BPSC AEDO परीक्षा में सेंध: बायोमेट्रिक एजेंसी की भूमिका संदेह के घेरे में, अब तक 35 गिरफ्तार बिहार एक महीने पहले 34
बिहार लोक सेवा आयोग की एईडीओ परीक्षा में कथित धांधली की जांच कर रही ईओयू को बायोमेट्रिक व्यवस्था और तकनीकी तंत्र के दुरुपयोग के संकेत मिले हैं। मामले में अब तक 35 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं और बड़े खुलासे की संभावना जताई जा रही है।

बिहार लोक सेवा आयोग की सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच ने अब नई दिशा पकड़ ली है। जांच एजेंसी का मानना है कि यह सिर्फ प्रश्नपत्र लीक तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि इसमें बायोमेट्रिक प्रणाली और तकनीकी ढांचे के दुरुपयोग की परतें भी खुलती जा रही हैं।

कई स्तरों पर सुनियोजित गड़बड़ी के संकेत

ईओयू के अनुसार परीक्षा की गोपनीयता को कमजोर करने के लिए योजनाबद्ध ढंग से अलग-अलग स्तरों पर अनियमितताएं बरती गईं। जांच में यह आरोप सामने आया है कि बायोमेट्रिक सत्यापन की जिम्मेदारी संभाल रही निजी एजेंसी ने तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

आरोप है कि निष्पक्षता सुनिश्चित करने वाले रेंडमाइजेशन नियमों (Randomization Rule) को नजरअंदाज करते हुए ऐन मौके पर सूची से बाहर के लोगों को परीक्षा केंद्रों पर तैनात कर दिया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि गिरफ्तार किए गए कई कर्मी खुद AEDO परीक्षा के अभ्यर्थी निकले, जबकि नियमानुसार उन्हें गैर-अभ्यर्थी होने का घोषणा पत्र देना अनिवार्य था।

जैमर और ब्लूटूथ पर भी कसा शिकंजा

ईओयू की ओर से बताया गया है कि बेगूसराय, छपरा और नालंदा से ब्लूटूथ डिवाइस के माध्यम से उत्तर उपलब्ध कराए जाने के संकेत मिले हैं। एजेंसी यह भी जांच रही है कि कुछ केंद्रों पर जैमर के दायरे को जानबूझकर सीमित रखा गया था या नहीं। यदि यह आरोप साबित होता है तो इसे परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक माना जाएगा।

35 गिरफ्तार, कुछ पुराने आरोपी भी शामिल

इस मामले में अब तक विभिन्न जिलों से 35 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें बायोमेट्रिक सुपरवाइजर, जिला समन्वयक (कोर्डिनेटर) और अन्य कर्मी शामिल हैं।

जांच में यह भी उजागर हुआ कि इनमें से कुछ लोग पहले सिपाही भर्ती परीक्षा में कथित धांधली के मामलों में आरोपी रह चुके थे, फिर भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंप दी गईं।

एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव

जांच के आधार पर ईओयू ने संबंधित बायोमेट्रिक एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव राज्य सरकार और अन्य परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को भेज दिया है। इसके साथ ही जैमर व्यवस्था से जुड़े कर्मियों और समूची तकनीकी प्रक्रिया की पड़ताल जारी है। आयोग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका को भी जांच के दायरे में लिया गया है।

जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद

ईओयू सूत्रों के अनुसार फिलहाल पूरे नेटवर्क की कड़ियों को आपस में जोड़ा जा रहा है और यह पता लगाया जा रहा है कि तकनीकी व्यवस्था का नियंत्रण किन हाथों में था तथा कहां-कहां लापरवाही या मिलीभगत हुई। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं तथा नई जानकारियां भी सामने आ सकती हैं। अब सभी की निगाहें अनुसंधान के नतीजों पर टिकी हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप