केरल PSC भर्ती घोटाला: कोचिंग सेंटरों से सांठगांठ और धांधली के बीच 3 नई परीक्षाएं जांच के दायरे में, राष्ट्रपति तक पहुंचा मामला राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 3
केरल लोक सेवा आयोग में प्रश्न पत्र लीक, कोचिंग संस्थानों से मिलीभगत और अयोग्य उम्मीदवारों की भर्ती के खुलासे के बाद अब 3 नई भर्ती परीक्षाओं पर आपराधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं। पूर्व राज्यपाल ने आयोग के अध्यक्ष और 15 सदस्यों को हटाने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को सिफारिश पत्र भेजा है।

भर्ती धांधली में क्राइम ब्रांच का बड़ा कदम

केरल लोक सेवा आयोग (PSC) में सरकारी नौकरियों के आवंटन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े घोटाले का रूप ले चुका है। कोचिंग संस्थानों के माध्यम से प्रश्न पत्र सेट कराने, एक ही संस्थान के चहेते उम्मीदवारों को मेरिट सूची में शीर्ष स्थान देने और अधिकारियों के परिजनों को बिना आवश्यक योग्यता के नौकरियां बांटने के गंभीर मामलों के बाद अब जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। क्राइम ब्रांच अब तीन और नई भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों को लेकर आपराधिक मुकदमे दर्ज करने की तैयारी में जुट गई है। इन नए मामलों के सामने आने के बाद आयोग की साख पर सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि पूरी प्रक्रिया में प्रश्न पत्रों की गोपनीयता, अंक सूची और नियुक्तियों के स्तर पर व्यापक अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।

इन तीन नई भर्ती परीक्षाओं पर दर्ज होंगे आपराधिक मुकदमे

मामले की गहराई से पड़ताल कर रही क्राइम ब्रांच जिन तीन नई भर्तियों को जांच के घेरे में ले रही है, उनमें कई तरह की गंभीर तकनीकी और प्रक्रियात्मक खामियां पाई गई हैं:

  • असिस्टेंट मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर भर्ती: प्रारंभिक पड़ताल में यह बात सामने आई है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले एक प्रमुख कोचिंग सेंटर द्वारा तैयार किए गए प्रश्नों को सीधे पीएससी के आधिकारिक प्रश्न पत्र में शामिल कर लिया गया था। जांच एजेंसियां इस बात की छानबीन कर रही हैं कि निजी कोचिंग संस्थान के सवाल परीक्षा पत्र तक कैसे पहुंचे और क्या इससे विशेष अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
  • फिशरीज एक्सटेंशन ऑफिसर भर्ती: इस भर्ती प्रक्रिया की जारी रैंक लिस्ट में टॉप 100 में जगह बनाने वाले सभी उम्मीदवार 'केरल यूनिवर्सिटी ऑफ फिशरीज एंड ओशन स्टडीज' के छात्र थे। अन्य प्रतियोगी छात्रों का आरोप है कि उसी विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों ने परीक्षा का प्रश्न पत्र तैयार किया था और वे ही इंटरव्यू बोर्ड में भी शामिल थे, जिससे हितों के टकराव की स्थिति पैदा हुई। इसके साथ ही इस भर्ती में SFI कार्यकर्ताओं और छात्र संघ के नेताओं को अनुचित फायदा पहुंचाने के भी आरोप लगे हैं।
  • विलेज ऑयल इंस्पेक्टर भर्ती: इस भर्ती प्रक्रिया में पीएससी के ही एक अधिकारी की पत्नी को पद पर नियुक्त कर दिया गया, जबकि उनके पास पद के लिए अनिवार्य योग्यताएं भी मौजूद नहीं थीं। इस खुलासे के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या संस्था के नियमों को चुनिंदा तरीके से लागू किया गया था।

पूर्व राज्यपाल की सिफारिश और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र

इस बड़े पैमाने पर हुई अनियमितता के उजागर होने के बाद संवैधानिक स्तर पर कड़े कदम उठाए गए हैं। केरल के पूर्व राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने पीएससी के अध्यक्ष और 15 सदस्यों को उनके पदों से तुरंत प्रभाव से हटाने की सिफारिश की है। 25 अक्टूबर को यह जानकारी सार्वजनिक हुई कि अर्लेकर ने राष्ट्रपति को इस पूरे मामले में सख्त कार्रवाई हेतु पत्र लिखा है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, 15 अक्टूबर को अपना पद छोड़ने से ठीक कुछ समय पहले अर्लेकर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को यह आधिकारिक सिफारिश भेजी थी। पूर्व राज्यपाल का यह कदम मुख्य रूप से पीएससी के अपने आंतरिक सतर्कता विभाग की जांच रिपोर्ट पर आधारित था, जिसमें परीक्षाओं के संचालन में भारी खामियों और गड़बड़ियों का स्पष्ट खुलासा हुआ था। आंतरिक सतर्कता रिपोर्ट में ठोस सबूत मिलने के बावजूद आयोग द्वारा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई उचित कार्रवाई न किया जाना ही पूर्व राज्यपाल के हस्तक्षेप की मुख्य वजह बना।

लोक भवन में जवाब-तलब और आयोग पर बढ़ता दबाव

संवैधानिक संस्था में जनता का भरोसा बहाल करने के उद्देश्य से पूर्व राज्यपाल ने पीएससी के अध्यक्ष और सचिव को लोक भवन तलब किया था। वहां उनसे परीक्षा संचालन और भर्ती प्रक्रियाओं में हुई चूक पर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया था। हालांकि, उनके द्वारा दिए गए जवाबों से पूर्व राज्यपाल असंतुष्ट रहे और उनका मानना था कि निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आयोग के शीर्ष स्तर पर कठोर कदम उठाया जाना बेहद जरूरी है।

यह मामला ऐसे समय में और ज्यादा तूल पकड़ रहा है जब केरल हाईकोर्ट भी परीक्षाओं में हुई धांधली की जांच को लेकर सख्त रुख अपना चुका है। उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद पीएससी पर पहले से ही बहुत दबाव था। हालांकि, राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की धीमी कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग तेज होती जा रही है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप