मगरमच्छों के बीच जान की बाजी, 35 वर्षों से डूबते लोगों के लिए मसीहा बने हरिभाई राजस्थान एक महीने पहले 44
पाली जिले के जवाई बांध और आसपास के जलस्रोतों में हादसों के समय सबसे पहले हरिभाई को याद किया जाता है, जो 35 साल से अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की जान बचा रहे हैं और शवों को बाहर निकाल रहे हैं।

राजस्थान के पाली जिले में जवाई बांध और उसके आसपास फैले जलस्रोतों में जब भी कोई हादसा पेश आता है, लोगों के जेहन में सबसे पहला नाम हरिभाई का ही उभरता है। बीते 35 वर्षों से वे अपनी जान को खतरे में डालकर डूबते लोगों को बचाने और पानी में समा चुके शवों को बाहर निकालकर उनके परिजनों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।

मगरमच्छों से भरे पानी में निहत्थे संघर्ष

जिन जलस्रोतों में मगरमच्छों का बसेरा है, उन्हीं में हरिभाई बिना लाइफ जैकेट और बिना किसी आधुनिक उपकरण के उतर जाते हैं। मौत से आमने-सामने का यह मुकाबला वे किसी सुरक्षा साधन के सहारे नहीं, बल्कि अपने साहस और अनुभव के बल पर करते हैं।

साथी प्रकाश हरिजन के साथ सैकड़ों को राहत

हरिभाई और उनके साथी प्रकाश हरिजन ने मिलकर अब तक सैकड़ों शवों को पानी से बाहर निकाला है और दर्जनों लोगों की जान बचाई है। हर मुश्किल हालात में यह जोड़ी बिना किसी झिझक के आगे बढ़कर मोर्चा संभालती है।

प्रशासन की मदद, मगर सम्मान और संसाधनों का इंतजार

किसी भी आपदा के समय प्रशासन और पुलिस भी इन दोनों की मदद लेने में पीछे नहीं रहती। इसके बावजूद आज भी हरिभाई और उनके साथी को न तो पर्याप्त संसाधन मिल पाए हैं और न ही वह सम्मान, जिसके वे हकदार हैं। बरसों की निस्वार्थ सेवा के बाद भी वे आज इसी प्रतीक्षा में हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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