PoK में जनाक्रोश: कौन हैं सरदार अमन खान, जिनकी एक पुकार पर सड़कों पर उतरे डेढ़ लाख कश्मीरी विश्व 2 घंटे पहले 2
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में महंगाई और बुनियादी सुविधाओं को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब बड़े जन विद्रोह में बदल गया है, जिसका नेतृत्व JAAC नेता सरदार अमन खान कर रहे हैं। सुरक्षाबलों की गोलीबारी में 32 से अधिक लोगों की जान जाने के बावजूद प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहा।

पाकिस्तान एक ओर खुद को शांति का पैरोकार बताता है, तो दूसरी ओर अपने ही नागरिकों पर गोलियां बरसा रहा है। जो लोग अपने अधिकारों की मांग को लेकर एकजुट होते हैं, उन्हें हुकूमत अपनी बात रखने तक की आजादी नहीं देती। मौजूदा हालात इस ओर इशारा कर रहे हैं कि यह क्षेत्र अब ज्यादा दिनों तक पाकिस्तान के कब्जे में नहीं रहने वाला।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जनांदोलन हर बीतते दिन के साथ और तीखा होता जा रहा है। फौज जितना दमन कर रही है, अवाम उतनी ही मजबूती से आगे बढ़ रही है। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाबलों की गोलीबारी में अब तक 32 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, फिर भी लोगों का हौसला कमजोर नहीं पड़ा है। बुधवार को डेढ़ लाख से ज्यादा प्रदर्शनकारियों ने रावलकोट की ओर कूच किया और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया।

कई शहरों में निकले बड़े मार्च

हजारों लोग हाथों में बैनर और झंडे थामे सड़कों पर उतर आए हैं। रावलकोट, बाग, हट्टियान बाला, कोटली, मीरपुर, सुधनोती, धीरकोट, डडयाल और मुजफ्फराबाद समेत कई शहरों में विशाल जुलूस निकाले जा रहे हैं। यह आंदोलन शुरू में आटे की बढ़ती कीमतों, बिजली के भारी-भरकम बिलों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के विरोध में शुरू हुआ था, लेकिन अब यह एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। पीओके के लोगों में इस्लामाबाद सरकार और पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान के प्रति गहरी नाराजगी साफ दिखाई दे रही है।

38 सूत्रीय मांगपत्र की तैयारी

प्रदर्शनकारियों की योजना है कि रावलकोट में जुटने के बाद वे मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ें। वहां वे प्रशासन के सामने 38 सूत्रीय मांगपत्र रखेंगे। इन मांगों में महंगाई पर लगाम, सस्ती बिजली, रोजगार के अवसर और बेहतर सरकारी सेवाएं जैसे मुद्दे शामिल हैं।

फौजी कहर के बावजूद नहीं झुके कश्मीरी

प्रशासन प्रदर्शनकारियों को मुजफ्फराबाद तक पहुंचने से रोकने की हरसंभव कोशिश कर रहा है। मुख्य राजमार्गों और संपर्क मार्गों को बंद कर दिया गया है। कई स्थानों पर बड़े पेड़ काटकर सड़कों पर गिरा दिए गए हैं ताकि प्रदर्शनकारियों के काफिले रुक जाएं। इसके बावजूद लोग पीछे हटने को तैयार नहीं हैं और वैकल्पिक रास्तों से आगे बढ़ रहे हैं।

लगातार बढ़ती भीड़ और जनता के आक्रोश ने प्रशासन की बेचैनी बढ़ा दी है। चप्पे-चप्पे पर रेंजर्स तैनात कर दिए गए हैं। कई वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें आम लोगों पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई जाती दिख रही हैं। अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार करीब 30 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।

कौन हैं सरदार अमन खान

सरदार अमन खान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के प्रमुख राजनीतिक कार्यकर्ता और संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के केंद्रीय नेताओं में से एक हैं। वे यहां के लोगों के अधिकारों के लिए चलाए जा रहे आंदोलनों का प्रमुख चेहरा रहे हैं। उन्होंने बढ़ते टैक्स, महंगाई, भारी बिजली बिलों और स्थानीय लोगों के साथ कथित भेदभाव के खिलाफ आवाज बुलंद की। JAAC के जरिए उन्होंने आम नागरिकों के नागरिक और आर्थिक अधिकारों की मांग उठाई।

करीब 30 साल के सरदार अमन खान को JAAC का उभरता हुआ युवा चेहरा माना जा रहा है। वे डिजिटल कैंपेन और सोशल मीडिया लाइव के माध्यम से युवाओं को आंदोलन से जोड़ते रहे हैं। मई 2025 में हुए बड़े प्रदर्शनों में उनकी अहम भूमिका रही थी। उन्होंने विधानसभा की 45 सीटों में से उन 12 आरक्षित सीटों को समाप्त करने की मांग की, जो 1947 के बाद बसे शरणार्थियों के लिए रखी गई हैं।

संगठन पर प्रतिबंध और इनाम की घोषणा

पीओके में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों और हड़तालों के बाद पाकिस्तान प्रशासन ने JAAC पर पाबंदी लगा दी। अपने भाषणों में सरदार अमन खान ने पाकिस्तान की सैन्य और प्रशासनिक नीतियों की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि अपने हक के लिए आवाज उठाने वाले आम नागरिकों को गलत तरीके से आतंकवादी करार दिया जा रहा है।

संगठन को आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद उसके कई नेताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई। सरदार अमन खान और अन्य नेताओं की गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किए गए। पाकिस्तान की ओर से सरदार अमन खान की गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना देने पर 1 करोड़ पाकिस्तानी रुपये (लगभग 1 करोड़ भारतीय रुपये) के इनाम की घोषणा की गई।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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