बिहार में स्कूलों के रंग पर सियासत, शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा- मां सरस्वती का रंग है भगवा बिहार एक महीने पहले 45
बिहार के मॉडल स्कूलों के भगवा रंग और उनके नाम को लेकर छिड़े विवाद के बीच शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बयान देकर हलचल मचा दी है। उन्होंने इन बदलावों को भारतीय संस्कृति का प्रतीक बताते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया है।

स्कूली इमारतों के रंग पर गरमाई राजनीति

बिहार में शिक्षा विभाग एक बार फिर बड़े विवाद के केंद्र में है। राज्य के सरकारी मॉडल स्कूलों की रंगत बदलने और उन्हें एक विशेष पहचान देने की सरकारी कवायद पर विपक्ष हमलावर है। हाल ही में बिहार सरकार ने राज्य के अलग-अलग प्रखंडों में 551 मॉडल स्कूल शुरू किए हैं, जिन्हें 'सरस्वती विद्या निकेतन' के रूप में जाना जा रहा है। इन भवनों के रंग और नाम पर छिड़ी बहस के बीच शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि 'मां सरस्वती का रंग भगवा है', इसलिए स्कूलों का रंग ऐसा रखा गया है।

शिक्षा मंत्री का तर्क और संस्कृति का हवाला

शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस पूरे मामले को भारतीय संस्कृति से जोड़ते हुए अपने फैसले का बचाव किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भगवा रंग को किसी भी राजनीतिक दल के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। मंत्री के अनुसार, यह रंग ज्ञान, त्याग और हमारी आध्यात्मिक परंपरा का गौरवशाली प्रतीक है। उनका मानना है कि चूंकि शिक्षा की देवी मां सरस्वती हैं और उनका रंग भगवा है, इसलिए स्कूलों के इस स्वरूप को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विरोधी दल बिना किसी ठोस आधार के इसे राजनीति से प्रेरित बता रहे हैं, जबकि सरकार का एकमात्र लक्ष्य शिक्षा प्रणाली को अधिक आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाना है।

विपक्ष का कड़ा रुख और आरोप

राज्य के विपक्षी दलों, विशेषकर आरजेडी और कांग्रेस ने सरकार पर शिक्षा के भगवाकरण का गंभीर आरोप लगाया है। विपक्ष का तर्क है कि सरकार सरकारी खजाने और जनता के पैसे का इस्तेमाल करके अपनी वैचारिक एजेंडे को बढ़ावा दे रही है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि स्कूलों के नाम बदलने और भवनों को एक खास रंग में रंगने का मकसद समाज में विभेद पैदा करना और शिक्षा व्यवस्था को वैचारिक रंग देना है। विपक्ष इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताते हुए सरकार पर राज्य की शैक्षणिक पहचान के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप लगा रहा है।

सरकार का पक्ष और विजन

विवाद के बीच सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि इन मॉडल स्कूलों का उद्देश्य किसी विचारधारा का प्रचार करना नहीं, बल्कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुहैया कराना है। शिक्षा मंत्री पहले भी कई मौकों पर स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार बिहार की शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस मामले में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बीते 19 जुलाई को इन 551 मॉडल स्कूलों का औपचारिक उद्घाटन किया था। उस दौरान उन्होंने जोर देकर कहा था कि एक विकसित बिहार के निर्माण के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। सरकार के मुताबिक, यह पूरी प्रक्रिया केवल शैक्षणिक सुधार और सांस्कृतिक मजबूती का हिस्सा है, जिसका किसी भी राजनीतिक एजेंडे से कोई सीधा संबंध नहीं है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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