ट्रेन में हाथ-पैर बांधकर फेंका गया युवक, कैलाश की मौत पर परिवार ने खड़े किए बड़े सवाल बिहार एक घंटा पहले 4
पटना के पास ट्रेन से गिरकर हुई कैलाश कुमार की मौत को उसके परिजनों ने सुनियोजित हत्या करार दिया है। परिवार का आरोप है कि खुद को STF जवान बताने वाले बदमाशों ने लूटपाट के बाद कैलाश के हाथ-पैर बांधकर उसे चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया।

ट्रेन हादसे के पीछे छिपी खौफनाक साजिश

पटना के दानापुर रेलखंड पर 7 सितंबर को हुई कैलाश कुमार की मौत का मामला अब एक बेहद गंभीर आपराधिक मोड़ पर आ गया है। नेऊरा और बिहटा के बीच रेलवे ट्रैक पर मिले कैलाश के शव को पुलिस ने शुरुआती तौर पर महज एक हादसा माना था, लेकिन अब मृतक के परिवार वालों ने जो सनसनीखेज खुलासे किए हैं, उसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर ही बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का साफ कहना है कि कैलाश की मौत कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि लूटपाट के बाद की गई एक जघन्य हत्या है।

खुद को STF जवान बताकर की गई लूट

पीड़ित परिवार के दावों के अनुसार, कैलाश अपने साथी रितेश के साथ ट्रेन में सफर कर रहा था। उसी दौरान ट्रेन में सवार चार लोगों ने खुद को STF का जवान बताते हुए दोनों को अपना निशाना बनाया। परिवार का आरोप है कि बदमाशों ने पहले कैलाश और रितेश के साथ मारपीट की और उनके पास मौजूद नकदी, कैमरा और अन्य कीमती सामान लूट लिए। जब कैलाश ने इस लूट का विरोध किया, तो आरोपितों ने उसे काबू में कर उसके हाथ-पैर मजबूती से बांध दिए। इसके बाद उसे चलती ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई। इस पूरी घटना में रितेश भी गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसका इलाज वर्तमान में पटना के एलएनजेपी अस्पताल में चल रहा है।

पुलिस की कार्रवाई पर परिवार का अविश्वास

परिजनों के सबसे बड़े सवालों में से एक कैलाश के बंधे हुए हाथ हैं। परिवार का कहना है कि पुलिस द्वारा दिखाई गई तस्वीरों में कैलाश के हाथ पीछे की तरफ बंधे हुए स्पष्ट नजर आ रहे थे, जो इस बात का पक्का सबूत है कि उसे सुनियोजित तरीके से मारा गया है। इतना ही नहीं, दानापुर GRP की कार्यशैली पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। परिजनों का आरोप है कि घटना की गंभीरता को नजरअंदाज करते हुए 72 घंटे बीतने से पहले ही मृतक का अंतिम संस्कार करवा दिया गया। परिवार का कहना है कि पुलिस को जल्दबाजी करने के बजाय मामले की हर पहलू से बारीकी से जांच करनी चाहिए थी।

जांच के दायरे में कई अहम सवाल

अब इस मामले में पुलिस के सामने चुनौतियों का अंबार है। मुख्य रूप से ये सवाल जांच का विषय बने हुए हैं:

  • घटना के समय ट्रेन के दिव्यांग कोच में कौन-कौन यात्री मौजूद थे?
  • क्या सीसीटीवी फुटेज में आरोपितों की पहचान हो पा रही है?
  • कैलाश और रितेश के मोबाइल फोन की लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड क्या संकेत दे रहे हैं?
  • क्या ट्रेन में मौजूद अन्य यात्रियों के बयान से आरोपियों का सुराग मिल सकता है?

घायल रितेश का बयान इस पूरे मामले की गुत्थी सुलझाने में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है। फिलहाल, दानापुर GRP प्रभारी अजय कुमार ने औपचारिक रूप से मीडिया के सामने कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है। हालांकि, अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने यह भरोसा जरूर दिलाया है कि यदि जांच के दौरान लूटपाट और हत्या की पुष्टि होती है, तो दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। परिजन अब इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग पर अड़े हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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