बिहार
3 घंटे पहले
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विचारों
प्रधानमंत्री का लाल किले से संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा और वैचारिक चुनौतियों का विशेष जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि हिंसा के दम पर समाज में अराजकता फैलाने वाले हथियारबंद नक्सलवाद को अब काफी हद तक नियंत्रित और कमजोर कर दिया गया है। हालांकि, उन्होंने एक नई और गंभीर चुनौती की ओर देश का ध्यान आकर्षित किया, जिसे उन्होंने 'दिमागी नक्सल' का नाम दिया। प्रधानमंत्री ने देशवासियों, विशेषकर युवाओं को इस विचारधारा से सावधान रहने की सलाह दी और इसे समाज से अलग-थलग करने पर जोर दिया।
जीतन राम मांझी का पूर्ण समर्थन
प्रधानमंत्री मोदी की इस टिप्पणी का केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने पूरा समर्थन किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री के विचारों को देशहित से जुड़ा हुआ बताते हुए कहा कि यह समय की सबसे बड़ी मांग है। मांझी के अनुसार, हथियार उठाने वाले नक्सली तो अब हाशिए पर चले गए हैं, लेकिन जो लोग अपनी सोच और वैचारिक प्रभाव के माध्यम से देश के युवाओं को गुमराह कर रहे हैं, वे अधिक घातक हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 'दिमागी नक्सल' की जिस चुनौती का जिक्र किया है, वह बेहद प्रासंगिक है और इससे निपटने के लिए समाज के हर वर्ग को एकजुट होने की जरूरत है।
युवा पीढ़ी को बचाने की जरूरत
जीतन राम मांझी ने आगे विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा कि हमें इस बात की गहरी चिंता होनी चाहिए कि हमारे देश की युवा पीढ़ी किसी गलत विचारधारा के प्रभाव में न आए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग विदेशी तंत्र से लाभ उठा रहे हैं और उस मानसिकता का प्रचार कर रहे हैं जो भारत की उन्नति में बाधक है। मांझी का मानना है कि यह केवल एक प्रशासनिक लड़ाई नहीं है, बल्कि एक वैचारिक संघर्ष है। उन्होंने कहा कि न केवल युवाओं को, बल्कि प्रत्येक भारतवासी को इस बात के प्रति सतर्क रहना चाहिए कि वे किस प्रकार के विचारों को अपना रहे हैं और उनका स्रोत क्या है।
महिला आरक्षण पर राजनीतिक एकजुटता की अपील
स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने महिला सशक्तिकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण बात कही थी। उन्होंने देश के सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को जल्द से जल्द लागू करने के लिए एक साथ आएं। जीतन राम मांझी ने इस मुद्दे पर भी प्रधानमंत्री के सुर में सुर मिलाते हुए विपक्षी दलों से राजनीति से ऊपर उठने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण न केवल महिलाओं के हितों की रक्षा करेगा, बल्कि यह देश के समग्र राजनीतिक विकास के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। सभी सांसदों और विधायकों को इस ऐतिहासिक बदलाव का समर्थन करना चाहिए।
विपक्ष पर कड़ा प्रहार
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने विपक्ष पर भी तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस का त्यौहार पूरे भारतवर्ष के लिए है, लेकिन विपक्षी दलों का व्यवहार ऐसा लगता है जैसे वे भारत की स्वायत्तता के पक्ष में नहीं हैं। मांझी ने आरोप लगाया कि विपक्ष की मानसिकता ऐसी है कि वे देश को विदेशी ताकतों के माध्यम से संचालित होते देखना चाहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की एकता, अखंडता और उज्ज्वल भविष्य के लिए हमें किसी भी प्रकार के आंतरिक विरोध या वैचारिक षड्यंत्र को सफल नहीं होने देना है। अंत में, उन्होंने दोहराया कि प्रधानमंत्री द्वारा उठाए गए मुद्दे देश की सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं और हर जिम्मेदार नागरिक को इन चुनौतियों के प्रति सजग रहना चाहिए।
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