आनंद किशोर सबसे बड़े माफिया, सुधाकर सिंह का बड़ा हमला; रिशु श्री टेंडर मामले में किए चौंकाने वाले खुलासे बिहार एक घंटा पहले 2
आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद किशोर पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने रिशु श्री टेंडर मामले और शिक्षा विभाग के घोटालों की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

शिक्षा विभाग और आनंद किशोर पर गंभीर आरोप

बिहार की राजनीति में आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह के ताजा बयानों ने हलचल मचा दी है। सुधाकर सिंह ने सीधे तौर पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आनंद किशोर को निशाने पर लिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था को सुनियोजित तरीके से बर्बाद किया जा रहा है और इस पूरे नेटवर्क के पीछे आनंद किशोर का हाथ है। सांसद ने मीडिया के सामने दावा किया कि रिशु श्री को सरकारी टेंडर दिलाने की शुरुआत आनंद किशोर ने ही की थी, जिसके बाद से शिक्षा विभाग में अनियमितताओं का दौर शुरू हो गया।

सबसे बड़ा माफिया होने का दावा

सुधाकर सिंह ने तीखे लहजे में कहा कि आनंद किशोर बिहार के सबसे बड़े माफिया हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों के दौरान राज्य में आयोजित हुई कई बड़ी परीक्षाओं में जो घोटाले और गड़बड़ियां सामने आई हैं, उनकी जड़ें कहीं न कहीं आनंद किशोर से जुड़ी हैं। सांसद के अनुसार, टॉपर घोटाला जैसी घटनाएं इसी भ्रष्टाचार के जाल का परिणाम हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आनंद किशोर ने एक ऐसा सिस्टम तैयार कर लिया है, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

टेंडर और घोटालों का नेटवर्क

सांसद सुधाकर सिंह ने रिशु श्री का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए बताया कि उन्हें पहला सरकारी काम दिलाने वाले आनंद किशोर ही थे। उन्होंने आगे कहा कि इसी एक टेंडर ने शिक्षा विभाग में वित्तीय धांधली के दरवाजे खोल दिए। उनके दावों के मुताबिक, ये केवल एक मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों-अरबों रुपयों की हेराफेरी का एक बहुत बड़ा तंत्र है। सुधाकर सिंह ने ये भी दावा किया कि इस घोटाले से अर्जित की गई अकूत संपत्ति को कथित तौर पर विदेशों में निवेश किया गया है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने अभी कोई दस्तावेजी सबूत सार्वजनिक नहीं किए हैं।

दीपक कुमार और नौ अधिकारियों पर सवाल

इस पूरे मामले में सुधाकर सिंह ने केवल आनंद किशोर को ही नहीं, बल्कि तत्कालीन मुख्य सचिव दीपक कुमार का नाम भी शामिल किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आनंद किशोर को सीधे तौर पर मुख्य सचिव का संरक्षण प्राप्त था। सांसद ने मांग की है कि आनंद किशोर समेत कुल 9 आईएएस अधिकारियों की भूमिका की गहन जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि इतने बड़े स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार के लिए सिर्फ एक व्यक्ति जिम्मेदार नहीं हो सकता, बल्कि अधिकारियों की एक पूरी लॉबी इसमें शामिल है।

अदालत की निगरानी में जांच की मांग

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए सुधाकर सिंह ने कहा कि बिहार सरकार को इस मामले की गंभीरता को समझना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि जिस तरह से चर्चित चारा घोटाले की जांच हुई थी, उसी तर्ज पर शिक्षा विभाग के इन घोटालों की जांच भी अदालत की निगरानी में कराई जाए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि सरकार उनके खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहती है, तो वह पूरी तरह तैयार हैं, क्योंकि उनके पास अपने दावों को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं।

भ्रष्टाचार के संरक्षण का आरोप

अंत में सांसद ने राज्य सरकार पर भी तंज कसा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भ्रष्टाचार के इन मामलों पर ठोस कार्रवाई करने के बजाय ऐसे अधिकारियों को बचाने में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग में वर्षों से जो अनियमितताएं चल रही हैं, वे बिना उच्च स्तरीय मिलीभगत के संभव नहीं हैं। सुधाकर सिंह ने स्पष्ट किया कि जब तक निष्पक्ष एजेंसी से जांच नहीं कराई जाएगी, तब तक बिहार की शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उम्मीद करना बेमानी है। वर्तमान में राज्य सरकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से इन तीखे आरोपों पर कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!