बिहार
2 घंटे पहले
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विचारों
बांकीपुर में हार के बाद आरजेडी के भीतर उबाल
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने बिहार की राजनीति का पारा चढ़ा दिया है। आरजेडी के लिए इस चुनाव के परिणाम बेहद निराशाजनक रहे हैं, जिसके बाद पार्टी के अंदर ही असंतोष के स्वर मुखर होने लगे हैं। आरजेडी के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र ने सीधे तौर पर पार्टी की कार्यप्रणाली और तेजस्वी यादव के इर्द-गिर्द रहने वाले नेताओं पर निशाना साधा है। उन्होंने साफ लहजे में कहा है कि पार्टी में संगठन स्तर पर बड़े बदलाव की सख्त आवश्यकता है।
ऐसे लोगों को गाड़ी में नहीं बिठाना चाहिए
भाई वीरेंद्र ने बिना किसी का नाम लिए तेजस्वी यादव के साथ रहने वाले कुछ चुनिंदा चेहरों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पार्टी की खराब छवि के लिए इन नेताओं को जिम्मेदार ठहराया है। भाई वीरेंद्र ने कहा कि जब कुछ विवादित या अलोकप्रिय चेहरे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ दिखाई देते हैं, तो इससे कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच गलत संदेश जाता है। उन्होंने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसे चेहरों को न तो नेता के आसपास रखना चाहिए और न ही उन्हें गाड़ी में अपने साथ बिठाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं, उन्हें बड़ी जिम्मेदारियों से तत्काल हटाया जाना चाहिए।
तेजस्वी यादव का दावा- यह बीजेपी की हार
दूसरी तरफ, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बांकीपुर के परिणामों पर अपनी अलग प्रतिक्रिया दी है। तेजस्वी ने इसे आरजेडी की हार मानने से इनकार करते हुए इसे सीधे तौर पर बीजेपी की विफलता करार दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि बांकीपुर लंबे समय से बीजेपी का गढ़ रहा है, इसलिए वहां का परिणाम सरकार के प्रति जनता के गुस्से को दर्शाता है। तेजस्वी ने कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद से बीजेपी ने पिछले 100-150 दिनों के भीतर दो बड़े चुनाव गंवा दिए हैं। उन्होंने एमएलसी चुनाव और बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का हवाला देते हुए दावा किया कि जनता का भरोसा अब बीजेपी सरकार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से पूरी तरह उठ चुका है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पार्टी हार के कारणों की समीक्षा करेगी और इस पर संगठनात्मक स्तर पर मंथन किया जाएगा।
आरजेडी के लिए आत्ममंथन का दौर
बांकीपुर में आरजेडी का प्रदर्शन इतना कमजोर रहा कि पार्टी अपना जमानत तक नहीं बचा सकी। इस परिणाम ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है कि क्या आरजेडी अपनी पुरानी जमीन खो रही है। जानकारों का मानना है कि खासकर जन सुराज जैसी नई राजनीतिक ताकतों के उदय के बीच आरजेडी के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का बड़ा विषय है। पार्टी का संगठन जिस तरह से काम कर रहा है, उस पर अब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी भरोसा नहीं रह गया है।
संगठन में बड़े बदलाव की आहट
यह पहली बार नहीं है जब आरजेडी के भीतर शीर्ष नेतृत्व के करीबियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इससे पहले भी कई मौकों पर पार्टी के भीतर रणनीति और संगठनात्मक ढिलाई को लेकर अप्रत्यक्ष नाराजगी सामने आती रही है। लेकिन बांकीपुर की हार ने इन असंतुष्ट आवाजों को और भी मजबूती दे दी है। भाई वीरेंद्र जैसे वरिष्ठ नेताओं के इस बयान के बाद अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में पार्टी के ढांचे में बड़े फेरबदल देखने को मिल सकते हैं। क्या तेजस्वी यादव अपने करीबियों को लेकर कोई ठोस कदम उठाएंगे या यह विवाद पार्टी को और कमजोर करेगा, यह देखना बाकी है।
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