10 साल पुरानी साइकिल बन गई फूड कार्ट: दिन में स्कूल और शाम को कमाई, 16 साल के सौरव की प्रेरक कहानी बिहार 3 महीने पहले 43
पटना के 16 वर्षीय सौरव ने घर में बेकार पड़ी 10 साल पुरानी साइकिल को फूड कार्ट में बदलकर बटाटा पूरी, दही वड़ा और आलू चाट बेचना शुरू किया। सुबह स्कूल और शाम को स्टॉल लगाकर वह परिवार का सहारा बन रहे हैं।

यह कहानी पटना के एक ऐसे जुझारू किशोर की है, जिसने बेहद कम उम्र में ही घर की जिम्मेदारियों को अपने कंधों पर उठा लिया। पिता का कारोबार ठप पड़ जाने के बाद जब परिवार आर्थिक संकट से जूझने लगा, तो 16 वर्षीय सौरव ने हाथ पर हाथ धरकर बैठने के बजाय कुछ अलग करने की ठानी। उसने घर में बेकार पड़ी 10 साल पुरानी साइकिल को ही फूड कार्ट का रूप दे दिया और बटाटा पूरी, दही वड़ा तथा आलू चाट बेचने निकल पड़ा।

दिन में पढ़ाई और शाम को मेहनत करके कमाई करने वाला यह छात्र आज अपने परिवार का सहारा बन गया है। वह रोज शाम चार घंटे गर्दनीबाग में अपना अनोखा साइकिल वाला फूड कार्ट लगाता है और लोगों को स्वादिष्ट व्यंजन बनाकर खिलाता है।

30 रुपये में फुल, 20 रुपये में हाफ प्लेट

गर्दनीबाग के कच्ची तालाब स्थित दुर्गा मंदिर के ठीक सामने सौरव रोज शाम अपना स्टॉल सजाते हैं। यहां बटाटा पूरी, दही वड़ा और आलू चाट जैसे चटपटे व्यंजन मिलते हैं। फुल प्लेट की कीमत 30 रुपये और हाफ प्लेट की कीमत 20 रुपये रखी गई है। यह काम सौरव ने करीब एक महीने पहले शुरू किया था।

दिनभर उनकी मां सारी खाने की चीजें तैयार करती हैं और स्कूल से लौटने के बाद सौरव पूरा सामान अपनी साइकिल पर लादकर ग्राहकों को परोसने और कमाई करने निकल जाते हैं।

साइकिल को ही बना दिया फूड कार्ट

आमतौर पर लोग फूड कार्ट बनवाने में हजारों रुपये खर्च कर देते हैं, मगर सौरव ने बहुत कम लागत में इसे घर पर ही तैयार कर लिया। उनके पिता विज्ञापन का काम करते हैं, इसलिए घर में काफी मात्रा में सनबोर्ड पड़ा रहता था। सौरव ने उन्हीं सनबोर्ड की मदद से अपनी साइकिल की पिछली सीट को इस अंदाज में डिजाइन किया कि वह एक छोटे फूड कार्ट में तब्दील हो गई।

इसमें बटाटा पूरी, दही वड़ा और आलू चाट बनाने के लिए जरूरी सभी सामग्री, जैसे उबले आलू, दही, मसाले, प्याज और दूसरी चीजें अलग-अलग ढंग से करीने से सजाकर रखी जाती हैं।

दस साल पुरानी साइकिल बनी कमाई का जरिया

दिलचस्प बात यह है कि यह साइकिल भी नई नहीं है। करीब 10 साल पुरानी यह साइकिल घर के एक कोने में बेकार पड़ी हुई थी। सौरव ने अपनी मेहनत और रचनात्मक सोच के दम पर उसी पुरानी साइकिल को आमदनी का साधन बना लिया, और इसमें उनके पिता ने भी पूरा सहयोग किया।

आज उनका यह निराला फूड कार्ट आसपास के लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग उनकी मेहनत और जुगाड़ की खुलकर सराहना करते हैं।

दिन में पढ़ाई और शाम को कमाई, आखिर क्यों?

सौरव की उम्र अभी सिर्फ 16 वर्ष है। इतनी कम उम्र में सड़क किनारे घंटों खड़े होकर सामान बेचने की वजह बताते हुए वह कहते हैं कि उनके पिता का विज्ञापन का काम पिछले कुछ समय से लगभग ठप पड़ गया है, जिससे घर का खर्च चलाना मुश्किल होने लगा था।

सौरव कहते हैं कि घर की परेशानी मुझसे देखी नहीं गई, इसलिए मैंने भी पिता का हाथ बंटाने का फैसला किया। जब मैंने उनसे फूड स्टॉल लगाने की बात कही तो पहले उन्होंने मना कर दिया, लेकिन बाद में यह कहकर मान गए कि समय बर्बाद करने से अच्छा है कि कुछ काम किया जाए। इतना ही नहीं, उन्होंने फूड कार्ट तैयार करने में भी मेरी मदद की।

सुबह स्कूल, शाम को स्टॉल

सौरव के मुताबिक, उनकी मां रोज दिन में सारी जरूरी सामग्री बनाकर रख देती हैं। स्कूल से लौटने के बाद वह पूरा सामान अपनी साइकिल पर लादकर स्टॉल लगाने पहुंच जाते हैं। वह सुबह 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक स्कूल में पढ़ाई करते हैं, जबकि शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक ग्राहकों को बटाटा पूरी, दही वड़ा और आलू चाट खिलाते हैं।

पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारी निभाने की उनकी यह मेहनत लोगों को गहराई से प्रभावित कर रही है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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