पटना में गुटबाजी के बीच टला राहुल गांधी का कार्यक्रम, अब देहरादून में होगी 'छात्रों की गूंज' बिहार एक महीने पहले 58
बिहार कांग्रेस में मचे घमासान के कारण राहुल गांधी के प्रस्तावित कार्यक्रम को पटना से देहरादून शिफ्ट कर दिया गया है। पार्टी आधिकारिक तौर पर इसे उपचुनाव के चलते आचार संहिता का असर बता रही है।

पटना में कार्यक्रम रद्द होने के पीछे की असली वजह

बिहार कांग्रेस के भीतर चल रही आपसी खींचतान अब राहुल गांधी के कार्यक्रमों तक पहुंच गई है। राहुल गांधी का बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम 'छात्रों की गूंज' पहले पटना में आयोजित होना सुनिश्चित था, लेकिन अब मिली जानकारी के अनुसार इसे पटना से हटाकर देहरादून स्थानांतरित कर दिया गया है। सूत्रों का मानना है कि पार्टी के प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष के साथ हुई जिलाध्यक्षों की हालिया बैठक में जो आपसी कलह और तू-तू मैं-मैं देखने को मिली, उसने इस पूरे आयोजन पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। आपसी सिरफुटौव्वल के कारण शीर्ष नेतृत्व ने पटना में होने वाले इस कार्यक्रम को फिलहाल टालने का निर्णय लिया है।

देहरादून में 17 जुलाई को तैयारी

पटना में आयोजन टलने के तुरंत बाद पार्टी ने आनन-फानन में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून का रुख किया है। जानकारी के मुताबिक, अब 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम की रूपरेखा 17 जुलाई को देहरादून में तैयार की जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इस बदलाव को केवल एक प्रशासनिक कदम के तौर पर नहीं, बल्कि बिहार कांग्रेस की आंतरिक कमजोरी के तौर पर देखा जा रहा है। पंजाब और गोवा के बाद अब बिहार में भी कांग्रेस की गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है, जिसका सीधा असर केंद्रीय कार्यक्रमों पर पड़ता दिख रहा है।

आचार संहिता या संगठन की विफलता

कांग्रेस पार्टी का आधिकारिक पक्ष यह है कि बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के कारण क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता लागू है, जिसकी वजह से इस तरह के बड़े कार्यक्रम का आयोजन करना संभव नहीं हो सका। पार्टी नेताओं का दावा है कि वे चुनावी नियमों का सम्मान करते हैं और इसी कारण कार्यक्रम को फिलहाल रद्द करना पड़ा है। हालांकि, पार्टी के भीतर चर्चाएं कुछ और ही संकेत दे रही हैं। सूत्रों की मानें तो छात्र सम्मेलन की सफलता के लिए जो लक्ष्य संगठन को दिया गया था, उसे प्राप्त करने में बिहार कांग्रेस नाकाम रही।

डेटा जुटाने का लक्ष्य और अधूरी तैयारी

बताया जा रहा है कि बिहार कांग्रेस संगठन को लगभग 10 हजार ऐसे छात्रों का विस्तृत डेटाबेस तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जो नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में हालिया विवादों और समस्याओं से सीधे प्रभावित हुए हैं। इन छात्रों के नाम और उनके संपर्क विवरण एकत्रित करना एक बड़ी चुनौती थी, जिसे समय रहते पूरा नहीं किया जा सका। तैयारी अधूरी रहने और संगठन द्वारा लक्ष्य हासिल न कर पाने के कारण कार्यक्रम को लेकर पार्टी में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।

राहुल गांधी के दौरे पर भविष्य की संभावनाएं

हालांकि कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से इन चर्चाओं की पुष्टि करने से इनकार किया है और लगातार यही दोहरा रही है कि कार्यक्रम के स्थगित होने का एकमात्र कारण उपचुनाव के चलते लगी आदर्श आचार संहिता है। वर्तमान स्थिति यह है कि पार्टी ने राहुल गांधी के बिहार दौरे के लिए किसी नई तारीख की घोषणा नहीं की है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि छात्र सम्मेलन कब आयोजित होगा और राहुल गांधी आखिर बिहार कब आएंगे। पार्टी के अगले कदम और संगठन में हो रहे बदलावों पर राजनीतिक जानकारों की भी पैनी नजर है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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