भारत-चीन संबंधों पर बीजिंग का रुख: अजीत डोभाल और हान झेंग की मुलाकात के बाद समझौतों को लागू करने पर जोर विश्व एक घंटा पहले 4
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग के बीच हुई उच्चस्तरीय वार्ता के बाद चीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बनी सहमति को धरातल पर उतारने की वकालत की है।

सीमा पर तनाव कम करने और द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की नई कोशिशें

भारत और चीन के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक तनाव को कम करने और आपसी संबंधों को पटरी पर लाने के लिए राजनयिक स्तर पर प्रयास काफी तेज हो गए हैं। इस कड़ी में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस मुलाकात के बाद बीजिंग की ओर से जारी बयान ने कूटनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। चीन ने स्पष्ट रूप से संकेत दिया है कि अब समय आ गया है कि शीर्ष स्तर पर हुई चर्चाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखकर उन्हें पूरी तरह से लागू किया जाए।

मोदी और जिनपिंग की मुलाकातों का महत्व

चीनी उपराष्ट्रपति हान झेंग ने इस वार्ता के दौरान इस बात पर जोर दिया कि पिछले दो वर्षों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कजान और तियानजिन में हुई मुलाकातें द्विपक्षीय संबंधों के लिए मील का पत्थर साबित हुई हैं। इन मुलाकातों में दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को सुलझाने और आपसी मतभेदों को कम करने के लिए जो सहमति बनी थी, वह आज के समय में अत्यधिक प्रासंगिक है। हान झेंग का मानना है कि इन नेताओं के विजन ने ही भारत और चीन के खराब होते संबंधों को सुधार और स्थिरता के रास्ते पर लाने में निर्णायक भूमिका निभाई है।

रणनीतिक विश्वास और समझौतों का कार्यान्वयन

बैठक में अजीत डोभाल और हान झेंग ने रणनीतिक आपसी विश्वास को मजबूत करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। चीनी पक्ष ने स्पष्ट किया कि भारत और चीन को एक-दूसरे के प्रति अपने संबंधों को दीर्घकालिक और रणनीतिक नजरिए से देखना चाहिए। चीन का आग्रह है कि शीर्ष नेताओं के बीच जो भी समझौते हुए हैं, उन्हें अब संयुक्त रूप से धरातल पर उतारा जाना चाहिए। ऐसा करने से ही दोनों पड़ोसियों के बीच विश्वास की कमी दूर होगी और सीमा पर शांति सुनिश्चित की जा सकेगी।

सहयोग की संभावनाएं और मतभेदों का प्रबंधन

अपनी चर्चा के दौरान, हान झेंग ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को अपने साझा हितों वाले क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाओं को तलाशना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत और चीन को अंतरराष्ट्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर भी आपसी समन्वय को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है। मतभेदों को लेकर चीन का रुख यह रहा कि उन्हें रिश्तों की मुख्य दिशा तय नहीं करने देना चाहिए। इसके बजाय, संवाद और सहयोग का मार्ग अपनाकर मतभेदों का उचित प्रबंधन करना दोनों देशों के हित में है।

संबंधों के भविष्य की दिशा

हालांकि पिछले कुछ वर्षों में सीमा पर व्याप्त तनाव के कारण भारत और चीन के संबंधों में काफी कड़वाहट आई है, लेकिन हाल के महीनों में लगातार बढ़ते संवाद ने स्थिति को बदलने के संकेत दिए हैं। सीमा पर शांति और स्थिरता को ही द्विपक्षीय प्रगति का मूल आधार माना जा रहा है। अजीत डोभाल और हान झेंग की यह मुलाकात इसी दिशा में एक सकारात्मक कदम के रूप में देखी जा रही है, जहाँ दोनों पक्ष बातचीत के माध्यम से गतिरोध को समाप्त करने के लिए तत्पर दिखाई दे रहे हैं।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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