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2 घंटे पहले
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पाकिस्तान की शर्मनाक करतूत
अपनी आदतों के अनुसार पाकिस्तान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी नकारात्मक मानसिकता का परिचय दिया है। किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO की बैठक संपन्न होने के बाद, पाकिस्तान ने एक अत्यंत बचकानी और शर्मनाक हरकत की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक तस्वीर साझा की, जिसके साथ छेड़छाड़ की गई थी। इस संपादित तस्वीर से भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हटा दिया गया। यह तस्वीर संगठन के सभी राष्ट्राध्यक्षों की एक सामूहिक फोटो थी, जिसमें से भारत के प्रधानमंत्री को नदारद देखकर दुनिया भर में पाकिस्तान की आलोचना हो रही है।
तस्वीरों का अंतर और कूटनीतिक मर्यादा
अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलनों में यह एक स्थापित परंपरा रही है कि बैठक के समापन पर सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष एक साथ फोटो खिंचवाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं अपने आधिकारिक एक्स हैंडल से वह संपूर्ण तस्वीर साझा की थी, जिसमें सभी नेता मौजूद थे। इसके विपरीत, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने तस्वीर को एडिट किया और प्रधानमंत्री मोदी के हिस्से को हटाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। यह घटनाक्रम पाकिस्तान की कूटनीतिक अपरिपक्वता को दर्शाता है।
आतंकवाद पर प्रधानमंत्री मोदी का कड़ा प्रहार
इस बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मौजूदगी में आतंकवाद के मुद्दे पर बेहद सख्त रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि SCO के देशों को आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को समाप्त करने के लिए मिलकर कार्य करना होगा। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है और आतंकवाद से निपटने के मामलों में दोहरा मानदंड अपनाना अब नहीं चलेगा। उनके संदेश में आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता का भाव स्पष्ट था।
वैश्विक संघर्ष और संप्रभुता का मुद्दा
आतंकवाद के अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने रूस-यूक्रेन युद्ध का उल्लेख करते हुए कूटनीतिक समाधान का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि युद्ध के मैदान में किसी भी समस्या का समाधान संभव नहीं है, बल्कि दुनिया को संवाद और कूटनीति के मार्ग पर चलना चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने कनेक्टिविटी परियोजनाओं में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की बात कही। कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, प्रधानमंत्री का यह बयान चीन की विवादास्पद बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना पर एक परोक्ष कटाक्ष माना जा रहा है।
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