनसंपर्क अभियान में बदलने की तैयारी कर रही है। पार्टी '12 साल बेमिसाल' अभियान के माध्यम से सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाएगी। इसके तहत देशभर में कार्यक्रम, प्रदर्शनियां और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल इंडिया, गरीब कल्याण, रक्षा और विदेश नीति जैसे क्षेत्रों में सरकार ने बड़े बदलाव किए हैं। पार्टी इसे 'न्यू इंडिया मॉडल' के रूप में पेश करना चाहती है।
राजनीतिक विरासत पर असर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह रिकॉर्ड प्रधानमंत्री मोदी की राजनीतिक विरासत को और मजबूत करेगा। लगातार सबसे लंबे समय तक चुने हुए प्रधानमंत्री रहने को भारतीय राजनीति में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
हालांकि विपक्ष इसे महज प्रचार बता रहा है, जबकि बीजेपी इसे जनता के भरोसे और मजबूत नेतृत्व की जीत के रूप में पेश कर रही है। फिलहाल यह रिकॉर्ड देश की राजनीति में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में पार्टी इसे अपने राजनीतिक नैरेटिव का अहम हिस्सा बना सकती है।
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