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एक घंटा पहले
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रेयर अर्थ इंडस्ट्री में चीन की बादशाहत को झटका
पूरी दुनिया में रेयर अर्थ (दुर्लभ पृथ्वी खनिज) के सबसे बड़े उत्पादक और आपूर्तिकर्ता के रूप में खुद को स्थापित करने वाले चीन के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। भले ही वैश्विक स्तर पर रेयर अर्थ खनिजों के खनन और उनकी प्रोसेसिंग पर चीन का एकतरफा नियंत्रण दिखाई देता है, लेकिन इस रणनीतिक उद्योग में उसकी एक बहुत बड़ी ढांचागत कमजोरी उजागर हुई है। एक नए शोध के अनुसार, रेयर अर्थ से जुड़ी अत्याधुनिक और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी की असली चाबी आज भी चीन के पास नहीं, बल्कि अमेरिका और जापान जैसे देशों के पास सुरक्षित है।
हांगकांग के प्रमुख समाचार पत्र साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में प्रकाशित एक ताजा अध्ययन के मुताबिक, वैश्विक रेयर अर्थ सप्लाई चेन में भारी दबदबा होने के बावजूद चीन कुछ बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों की कोर टेक्नोलॉजी में महारत हासिल नहीं कर पाया है। इसका सीधा मतलब यह है कि कच्चा माल होने के बाद भी चीन उस स्तर की अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने में पीछे रह गया है, जिसकी आज दुनिया को सबसे ज्यादा जरूरत है।
आंकड़ों में चीन का दबदबा लेकिन तकनीक में पिछड़े कदम
अगर आंकड़ों की बात करें, तो दुनिया भर में उत्पादित होने वाले कुल रेयर अर्थ खनिजों का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा अकेले चीन से ही निकाला जाता है। इतना ही नहीं, जब इन खनिजों को इस्तेमाल के लायक बनाने यानी इनकी प्रोसेसिंग की बात आती है, तो वैश्विक स्तर पर लगभग 90 प्रतिशत प्रोसेसिंग का काम भी चीन में ही संपन्न होता है। इसी भारी हिस्सेदारी के बल पर ड्रैगन लंबे समय से पूरी दुनिया में अपनी ताकत दिखाता आया है और वैश्विक बाजार को अपने इशारों पर नचाने की कोशिश करता रहा है।
लेकिन इस नए अध्ययन ने चीन के इस गुब्बारे की हवा निकाल दी है। रिपोर्ट से यह साफ हुआ है कि रेयर अर्थ से बनने वाले उच्च-मूल्य वाले उत्पादों (हाई-वैल्यू प्रोडक्ट्स) के लिए आवश्यक एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और उनके महत्वपूर्ण पेटेंट बड़े पैमाने पर अभी भी अमेरिका और जापान के पास ही सुरक्षित हैं।
इन आधुनिक तकनीकों में क्यों जरूरी है रेयर अर्थ?
रेयर अर्थ खनिजों को आधुनिक युग का सोना भी कहा जाता है, क्योंकि इनके बिना भविष्य की तकनीकों की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इनका उपयोग केवल साधारण मोबाइल फोन या रोजमर्रा के इलेक्ट्रॉनिक्स तक ही सीमित नहीं है, बल्कि कई रणनीतिक और सैन्य उपकरणों में भी यह अनिवार्य भूमिका निभाते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
- आधुनिक फाइटर जेट और सैन्य उपकरण
- उन्नत रक्षा प्रणालियां और रडार
- पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक वाहन (EV)
- हाई-टेक स्मार्टफोन और सुपरकंप्यूटर
अपनी इसी रणनीतिक ताकत का इस्तेमाल करते हुए चीन ने पिछले कुछ वर्षों में कई रेयर अर्थ उत्पादों के निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। चीन के इस आक्रामक कदम के कारण भारत, जापान और यूरोपीय देशों की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई थी, जिससे दुनिया भर में हड़कंप मच गया था।
पेटेंट की जंग में जापान और अमेरिका काफी आगे
इस नए शोध पत्र में बहुत ही विस्तार से इस बात का विश्लेषण किया गया है कि आखिर चीन कहां मात खा रहा है। अध्ययन के मुताबिक, रेयर अर्थ से तैयार होने वाले परमानेंट मैग्नेट, कैटेलिस्ट, ल्यूमिनेसेंट और पॉलिशिंग मटेरियल जैसे उच्च-मूल्य वाले उपकरणों से जुड़े ज्यादातर महत्वपूर्ण और बुनियादी पेटेंट पर अमेरिका और जापान का अधिकार है।
विशेषज्ञों का कहना है कि:
- जापान वर्तमान समय में परमानेंट मैग्नेट (स्थायी चुंबक) तकनीक के मामले में पूरी दुनिया का नेतृत्व कर रहा है।
- अमेरिका कैटेलिस्ट, ल्यूमिनेसेंट और पॉलिशिंग सामग्री से जुड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीकों में अपनी मजबूत बढ़त बनाए हुए है।
- इसके विपरीत, चीन केवल कुछ ही सीमित और चुनिंदा क्षेत्रों में तकनीकी बढ़त हासिल करने में कामयाब हो पाया है।
चीन के सामने अब क्या है बड़ी चुनौती?
शोधकर्ताओं ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि हालांकि चीन हर साल बहुत बड़ी संख्या में नए पेटेंट दर्ज कराता है, लेकिन उनमें से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव छोड़ने वाले और वास्तविक व्यावसायिक उपयोग में आने वाले मजबूत पेटेंट की संख्या बेहद कम है। कागजी पेटेंट के मामले में आगे होने के बावजूद चीन व्यावहारिक और उच्च तकनीक के मामले में पश्चिमी देशों से पीछे है।
इस बड़ी कमजोरी को दूर करने के लिए शोधकर्ताओं ने चीन को कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं। उनके अनुसार, यदि चीन को इस क्षेत्र में अमेरिका और जापान के एकाधिकार को चुनौती देनी है, तो उसे निम्नलिखित कदम उठाने होंगे:
- वैज्ञानिक अनुसंधान और गहन रिसर्च कार्यों में भारी निवेश करना होगा।
- देश के बड़े उद्योगों और विश्वविद्यालयों (अकादमिक संस्थानों) के बीच आपसी तालमेल को और अधिक मजबूत करना होगा।
- हाई-टेक रेयर अर्थ तकनीकों के घरेलू विकास पर अपना ध्यान पूरी तरह केंद्रित करना होगा।
जब तक चीन इन सुधारों को जमीन पर नहीं उतारता, तब तक कच्चे माल का मालिक होने के बावजूद वह इस रणनीतिक रेयर अर्थ इंडस्ट्री की मुख्य चाबी से वंचित ही रहेगा और उसे अमेरिका तथा जापान की तकनीकी श्रेष्ठता के आगे झुकना ही पड़ेगा।
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