पटना के डॉ. हेमंत कुमार: नेफ्रोलॉजी की दुनिया में एक बड़ा नाम, जिन्हें किडनी के मरीज मानते हैं मसीहा बिहार एक महीने पहले 65
मुंगेर के एक सामान्य परिवार से निकलकर पद्मश्री सम्मान पाने वाले डॉ. हेमंत कुमार ने नेफ्रोलॉजी के क्षेत्र में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने न केवल बिहार में डायलिसिस की आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराईं, बल्कि गरीबों के लिए इलाज को सुलभ बनाने के लिए भी संघर्ष किया।

संघर्षपूर्ण शुरुआत और शिक्षा

मुंगेर जिले के जमालपुर कस्बे के एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार में पले-बढ़े डॉ. हेमंत कुमार का जीवन आज देश भर के युवाओं और चिकित्सा जगत के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी प्राथमिक शिक्षा जमालपुर के ईस्टर्न रेलवे बॉयज हाई स्कूल में पूरी हुई। अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान वे एक सामान्य छात्र थे और उन्होंने मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण की थीं। इंटरमीडिएट के बाद उन्होंने मुंगेर के आरडी एंड डीजे कॉलेज में वनस्पति विज्ञान में बीएससी करने के लिए प्रवेश लिया, लेकिन किन्हीं कारणों से वह वहां अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए। इसके बाद उन्होंने अपने जीवन की दिशा बदली और पटना का रुख किया, जहां से उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में अपना भविष्य संवारने का संकल्प लिया।

चिकित्सा शिक्षा में उपलब्धियां

डॉ. हेमंत ने अपनी मेडिकल की पढ़ाई की शुरुआत जमशेदपुर के प्रसिद्ध महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज से की, जहां से उन्होंने एमबीबीएस की डिग्री हासिल की। उच्च शिक्षा के प्रति उनकी लगन उन्हें पटना ले आई, जहां उन्होंने मेडिसिन में एमडी किया और साथ ही चेस्ट डिजीज में डिप्लोमा भी प्राप्त किया। अपनी विशेषज्ञता को और निखारने के लिए वह बीएचयू गए और वहां से नेफ्रोलॉजी में डीएम की उपाधि प्राप्त की। यह उनके करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ था, क्योंकि वह बिहार के पहले ऐसे डॉक्टर बने जिन्होंने नेफ्रोलॉजी विषय में डीएम किया था। आगे चलकर उन्होंने पटना के आईजीआईएमएस और पीएमसीएच जैसे प्रमुख सरकारी अस्पतालों में नेफ्रोलॉजी विभाग की कमान संभाली और उसे नई ऊंचाइयों पर ले गए।

स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी योगदान

डॉ. हेमंत कुमार का सबसे बड़ा योगदान किडनी के मरीजों के जीवन को सुगम बनाने में रहा है। उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल यानी पीएमसीएच में पहली बार 24 घंटे डायलिसिस सेवा की शुरुआत हुई। इसके अतिरिक्त, पटना के गार्डिनर अस्पताल सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर किडनी रोग के उपचार और गरीब मरीजों को निःशुल्क डायलिसिस उपलब्ध कराने में उन्होंने महती भूमिका निभाई। बिहार के भीतर एम्बुलेटरी पेरिटोनियल डायलिसिस यानी सीएपीडी तकनीक को लोकप्रिय बनाने का श्रेय भी उन्हें ही जाता है। उन्होंने विशेष रूप से नवजात बच्चों, गर्भवती महिलाओं, गंभीर कैंसर रोगियों और बुजुर्गों के लिए उपचार की व्यवस्था को सुलभ बनाने पर जोर दिया है।

समाज सेवा और जागरूकता

डॉ. हेमंत केवल एक डॉक्टर ही नहीं बल्कि एक समर्पित समाजसेवी और शिक्षक भी हैं। उन्होंने पाटलिपुत्र नेशनल किडनी फाउंडेशन की नींव रखी, जिसके माध्यम से वे लगातार विश्व किडनी दिवस पर जागरूकता अभियान संचालित करते हैं। बिहार में अंगदान को बढ़ावा देने और मृत व्यक्ति के अंगों के प्रत्यारोपण को लेकर समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने में भी उनका योगदान सराहनीय है। उनके द्वारा गर्भावस्था में किडनी की जटिल बीमारियों और शिशुओं की गुर्दे से जुड़ी समस्याओं पर किए गए शोध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रशंसा मिली है।

प्रशासनिक जिम्मेदारी और सम्मान

डॉ. हेमंत ने अपने लंबे करियर के दौरान कई प्रशासनिक पदों को भी संभाला है। उन्होंने आईजीआईएमएस में परीक्षा नियंत्रक, उप चिकित्सा अधीक्षक और गवर्निंग बोर्ड के सदस्य के रूप में काम किया। इसके अलावा, वह इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी (पूर्वी क्षेत्र) के अध्यक्ष भी रहे हैं। उन्हें इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी और इंडियन सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलॉजी जैसी वैश्विक संस्थाओं की फेलोशिप तथा लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार प्राप्त हुए हैं।

पद्मश्री सम्मान और नई नियुक्तियां

उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण वर्ष 2025 रहा। 25 जनवरी 2025 को उन्हें भारत सरकार द्वारा देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया। यह सम्मान उन्हें गरीब और जरूरतमंद किडनी रोगियों की निस्वार्थ सेवा के लिए प्रदान किया गया। वह देश के पहले ऐसे नेफ्रोलॉजिस्ट हैं जिन्हें इस सम्मान से अलंकृत किया गया है। इसके कुछ महीनों बाद, 14 अगस्त 2025 को उन्हें गोरखपुर एम्स के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। वर्तमान में, वह पटना के शेखपुरा स्थित अपने क्लीनिक के जरिए भी लगातार मरीजों की सेवा में जुटे हुए हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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