हरियाणा
एक घंटा पहले
5
विचारों
हरियाणा के पंचकूला स्थित सेक्टर-20 के सरकारी प्राथमिक स्कूल में गंभीर रूप से घायल हुई 6 साल की मासूम बच्ची के मामले में एक बेहद राहत भरी और सुखद खबर सामने आई है। कई दिनों तक पीजीआई चंडीगढ़ में डॉक्टरों की विशेष देखरेख में चले गहन इलाज के बाद मासूम बच्ची पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट आई है। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जब मासूम एंबुलेंस के जरिए पंचकूला स्थित अपने घर पहुंची, तो वहां का माहौल बेहद भावुक हो गया।
फूल-मालाओं से घर पर स्वागत और परिजनों का भावुक माहौल
मासूम बच्ची की सलामती और जल्द ठीक होने के लिए लगातार दुआएं कर रहे परिजनों, पड़ोसियों और स्थानीय लोगों ने उसके घर पहुंचते ही जोरदार स्वागत किया। बच्ची पर परिजनों और उपस्थित लोगों ने फूल बरसाए, उसे फूल-मालाएं पहनाईं और कई लोगों ने उसे उपहार व खिलौने भी दिए। इस दौरान बेटी की घर वापसी देखकर पिता और परिवार के अन्य सदस्य अपने आंसू नहीं रोक पाए और काफी भावुक नजर आए।
इलाज के बाद बेटी के सुरक्षित घर लौटने पर पिता ने जहां ईश्वर का शुक्रिया अदा किया, वहीं इस भयावह घटना से उपजे डर का भी जिक्र किया। पिता ने बताया कि बेटी के सही-सलामत घर वापस आने से उन्हें बेहद खुशी और राहत मिली है, लेकिन इस भयानक वारदात ने पूरे परिवार के मन में एक गहरा डर पैदा कर दिया है। वहीं मासूम बच्ची की मां ने बताया कि इस जानलेवा हमले के बाद से बच्ची के मन में गहरा खौफ बैठ गया है। वह रात में कई बार अचानक डरकर उठ जाती है, रोने लगती है और काफी घबरा जाती है।
29 अक्तूबर की वो दर्दनाक घटना: ईंट से हमला और बैंच पर पटकना
गौरतलब है कि यह दिल दहला देने वाली घटना 29 अक्तूबर को पंचकूला के सेक्टर-20 स्थित सरकारी स्कूल में घटी थी। स्कूल में ही तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले 8 साल के एक छात्र ने इस 6 वर्षीय मासूम बच्ची पर बर्बरतापूर्वक हमला कर दिया था। आरोपी छात्र ने मासूम के चेहरे पर ईंट से कई वार किए थे और इसके बाद उसे बार-बार क्लासरूम के बैंच पर पटका था।
इस बर्बर हमले में बच्ची के चेहरे और सिर पर गंभीर चोटें आई थीं। घटना की सीसीटीवी (CCTV) फुटेज भी सामने आई थी, जिसके बाद पूरे देश भर में लोगों ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया था। गंभीर हालत में बच्ची को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों की टीम ने लगातार उसकी निगरानी की। बच्ची की सेहत में सुधार आने के बाद अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ ने भी उसे भावुक होकर विदाई दी, जिसके बाद एंबुलेंस से उसे पंचकूला स्थित उसके घर पहुंचाया गया।
आरोपी छात्र की मेंटल मैपिंग रिपोर्ट: मानसिक स्थिति ठीक नहीं
मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपी छात्र की मेंटल मैपिंग टेस्ट रिपोर्ट अब पुलिस को सौंप दी गई है। पुलिस इस जांच रिपोर्ट को बुधवार को जुवेनाइल जस्टिस (JJ) बोर्ड के समक्ष पेश करेगी। इसके साथ ही आरोपी बच्चे को भी बोर्ड के सामने लाया जाएगा। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड इस रिपोर्ट के आधार पर ही यह फैसला करेगा कि बच्चे को उसके माता-पिता के साथ घर भेजना सुरक्षित रहेगा या फिर उसे जुवेनाइल होम में ही रखा जाना चाहिए।
आपको बता दें कि सोमवार को GMCH-32 अस्पताल में 3 डॉक्टरों के पैनल ने आरोपी बच्चे का मानसिक और व्यावहारिक परीक्षण किया था। इस जांच में डॉक्टरों ने बच्चे की समझ, तर्क करने की क्षमता, उसके व्यवहार और मानसिक स्थिति का बारीक आकलन किया। पुलिस को सौंपी गई रिपोर्ट में स्पष्ट बताया गया है कि बच्चे की मानसिक हालत ठीक नहीं है।
प्रिंसिपल और दो टीचर सस्पेंड, स्कूल प्रबंधन पर केस दर्ज
इस पूरी घटना के बाद पीड़ित परिवार जांच कमेटी की रिपोर्ट और स्कूल प्रशासन पर होने वाली सख्त कार्रवाई पर नजर बनाए हुए है। मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभाग ने स्कूल की प्रिंसिपल और 2 शिक्षिकाओं को निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है।
मामले की विस्तृत जांच के लिए 5 सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया गया है, जो स्कूल के माहौल और घटना के कारणों की जांच कर रही है। इसके साथ ही बच्चों की सुरक्षा में भारी लापरवाही बरतने के लिए स्कूल प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।
हरियाणा महिला आयोग की चिंता: सोशल मीडिया और हिंसक गेमिंग का असर
पंचकूला के स्कूल में हुई इस दर्दनाक घटना पर हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन उषा प्रियदर्शनी ने भी गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह घटना सिर्फ एक स्कूल या परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए बेहद गंभीरता से सोचने और विचार करने का विषय है।
उषा प्रियदर्शनी ने बच्चों के व्यवहार में आ रही आक्रामकता पर जोर देते हुए निम्नलिखित बातें कही:
- पारिवारिक माहौल की जांच: बच्चा जैसा देखता है वैसा ही सीखता है। ऐसे में यह जांचना बेहद जरूरी है कि बच्चे के पारिवारिक माहौल में कोई तनाव या समस्या तो नहीं है अथवा माता-पिता के व्यवहार का उस पर कोई गलत असर तो नहीं पड़ रहा।
- सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेम्स का कुप्रभाव: आजकल सोशल मीडिया पर कई तरह की अनुचित व हिंसक सामग्री आसानी से उपलब्ध है। बच्चे ऐसी सामग्री देखते हैं और ऑनलाइन गेमिंग में भी कई बार अत्यधिक क्रूरता दिखाई जाती है, जो बच्चों के मानसिक व्यवहार को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
- काउंसलिंग और नैतिक शिक्षा: उन्होंने सभी स्कूलों में बच्चों की नियमित काउंसलिंग कराने और नैतिक शिक्षा (मोरल एजुकेशन) पर विशेष जोर देने की बात कही।
Comments
0 comment