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एक घंटा पहले
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पाकिस्तान के कराची शहर में इस साल की शुरुआत में हुए दर्दनाक गुल प्लाजा अग्निकांड मामले में एक बड़ा और चौंकाने वाला कानूनी मोड़ आया है। इस भीषण हादसे की जांच कर रही पुलिस और सुरक्षा अधिकारियों ने अदालत में अपनी अंतिम रिपोर्ट और आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया है। इस चार्जशीट में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस ने इस विनाशकारी हादसे के लिए एक 11 साल के बच्चे को जिम्मेदार ठहराया है। अब उस मासूम बच्चे पर अदालत में मुकदमा चलाया जाएगा। गौरतलब है कि इस भयानक अग्निकांड में 72 निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी, जबकि पूरा शॉपिंग सेंटर जलकर मलबे में तब्दील हो गया था। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और अब इसमें कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है।
चार्जशीट में बड़ा खुलासा: 11 साल का हुज़ैफा भी आरोपी
जांच अधिकारी ने सरकारी वकील अब्दुल रज्जाक गुज्जर के माध्यम से शनिवार को संबंधित अदालत में इस मामले की चार्जशीट पेश की। इस चार्जशीट के अनुसार, इस भयावह हादसे में कुल 6 लोगों को मुख्य रूप से आरोपी बनाया गया है। इन आरोपियों में सबसे प्रमुख नाम 11 वर्षीय बच्चे हुज़ैफा का है। इसके अलावा हुज़ैफा के पिता नैमतुल्लाह और गुल प्लाजा प्रबंधन समिति के चार अन्य सदस्यों को भी इस मामले में सह-आरोपी बनाया गया है। नैमतुल्लाह इस शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में कृत्रिम फूलों (आर्टिफिशियल फ्लावर्स) की एक दुकान चलाते हैं। पुलिस की रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है कि वर्तमान में ये सभी छह आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं और इन्हें चार्जशीट में फरार दिखाया गया है।
माचिस की तीली से लगी थी आग: चश्मदीद की गवाही
इस पूरे मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए जांच दल ने कुल 42 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं, जिनकी सूची अदालत को सौंपी गई है। गवाहों की इस फेहरिस्त में सबसे अहम बयान 13 साल के एक बच्चे आर्यन का है, जिसने मजिस्ट्रेट के सामने अपनी गवाही दर्ज कराई है। आर्यन ने अपने बयान में कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं:
- आर्यन ने बताया कि 17 जनवरी को जब यह भीषण हादसा हुआ, उस समय वह अपने दोस्त हुज़ैफा की दुकान पर ही मौजूद था।
- हुज़ैफा दुकान के अंदर माचिस की तीलियों से खेल रहा था। इसी खेल-खेल में अचानक दुकान में रखे कृत्रिम फूलों और अन्य सामानों में आग लग गई, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया।
- दो अन्य चश्मदीदों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि आरोपी पिता नैमतुल्लाह अक्सर अपनी दुकान को इतने छोटे बच्चे के भरोसे छोड़कर चले जाते थे।
- पुलिस द्वारा की गई मोबाइल फोन के कॉल रिकॉर्ड और लोकेशन की जांच से भी यह साफ हो गया है कि हादसे के समय नैमतुल्लाह अपनी दुकान पर उपस्थित नहीं थे।
बिल्डिंग मैनेजमेंट की भारी लापरवाही आई सामने
पुलिस की इस चार्जशीट में केवल बच्चे की नादानी को ही हादसे की एकमात्र वजह नहीं माना गया है, बल्कि गुल प्लाजा के बिल्डिंग मैनेजमेंट की भी गंभीर और जानलेवा लापरवाहियों का पर्दाफाश किया गया है। जांच में निम्नलिखित खामियां पाई गईं:
- जब इमारत में आग लगी, तब वहां के निकास द्वार (एग्जिट गेट) या तो पूरी तरह से ब्लॉक थे या उन पर ताले लटके हुए थे, जिसके कारण लोग समय रहते बाहर नहीं भाग सके और दम घुटने व जलने से उनकी मौत हो गई।
- इमारत के भीतर आग बुझाने के लिए कोई भी आवश्यक उपकरण या चालू फायर हाइड्रेंट सिस्टम मौजूद नहीं था, जिससे आग पर शुरुआत में काबू पाया जा सकता।
- आग लगने के कारण जब बिजली कटी, तो आपातकालीन बैकअप लाइट की कोई व्यवस्था न होने की वजह से पूरी इमारत में गहरा अंधेरा छा गया, जिससे वहां मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई।
- मोबाइल कॉल रिकॉर्ड की जांच से पता चला है कि आग लगने के बाद भी मैनेजमेंट कमेटी के किसी भी सदस्य ने दमकल विभाग या किसी अन्य आपातकालीन राहत और बचाव दल को फोन करके इसकी सूचना देने की जहमत नहीं उठाई।
जुवेनाइल कोर्ट में होगी बच्चे की पेशी
इस हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 72 लोगों की दर्दनाक मौत के साथ-साथ 8 लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे। वहीं शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की कुल 1153 दुकानें जलकर पूरी तरह खाक हो गई थीं, जिससे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। चूंकि मुख्य आरोपी हुज़ैफा की उम्र केवल 11 साल है और वह कानूनन नाबालिग है, इसलिए उस पर सामान्य अदालत में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। कानूनी प्रावधानों के तहत हुज़ैफा के खिलाफ जुवेनाइल कोर्ट में मामला चलाया जाएगा। वहीं दूसरी ओर, इस मामले के अन्य वयस्क आरोपियों पर लापरवाही बरतने, आगजनी करने और गैर-इरादतन हत्या जैसी गंभीर धाराओं के तहत कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है।
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