बिहार
एक महीने पहले
57
विचारों
मानसून सत्र का तीसरा दिन
बिहार विधानसभा के मानसून सत्र का आज बुधवार को तीसरा दिन है। सत्र की कार्यवाही तय कार्यक्रम के अनुसार प्रश्नकाल के साथ शुरू होगी। मानसून सत्र के पहले दो दिन सरकार के लिए काफी उत्पादक रहे हैं, लेकिन आज का दिन काफी गहमागहमी भरा रहने की पूरी उम्मीद है। विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने की रणनीति तैयार कर ली है और सदन के अंदर विभिन्न जनहित और राजनीतिक मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिल सकती है।
विपक्ष का आक्रामक रुख
सत्र के तीसरे दिन सदन में दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा मुख्य रूप से गूंज सकता है। विपक्षी दल इसे लेकर सरकार की घेराबंदी करने की पूरी तैयारी में हैं। इसके अतिरिक्त राज्य में हाल के दिनों में कथित पेपर लीक के मामले, राज्य में हुए एनकाउंटर और पंचायतों में नया टैक्स लगाने के फैसले का विपक्ष पुरजोर विरोध कर रहा है। विशेष रूप से गांवों में टैक्स लगाने के मुद्दे पर सरकार को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे जनता के खिलाफ एक बड़ा कदम मानकर आवाज उठा रहा है।
नगर विकास विधेयक 2026 की अहमियत
हंगामे के बीच आज बिहार विधानसभा में 'बिहार नगर विकास विधेयक-2026' पेश किया जाएगा। इस विधेयक का प्राथमिक लक्ष्य राज्य के शहरी ढांचे को आधुनिक और व्यवस्थित बनाना है। इसके तहत पूरे राज्य में 12 नए ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप का निर्माण किया जाएगा। इनमें पटना के समीप प्रस्तावित 'पाटलिपुत्र टाउनशिप' और सोनपुर में बनने वाली 'हरिहरनाथपुरम' टाउनशिप सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाएं हैं। इन परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक शक्तिशाली और स्वतंत्र अथॉरिटी के गठन का प्रस्ताव है, जो शहरीकरण की प्रक्रिया को नई दिशा प्रदान करेगा।
दूसरे दिन की महत्वपूर्ण उपलब्धियां
सत्र के दूसरे दिन यानी मंगलवार को सदन में कई महत्वपूर्ण कार्य संपन्न हुए। सबसे बड़ी उपलब्धि 'बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक, 2026' का सर्वसम्मति से पारित होना रहा। इस विधेयक के कानून बनने के बाद अब राज्य में ऑनलाइन, डिजिटल माध्यमों, मोबाइल ऐप और कंप्यूटर के जरिए खेले जाने वाले किसी भी प्रकार के जुए पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अलावा, अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों का मुद्दा भी सदन में उठा था। इस पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए शिक्षा विभाग को स्पष्ट निर्देश जारी किए कि अगले एक महीने के भीतर सभी खाली पदों को भरा जाए। साथ ही, वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी नियमित मॉनिटरिंग करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है ताकि भर्ती प्रक्रिया में कोई विलंब न हो।
Comments
0 comment