पलामू में खेल प्रेमियों के लिए बड़ी खबर, आर्चरी की फ्री ट्रेनिंग का मिलेगा मौका झारखंड एक महीने पहले 49
पलामू जिला तीरंदाजी संघ अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस के अवसर पर युवाओं के लिए चार दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर रहा है।

पलामू में शुरू होगा आर्चरी प्रशिक्षण

पलामू के युवा खिलाड़ियों के लिए अपने हुनर को निखारने का एक शानदार मौका सामने आया है। पलामू जिला तीरंदाजी संघ ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष फ्री बेसिक आर्चरी ट्रेनिंग कैंप का आयोजन करने का निर्णय लिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य जिले के बच्चों और युवाओं को तीरंदाजी जैसे महत्वपूर्ण ओलंपिक खेल के प्रति जागरूक करना और नई प्रतिभाओं को तराशना है।

प्रशिक्षण शिविर की तारीख और समय

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 23 जून 2026 से 26 जून 2026 तक चलेगा। चार दिनों तक चलने वाले इस कैंप में प्रतिभागी हर दिन शाम 4 बजे से 6 बजे तक तीरंदाजी का प्रशिक्षण ले सकेंगे।

क्या कुछ सीखेंगे खिलाड़ी

संघ के पदाधिकारी सुमित वर्मन ने जानकारी दी कि इस प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को खेल से जुड़ी बुनियादी बारीकियां सिखाई जाएंगी। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • तीरंदाजी की प्रारंभिक तकनीकें।
  • खेल में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूरी जानकारी।
  • लक्ष्य साधने की कला और निशानेबाजी का अभ्यास।
  • सुरक्षा के जरूरी नियम और खेल के मूल सिद्धांत।
  • बो (धनुष) तैयार करना और एरो (तीर) फिट करने का तरीका।

पूरी तरह से निःशुल्क है यह पहल

इस कैंप की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह से निःशुल्क है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी इस खेल का हिस्सा बन सकें और अपनी प्रतिभा दिखा सकें। सुमित वर्मन का मानना है कि पलामू में खेल प्रतिभा की कमी नहीं है, बस उन्हें सही मंच और मार्गदर्शन की जरूरत है। यह प्रशिक्षण न केवल उन्हें तीरंदाजी से परिचित कराएगा, बल्कि उनमें अनुशासन, एकाग्रता और आत्मविश्वास का संचार भी करेगा।

संघ ने जिले के सभी इच्छुक छात्र-छात्राओं और खेल प्रेमियों को इस शिविर में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। साथ ही अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे अपने बच्चों को इस अवसर का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करें।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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