गधों के सहारे पूरी अर्थव्यवस्था! PoK और बलूचिस्तान के बाद अब इस्लामाबाद की सड़कों पर भी फूटा अवाम का गुस्सा विश्व एक घंटा पहले 2
कंगाली से जूझता पाकिस्तान चीन को गधों का मांस और खाल बेचने की जुगत में है, जबकि शहबाज सरकार ने 2026-27 के बजट में रक्षा मद को करीब 18% बढ़ाकर 3 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। इस फैसले के बाद इस्लामाबाद की सड़कों पर भूखी जनता का गुस्सा भड़क उठा है।

एक तरफ पाकिस्तान भुखमरी, कंगाली और बेलगाम महंगाई की मार झेल रहा है, तो दूसरी तरफ वहां की सरकार के फैसलों पर दुनिया भर में सवाल उठ रहे हैं। डूबती अर्थव्यवस्था को थामने के लिए चीन को गधों का मांस और खाल बेचने की योजना बनाने वाले इस मुल्क ने अपने ताजा बजट में आम जनता को राहत देने के बजाय फौज की झोली पैसों से भर दी है। शहबाज शरीफ सरकार ने साल 2026-27 के लिए रक्षा बजट में करीब 18 फीसदी की भारी बढ़ोतरी करते हुए इसे सीधे 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा दिया है। पहले से सुलगते देश में यह फैसला आग में घी डालने जैसा साबित हुआ है।

गधों के भरोसे टिकी पाकिस्तान की इकॉनमी

पीओके (POK) और बलूचिस्तान में महीनों से जारी बगावत की चिंगारी अब राजधानी इस्लामाबाद की सड़कों तक पहुंच गई है, जहां भूखी जनता का आक्रोश सरकार के खिलाफ हिंसक रूप ले चुका है। लोग पूछ रहे हैं कि जिस देश की अवाम पाई-पाई के लिए तरस रही हो, वहां की सरकार की प्राथमिकता हथियार कैसे हो सकते हैं।

हालत का अंदाजा इसी से लगाइए कि पाकिस्तान सरकार ने जो 'आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26' पेश किया, उसमें गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए 'गधों के मांस और खाल के निर्यात' को एक बड़ा जरिया बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में गधों की आबादी बढ़कर 62 लाख तक पहुंच चुकी है और अब चीन को गधे बेचकर आमदनी का इंतजाम किया जा रहा है।

सेना के हाथ में कितनी रकम?

इस कंगाली के बावजूद नेशनल असेंबली में वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने बजट का बड़ा हिस्सा रक्षा के नाम कर दिया। इस बार कुल रक्षा बजट 3 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये है, जो पिछले साल के 2.595 लाख करोड़ रुपये से 405 अरब रुपये ज्यादा है। यह पूरा रक्षा बजट देश के कुल बजट का लगभग 15% हिस्सा है। साफ है कि सरकार जनता का पेट काटकर अपनी फौज को पाल रही है।

अगर इस 3 लाख करोड़ रुपये के रक्षा बजट को टुकड़ों में बांटकर देखें, तो समझ आता है कि अवाम पर टैक्स का बोझ क्यों लादा जा रहा है। बजट दस्तावेजों के मुताबिक, इस रकम का सबसे बड़ा हिस्सा पाकिस्तान आर्मी की जेब में जाएगा।

  • पाकिस्तान आर्मी: सेना के लिए 1.284 लाख करोड़ रुपये तय किए गए हैं, जो पिछले साल 1.184 लाख करोड़ रुपये था।
  • पाकिस्तान एयरफोर्स: वायुसेना के हिस्से में 573 अरब रुपये आए हैं।
  • पाकिस्तान नेवी: नौसेना को 293 अरब रुपये दिए जा रहे हैं।

इतना ही नहीं, इस बजट में मिलिट्री पेंशन के लिए 822 अरब रुपये रखे गए हैं, जो पिछले साल 742 अरब रुपये थे। इसके अलावा फौजियों की सैलरी और भत्तों के लिए 967 अरब रुपये तथा सेना के ऑपरेशन्स के लिए 743 अरब रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि देश को इस हाल में पहुंचाने के बावजूद विकास कार्यों के बजट को पूरी तरह दबा दिया गया है।

PoK के बाद इस्लामाबाद में भी भड़की जनता

जब संसद के भीतर यह बजट पढ़ा जा रहा था, तब बाहर अवाम का गुस्सा सातवें आसमान पर था। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) और बलूचिस्तान में तो बिजली, आटे और आजादी को लेकर महीनों से भयंकर बगावत चल रही है, लेकिन अब यह आग राजधानी इस्लामाबाद तक पहुंच चुकी है। वित्त मंत्री ने जैसे ही बजट भाषण शुरू किया, विपक्षी सांसदों ने संसद के भीतर जोरदार हंगामा और नारेबाजी शुरू कर दी।

सड़कों पर उतरे हजारों लोग

इस्लामाबाद की सड़कों पर हजारों की तादाद में आम नागरिक, सरकारी कर्मचारी और गरीब लोग उतर आए हैं। मिडिल ईस्ट के संकट के चलते देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें पहले ही 40% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं और महंगाई दर 10% के पार जा चुकी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार आईएमएफ के कर्ज की शर्तें पूरी करने के लिए उन पर भारी टैक्स थोप रही है, लेकिन सारा पैसा विकास के बजाय सेना की अय्याशियों और हथियारों पर खर्च किया जा रहा है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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