बिहार के सरकारी स्कूलों में नहीं हुआ समय में बदलाव, जानें क्या है नया अपडेट बिहार 2 महीने पहले 63
बिहार में भीषण गर्मी और लू के कहर को देखते हुए शिक्षा विभाग ने स्कूल संचालन के विशेष समय को जून महीने के अंत तक बढ़ा दिया है।

स्कूली समय में राहत बरकरार

बिहार में भीषण गर्मी और लू की मार को देखते हुए राज्य के शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। सरकारी विद्यालयों में लागू विशेष समय सारिणी की अवधि को अब 30 जून 2026 तक बढ़ा दिया गया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि फिलहाल स्कूलों के समय में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और पढ़ाई पुरानी व्यवस्था के तहत ही जारी रहेगी।

क्या रहेगा स्कूलों का समय

विभागीय आदेश के अनुसार, राज्य के सभी प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों का संचालन प्रातः 6:30 बजे से अपराह्न 12:30 बजे तक होगा। इस दौरान प्रार्थना, कक्षाओं की पढ़ाई और मध्याह्न भोजन का कार्यक्रम पहले से तय समय के अनुसार ही संचालित किया जाएगा।

मध्याह्न भोजन के लिए विशेष निर्देश

शिक्षा विभाग ने उन स्कूलों के लिए खास दिशा-निर्देश जारी किए हैं जहाँ कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों की संख्या बहुत अधिक है। ऐसे विद्यालयों में यदि एक साथ मध्याह्न भोजन देना संभव नहीं हो, तो प्रधानाध्यापक विद्यार्थियों को अलग-अलग समूहों में बांटकर भोजन और पढ़ाई की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।

ग्रीष्मावकाश के बाद सामान्य होगी स्थिति

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि 30 जून 2026 तक स्कूल वर्तमान समय के अनुसार ही चलेंगे। इसके बाद, ग्रीष्मावकाश समाप्त होने पर विद्यालयों का संचालन फिर से अपनी पुरानी और सामान्य समय सारिणी यानी प्रातः 9:30 बजे से अपराह्न 4:00 बजे तक कर दिया जाएगा।

अधिकारियों को मिले विशेष अधिकार

बदलते मौसम और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारियों को यह अधिकार दिया गया है कि वे आवश्यकतानुसार विद्यालय संचालन में बदलाव कर सकें। इसके अलावा, विद्यालय के प्रधानों और शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, साफ पीने के पानी की उपलब्धता और गर्मी से बचाव के लिए सभी जरूरी इंतजाम करें ताकि पढ़ाई का माहौल सुरक्षित बना रहे।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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