बिहार
2 घंटे पहले
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बेऊर जेल प्रशासन पर गिरी गाज
बिहार की राजधानी पटना स्थित केंद्रीय आदर्श कारा बेऊर में चल रहे कथित संगठित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामले में राज्य सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई को अंजाम दिया है। जेल के भीतर भ्रष्टाचार की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद सरकार ने जेल अधीक्षक नीरज कुमार झा समेत कुल सात अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। सरकार ने इस कदम के जरिए स्पष्ट संकेत दिया है कि जेलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
निलंबित किए गए अधिकारियों में जेल के शीर्ष नेतृत्व से लेकर अन्य स्तरों के कर्मचारी शामिल हैं। कार्रवाई की जद में आए अधिकारियों के नाम इस प्रकार हैं:
- नीरज कुमार झा, जेल अधीक्षक
- शालिनी, सहायक अधीक्षक
- कुंदन कुमारी, सहायक अधीक्षक
- मनीष कुमार ठाकुर, सहायक अधीक्षक
- अभिषेक कुमार, सहायक अधीक्षक
- अजय कुमार, उपाधीक्षक
- संजीव कुमार ठाकुर, उच्च कक्षपाल
रिपोर्ट्स के अनुसार, उच्च कक्षपाल संजीव कुमार ठाकुर पर आरोप है कि उन्होंने जेल अधीक्षक के साथ मिलकर जेल के भीतर एक भ्रष्टाचार का नेटवर्क चलाने में अहम भूमिका निभाई थी।
नई टीम की तैनाती
भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद जेल की व्यवस्था को सुचारु बनाने और प्रशासन में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने तुरंत प्रभाव से नई टीम नियुक्त कर दी है। नई नियुक्तियों में सुधीर कुमार शर्मा को कटिहार से स्थानांतरित करके केंद्रीय आदर्श कारा बेऊर का उपाधीक्षक बनाया गया है। इसके अलावा, ज्योति कुमारी, राजीव रंजन और प्रियत्तम प्रियदर्शी को सहायक कारा अधीक्षक के पद पर जिम्मेदारी सौंपी गई है।
जांच का दायरा बढ़ सकता है
इस पूरे मामले ने तब तूल पकड़ा जब मीडिया में जेल के भीतर चल रही गतिविधियों को प्रमुखता से उजागर किया गया। सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन संज्ञान लिया। विभागीय जांच अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि जेल में भ्रष्टाचार का जाल कितना गहरा था। यदि जांच में लगाए गए सभी आरोप प्रमाणित होते हैं, तो इन निलंबित अधिकारियों के खिलाफ आगे और भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल, पूरी जेल व्यवस्था को नए सिरे से संचालित करने की कवायद शुरू हो गई है।
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