लंदन से पढ़ाई और SDM की नौकरी को दी विदाई, आनंद सर के छात्र धनंजय ने शिक्षा के क्षेत्र में लिखी सफलता की नई इबारत बिहार 2 महीने पहले 72
सुपर-30 के संस्थापक आनंद सर के होनहार शिष्य धनंजय कुमार ने प्रशासनिक सेवा की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर शिक्षा के क्षेत्र में कदम रखा है। अब उनके द्वारा पढ़ाए गए कई छात्रों ने 70वीं BPSC परीक्षा में सफलता हासिल कर एक नई मिसाल कायम की है।

एक प्रेरणादायक सफर की शुरुआत

बिहार की माटी से निकले और सुपर-30 के माध्यम से पहचान बनाने वाले मेधावी छात्रों की फेहरिस्त में एक और नाम अब चर्चा के केंद्र में है। ये नाम है धनंजय कुमार का, जिन्होंने अपनी मेहनत और दूरदर्शिता से सफलता की एक ऐसी कहानी लिखी है जो आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। आनंद सर ने सोशल मीडिया पर अपने इस प्रिय शिष्य की उपलब्धि साझा करते हुए उनके संघर्ष और त्याग की कहानी दुनिया के सामने रखी है। धनंजय एक अत्यंत सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं। आनंद सर के मार्गदर्शन में बुनियादी शिक्षा हासिल करने के बाद, उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की। अपनी कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने पूर्ण छात्रवृत्ति प्राप्त की, जिसकी बदौलत उन्होंने लंदन के प्रतिष्ठित किंग्स कॉलेज (King’s College London) से उच्च शिक्षा प्राप्त की।

प्रशासनिक सेवा को अलविदा

विदेश से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद धनंजय भारत वापस लौटे। उन्होंने बिहार लोक सेवा आयोग यानी BPSC की कठिन परीक्षा दी और अपनी योग्यता के बल पर एसडीएम (SDM) के पद पर चयनित हुए। एक प्रशासनिक अधिकारी का पद किसी भी युवा के लिए बड़ी उपलब्धि होती है, लेकिन धनंजय का लक्ष्य कुछ और ही था। प्रशासनिक सेवा में कार्यभार संभालने के बावजूद उनका मन समाज सेवा के कार्यों में ही रमता रहा। अंततः उन्होंने एक बड़ा और साहसी निर्णय लिया। धनंजय सीधे अपने गुरु आनंद सर के पास पहुंचे और उनसे कहा कि उनका मन नौकरी में नहीं लग रहा है। उन्होंने आनंद सर से अपने मन की बात साझा की और कहा कि वह उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलते हुए समाज के बच्चों को शिक्षित करना चाहते हैं। इसके बाद धनंजय ने एसडीएम पद से इस्तीफा दे दिया ताकि वह अपना पूरा समय शिक्षा जगत को दे सकें।

शिक्षक के रूप में नई पहचान

नौकरी छोड़ने के बाद धनंजय ने खुद को पूरी तरह से छात्रों को बेहतर और सुलभ शिक्षा प्रदान करने के कार्य में समर्पित कर दिया। उनकी निष्ठा और पढ़ाने की शैली का सुखद परिणाम अब सामने आने लगा है। हाल ही में आयोजित 70वीं BPSC परीक्षा के परिणाम ने साबित कर दिया कि धनंजय का निर्णय सही था। उनके द्वारा पढ़ाए गए कई छात्रों ने इस परीक्षा में बाजी मारी है और सफलता का स्वाद चखा है। आनंद सर ने इस उपलब्धि पर बेहद खुशी जाहिर की है। उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि एक शिक्षक के लिए इससे अधिक गर्व का क्षण और कोई नहीं हो सकता जब उसका शिष्य खुद तो मंजिल हासिल करे ही, साथ ही दूसरों के सपनों को साकार करने के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दे।

समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव

धनंजय की कहानी केवल एक सफल करियर के बदलने की नहीं है, बल्कि यह उस संस्कार और जिम्मेदारी की है जो उन्हें अपने गुरु से मिली है। आनंद सर को इस बात का गहरा संतोष है कि वह धनंजय के मन में समाज के प्रति जिम्मेदारी और परोपकार की भावना को जगा पाए हैं। आज धनंजय केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि एक ऐसे प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं जो न केवल युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने में मदद कर रहे हैं, बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में एक जिम्मेदार नागरिक बनाने का कार्य भी कर रहे हैं। उनका यह सफर बताता है कि सच्ची सफलता पद या प्रतिष्ठा में नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में बदलाव लाने में निहित है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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