10 सर्कुलर रोड पर सस्पेंस कायम! आखिर कब खाली होगा राबड़ी देवी का बंगला? आज खत्म हो रही मोहलत बिहार 5 दिन पहले 21
राबड़ी देवी को आवंटित सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड खाली करने की समयसीमा सोमवार को समाप्त हो रही है, जबकि भवन निर्माण विभाग का 15 दिन का अल्टीमेटम भी आज अपने आखिरी पड़ाव पर है।

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को मिले सरकारी आवास 10 सर्कुलर रोड को खाली करने के लिए सरकार की ओर से तय की गई अवधि सोमवार को पूरी हो रही है। भवन निर्माण विभाग की तरफ से दिए गए 15 दिनों के अल्टीमेटम का आज आखिरी दिन है। यही वजह है कि राजनीतिक हलकों से लेकर प्रशासनिक अमले तक हर किसी की नजर इस पर लगी है कि समयसीमा खत्म होने के बाद राबड़ी परिवार क्या रुख अपनाता है और सरकार अगला कदम क्या उठाती है।

बताया जा रहा है कि राबड़ी देवी मलमास खत्म होने के बाद ही बंगला खाली कर सकती हैं। फिलहाल आवास के बाहर बड़ी संख्या में समर्थक और कार्यकर्ता जुटे हुए हैं और सबके मन में यही सवाल है कि आखिर वे यह बंगला कब छोड़ेंगी।

सियासी बयानबाजी हुई तेज

राबड़ी आवास को लेकर राजनीतिक टीका-टिप्पणी भी जोर पकड़ चुकी है। जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि कानून आम और खास, सबके लिए एक समान होता है। उन्होंने बताया कि सरकार पहले ही वैकल्पिक आवास मुहैया करा चुकी है और नियमों का पालन हर किसी को करना चाहिए।

नीरज कुमार ने कहा, “उनके पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है। वे जहां चाहें वहां रह सकते हैं। जनता राजनीतिक रूप से अपना फैसला पहले ही सुना चुकी है। यदि सरकारी आवास निर्धारित समय सीमा के भीतर खाली नहीं किया जाता है तो कानून अपना रास्ता खुद तय करेगा।”

आवास पर डटे आरजेडी कार्यकर्ता

अल्टीमेटम की आखिरी तारीख के बीच 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी आवास पर राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के कार्यकर्ता बड़ी तादाद में मौजूद हैं। ये कार्यकर्ता आवास परिसर के आसपास लगातार जमे हुए हैं और लालू-राबड़ी परिवार के समर्थन में अपनी मौजूदगी बनाए हुए हैं। बंगले के बाहर राजनीतिक हलचल भी तेज दिखाई दे रही है।

अधिकतर सामान पहले ही पहुंचा

सूत्रों की मानें तो राबड़ी आवास से बड़ी मात्रा में सामान पहले ही लालू परिवार के निजी आवास कौटिल्य नगर भेजा जा चुका है। हालांकि परिवार अब तक पूरी तरह नए आवास में नहीं गया है। ऐसे में यह तय नहीं है कि आज शाम तक बंगला औपचारिक तौर पर खाली किया जाएगा या नहीं।

शिफ्टिंग में मलमास बना रुकावट

बताया जा रहा है कि राबड़ी परिवार ने प्रशासन को जानकारी दी है कि इस समय मलमास चल रहा है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार मलमास के दौरान नए घर में प्रवेश या दूसरे शुभ कार्यों से बचा जाता है। इसी वजह से परिवार ने तत्काल शिफ्ट होने में असमर्थता जताई है। जानकारी के मुताबिक मलमास की अवधि समाप्ति की ओर है और इसके बाद शुभ मुहूर्त देखकर परिवार नए आवास में जा सकता है।

कौटिल्य नगर का आवास लगभग तैयार

सूत्रों का कहना है कि राबड़ी परिवार के लिए कौटिल्य नगर में बनाया गया नया आवास लगभग पूरी तरह तैयार हो चुका है। बीते कुछ दिनों में वहां आखिरी स्तर के काम भी निपटा लिए गए हैं। माना जा रहा है कि मलमास खत्म होने के बाद अगले एक सप्ताह के भीतर राबड़ी देवी अपने परिवार के साथ कौटिल्य नगर के नए आवास में शिफ्ट हो सकती हैं।

भवन निर्माण विभाग की अगली कार्रवाई पर निगाहें

भवन निर्माण विभाग ने 15 दिनों का नोटिस जारी कर तय अवधि के भीतर सरकारी आवास खाली करने को कहा था। आज समयसीमा खत्म होने के बाद यदि बंगला खाली नहीं होता है तो विभाग आगे क्या रुख अपनाता है, इस पर सबकी नजर रहेगी। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार सरकार फिलहाल पूरे मामले पर निगाह बनाए हुए है और आगे की कार्रवाई नियमों तथा कानूनी प्रावधानों के तहत की जाएगी।

राजनीतिक रूप से अहम हुआ मामला

राबड़ी आवास से जुड़ा यह विवाद अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है। सत्ता पक्ष लगातार नियमों के पालन पर जोर दे रहा है, जबकि आरजेडी समर्थक इसे राजनीतिक नजरिए से देख रहे हैं। ऐसे में समयसीमा समाप्त होने के बाद की हर गतिविधि राजनीतिक रूप से भी अहम मानी जा रही है।

वहीं बिहार सरकार में ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार ने भी साफ किया कि आवास खाली करने की आखिरी तारीख आज ही है और भवन निर्माण विभाग विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन कर रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग नियमों के तहत आगे की कार्रवाई करेगा।

अब क्या होगा अगला कदम?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 15 जून की समयसीमा खत्म होने के बाद राबड़ी देवी और उनका परिवार क्या निर्णय लेता है। क्या परिवार तुरंत बंगला खाली करेगा, या फिर मलमास समाप्त होने तक अतिरिक्त समय की मांग करेगा? साथ ही भवन निर्माण विभाग इस पर क्या रवैया अपनाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट हो जाएगा।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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