PoJK में पाकिस्तानी दमन चरम पर, प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और फायरिंग, 120 मौतों का दावा विश्व 16 घंटे पहले 6
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में अधिकार और प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 120 से ज्यादा लोगों के मारे जाने का दावा किया जा रहा है, जबकि 300 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में हालात इस समय बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। पाकिस्तानी मीडिया भले ही इस मसले पर खामोश हो, लेकिन यहां पुलिस आम लोगों पर लाठियां बरसा रही है और गोलियां भी चल रही हैं। दावा किया जा रहा है कि अब तक 110 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 300 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं।

रावलाकोट में फायरिंग, बढ़ सकता है मृतकों का आंकड़ा

रावलाकोट में सोमवार को हुई गोलीबारी की घटना में 110 से ज्यादा नागरिकों की मौत होने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि करीब 300 लोग गंभीर रूप से जख्मी हैं, जिसके चलते मरने वालों की संख्या आगे और बढ़ सकती है। उधर कोटली में प्रदर्शनकारियों पर हुए लाठीचार्ज में 11 नागरिकों के मारे जाने की खबर है।

जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) के समर्थक रावलाकोट की मस्जिदों से लगातार ऐलान कर रहे हैं कि ‘कश्मीर’ पर विदेशी ताकतों ने हमला किया है और लोगों से बड़ी तादाद में घरों से बाहर निकलकर इसका मुकाबला करने की अपील की जा रही है।

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार रावलाकोट में सोमवार को हुए बवाल के दौरान तीन पुलिसकर्मियों को पंजाब रेंजर्स ने कथित तौर पर गोली मार दी, जिनमें एक सब-इंस्पेक्टर भी शामिल बताया जा रहा है। दावा है कि इन पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर हो रही फायरिंग को रोकने की कोशिश की थी।

आखिर PoK में क्यों भड़का जन आक्रोश?

दरअसल पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में जुलाई के महीने में चुनाव होने वाले हैं। इससे पहले यहां यह मांग जोर पकड़ रही है कि इस क्षेत्र को उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए। यह इलाका लंबे अरसे से बुनियादी सुविधाओं और राजनीतिक भागीदारी के लिए संघर्ष करता आ रहा है।

जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी इस बार अपनी मांगें रख रही है। संगठन की प्रमुख मांगों में उन 12 आरक्षित सीटों को खत्म करना शामिल है, जो जम्मू-कश्मीर से विस्थापित होकर पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में रह रहे लोगों के लिए विधानसभा में तय की गई हैं। संगठन का कहना है कि इन सीटों की वजह से गैर-स्थानीय लोग पीओके की राजनीति को प्रभावित करते हैं और पाकिस्तान की बड़ी राजनीतिक पार्टियां क्षेत्र की सरकारों पर नियंत्रण कायम कर लेती हैं।

इसके साथ ही संगठन सस्ती बिजली, आर्थिक सुधारों और मुफ्त स्वास्थ्य सेवाओं की भी मांग कर रहा है, जो लंबे समय से इस इलाके के अहम मुद्दे रहे हैं। आरोप है कि खनिजों से भरपूर इस क्षेत्र को पाकिस्तान सरकार लगातार नजरअंदाज करती आई है।

इंटरनेट ठप, गोलियों और लाठियों का दौर

9 जून यानी आज ही के दिन जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी की ओर से लॉन्ग मार्च का आह्वान किया गया था। यही वजह है कि लोगों को एक जगह जमा होने से रोकने के लिए पूरे इलाके में इंटरनेट ब्लैकआउट कर दिया गया है। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए रेंजर्स की भारी तैनाती की गई थी।

बताया जा रहा है कि एक प्रदर्शनकारी के अंतिम संस्कार के दौरान पुलिस से टकराव होने पर सुरक्षाबलों ने पहले आम लोगों पर फायरिंग की और आज प्रदर्शनों के दौरान भी गोलीबारी तथा लाठीचार्ज की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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