मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
1
विचारों
मेघालय के बहुचर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में एक नया कानूनी मोड़ आया है। साल 2025 में हनीमून के दौरान अपने पति राजा रघुवंशी की कथित तौर पर हत्या करने की आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ अब मेघालय सरकार ने देश की शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। राज्य सरकार द्वारा बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर किए जाने के फैसले का मृतक राजा के परिवार ने पुरजोर स्वागत किया है। हालांकि, मृतक के परिजनों ने यह डर भी जताया है कि जमानत पर बाहर घूम रही सोनम गवाहों को डरा-धमका सकती है या देश छोड़कर भाग सकती है।
विपिन रघुवंशी ने जताई फरार होने और सबूत मिटाने की आशंका
मृतक राजा रघुवंशी के बड़े भाई विपिन रघुवंशी ने इंदौर में मीडिया से बातचीत करते हुए मेघालय सरकार के इस साहसिक कदम की सराहना की। उन्होंने कहा, "हम सोनम की जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए मेघालय सरकार का तहे दिल से आभार व्यक्त करते हैं।" विपिन ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि सोनम को लंबे समय तक जमानत पर बाहर रहने देना न्याय के हित में नहीं है। वह इस दौरान केस से जुड़े अहम सबूतों को नष्ट कर सकती है और मामले के गवाहों को प्रभावित कर सकती है।
विपिन ने आगे कहा, "हमें इस बात का भी गंभीर अंदेशा है कि इन दिनों शिलांग में रह रही सोनम अचानक पुलिस को चकमा देकर फरार हो सकती है।" उन्होंने उम्मीद जताई कि न्यायपालिका से उन्हें पूर्ण न्याय मिलेगा। उच्चतम न्यायालय इस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने जा रहा है, जिस पर पूरे परिवार की नजरें टिकी हुई हैं।
हनीमून के दौरान हुई थी राजा की बेरहमी से हत्या
यह पूरा मामला साल 2025 का है, जब इंदौर के एक प्रतिष्ठित ट्रांसपोर्ट कारोबारी परिवार के बेटे राजा रघुवंशी अपनी पत्नी सोनम के साथ हनीमून मनाने मेघालय गए थे। वहां पहुंचने के कुछ ही दिनों बाद दोनों संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए थे। बाद में मेघालय पुलिस को ईस्ट खासी हिल्स जिले के सोहरा (चेरापूंजी) इलाके में एक झरने के पास गहरी खाई से राजा का क्षत-विक्षत शव मिला था।
पुलिस की जांच में जो खुलासा हुआ, उसने सबको चौंका दिया। पुलिस के अनुसार, सोनम ने अपने कथित प्रेमी राज कुशवाह और तीन भाड़े के हत्यारों के साथ मिलकर राजा की हत्या की साजिश रची थी ताकि वह अपने पति को रास्ते से हटा सके। इस सनसनीखेज हत्याकांड के आरोप में सोनम को 9 जून 2025 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार किया गया था।
कानूनी पेंच और उच्च न्यायालय का फैसला
सोनम रघुवंशी को गिरफ्तार किए जाने के बाद शिलांग के जिला कारागार में रखा गया था, जहां उसने 10 महीने से अधिक का समय न्यायिक हिरासत में बिताया। इसके बाद, 27 अप्रैल को एक निचली अदालत ने उसे जमानत दे दी थी। इस जमानत को रद्द कराने के लिए मेघालय सरकार ने मेघालय उच्च न्यायालय का रुख किया था।
हालांकि, 29 जून को मेघालय उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार की उस अर्जी को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में पुलिस प्रशासन की गंभीर खामियों को रेखांकित किया था। अदालत का कहना था कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को उसके कानूनी अधिकारों और गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी देने में पुलिस ने घोर लापरवाही बरती थी। इसी प्रक्रियात्मक त्रुटि का लाभ सोनम को मिला और हाईकोर्ट ने निचली अदालत के जमानत के फैसले को बरकरार रखा था। अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाता है।
Comments
0 comment